पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया अल्तमस कबीर के कुछ फैसलों को लेकर जहां न्यायपालिका विवादों के घेरे में है, वहीं 27 जुलाई 13 को ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ अखबार में छपी न्यूज ''Apex court bench slams decision of ex-CJI Kabir'' जिसमें वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की टिप्पणी- ''These order should not have been passed'' से बवाल मचा हुआ है। वहीं जय प्रकाश एसोसिएट्स 'जेपी' के एक नये कारनामें का भी खुलासा हुआ है। खिसियाए जेपी प्रबंधन ने इस खबर पर टाइम्स ऑफ इडिया अखबार को नोटिस भेजी है। जेपी ग्रुप ने कहा कि टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर एकपक्षीय है।
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नोटिस के अलावा जेपी ने इस खबर की सत्यता को- दो अखबारों में विज्ञापन छपवाकर चुनौती दी है। जेपी की इस नोटिस की कुछ लाइन को टाइम्स ऑफ इंडिया ने 28 जुलाई 13 के अंक में छापा है। जिसके मुताबिक जेपी ग्रुप के संस्थान 'जल' ने इस अखबार में छपी खबर पर स्पष्टीकरण मांगा है और कहा कि अखबार ने जो कुछ भी छापा है, वह सच नहीं है। उधर पूर्व सीजेआई अलत्मस कबीर ने भी अखबार की खबर पर कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने पीठ के दोनों जजों से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है, ताकि जरूरत पड़ने पर मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के हवाले से प्रकाशित की गयी टिप्पणी के मामले में अखबार पर कार्रवाई की जा सके।
इस बाबत उत्तर प्रदेश के एक अखबार ‘डेली न्यूज एक्टिविस्ट’ के स्थानीय संपादक जेपी सिंह ने 29 जुलाई 13 के अंक में मध्यांतर पेज पर ‘‘विवादों के घेरे में न्यायपालिका’’ शीर्षक से बहुत ही सारगर्भित व न्यायसंगत टिप्पणी की है, जो पठनीय है। पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया अल्तमस कबीर द्वारा जेपी एसोसिएट्स को राहत देने वाले फैसले की खबर पर 23 जुलाई 13 को वर्तमान सीजेआई की टिप्पणी आई थी। तभी से देश भर के अखबारों व अधिवक्ताओं के बीच इस पर तीखी बहस हो रही है।
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श्री जेपी सिंह ने लिखा कि सेवानिवृत्त होने के बाद अपने फैसलों को लेकर विवादों में घिरे पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने अपने फैसले पर सीजेआई पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा टिप्पणी करने को अपमानजनक बताया है। हलांकि, उन्होंने दावा किया कि जेपी एसोसिएट्स मामले में सीजेआई पीठ ने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने पीठ के दोनों जजों से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है, ताकि जरूरत पड़ने पर मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के हवाले से प्रकाशित की गयी टिप्पणी के मामले में अखबार पर कार्रवाई की जा सके। 18 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए पूर्व सीजेआई की पीठ ने जेपी एसोसिएट्स को 100 करोड़ रुपये जुर्माने के मामले में राहत दी थी। मई 2012 में हिमाचल प्रदेश उच्च
न्यायालय ने जेपी एसोसिएट्स पर यह जुर्माना लगाया था।
पूर्व सीजेआई ने बताया कि उन्होंने खबर प्रकाशित होने के बाद पीठ के दोनों जजों से बात की। दोनों का कहना है कि उन्होंने ऐसी कोई भी टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने दोनों जजों से यही बात लिखित में देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अखबार के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि पीठ की टिप्पणी पर उन्हें काफी शर्मिंदगी और नाराजगी हुई थी। अगर टिप्पणी की खबर साबित हुई तो माफीनामा की मांग करेंगे।
इलाहाबाद से राजीव चन्देल की रिपोर्ट.
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