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राडिया टेप पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- इस टेप के कई प्रसंग बेहद परेशान करने वाले (सुनें)

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि पूर्व कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के फोन टेप की कई बातें परेशान कर देने वाली हैं। सीबीआई ने कहा है कि इन टेपों में से कुछ की जांच जरूरी है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा की पीठ ने कहा, "सीबीआई ने कई निष्कर्ष निकाले हैं और इस प्रतिलिपि में संभावित परिणाम कई चीजों को उजागर करते हैं। इसमें कई चीजें परेशान कर देने वाली हैं।"

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि पूर्व कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया के फोन टेप की कई बातें परेशान कर देने वाली हैं। सीबीआई ने कहा है कि इन टेपों में से कुछ की जांच जरूरी है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति वी. गोपाल गौड़ा की पीठ ने कहा, "सीबीआई ने कई निष्कर्ष निकाले हैं और इस प्रतिलिपि में संभावित परिणाम कई चीजों को उजागर करते हैं। इसमें कई चीजें परेशान कर देने वाली हैं।"

जांच एजेंसी ने कहा कि इसमें एक प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने और प्रतिलिपि से संबंधित कुछ मुद्दों पर अन्य एजेंसियों के साथ मिल कर जांच करने की जरूरत है। 5800 टेलीफोन वार्ताओं वाले राडिया के टेपों की जांच पर आधारित अपनी रिपोर्ट में एजेंसी ने ये बातें कही है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। सीबीआई ने 15 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्ट्री को राडिया के टेप की जांच से संबंधित अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

राडिया के फोन को आयकर विभाग ने तब निगरानी के दायरे में ले लिया था, जब वित्त मंत्रालय को 16 नवंबर 2007 को एक अनाम पत्र मिला था, जिसमें आरोप लगाया था कि महज कुछ ही वर्षो में इस महिला ने 300 करोड़ रुपये का व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर लिया है। शिकायत में राडिया के विदेशी संपर्क होने के भी आरोप लगाए गए थे। आयकर विभाग ने 2008-09 के बीच तीन बार 60-60 दिनों के लिए फोन को निगरानी पर रखा। टेप को सार्वजनिक किए जाने की मांग को लेकर एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर याचिका पर अदालत सुनवाई कर रही है। टेप में कुछ गैरकानूनी या आपराधिक तथ्य शामिल हैं। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

जांच टीम के अधिकारियों द्वारा किए गए सराहनीय काम की प्रशंसा करते हुए अदालत ने इस बात पर हैरत जताई कि 2जी मामले के अलावा आखिर संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। अदालत ने आगे कहा कि यह संयोग है कि अदालत ने राडिया के टेपों को लेकर आदेश दिया। यह कहते हुए अदालत ने पूछा कि आयकर विभाग ने इसे लिपिबद्ध क्यों नहीं कराया। दूरसंचार विभाग में महत्वपूर्ण पद पर काम करने वाले एक अधिकारी के निजी क्षेत्र की नौकरी में चले जाने की ओर इशारा करते हुए अदालत ने पूछा, "वर्गीकृत सरकारी सूचना तक पहुंच वाला कोई व्यक्ति यदि निजी क्षेत्र के संगठन का कर्मचारी हो जाता है तब क्या होगा।" न्यायमूर्ति सिंघवी ने सवाल किया, "वर्गीकृत सूचनाओं की सुरक्षा कैसे होगी? यदि कार्यालय छोड़ने से पहले लालच दिया जाए तो व्यक्ति हेराफेरी कर सबकुछ मिटा देगा।" अदालत ने कहा, "हम इन सभी मुद्दों की गहन जांच का निर्देश देंगे।"


राडिया टेप सुनने के लिए यहां क्लिक करें : राडिया टेप (सुनें)

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