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दुर्गा शक्ति पहली अधिकारी नहीं जिन्हें ईमानदारी की सजा मिली, देखें लिस्ट

खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाली प्रशिक्षु आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को यूपी सरकार ने सस्पेंड करके उनकी ईमानदारी की सजा दी है। रेत माफियाओं के खिलाफ उनके अभियान से क्षेत्र में अवैध खनन पर लगाम लग गई थी। शनिवार को नागपाल ने ग्रेटर नोएडा में अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाई जा रही मस्जिद को तोड़ने का आदेश दिया था। जिसके बाद सरकार ने उनके निलंबन कर दिया।

खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाने वाली प्रशिक्षु आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को यूपी सरकार ने सस्पेंड करके उनकी ईमानदारी की सजा दी है। रेत माफियाओं के खिलाफ उनके अभियान से क्षेत्र में अवैध खनन पर लगाम लग गई थी। शनिवार को नागपाल ने ग्रेटर नोएडा में अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाई जा रही मस्जिद को तोड़ने का आदेश दिया था। जिसके बाद सरकार ने उनके निलंबन कर दिया।

हमारे देश में ईमानदार अधिकारियों की क्या स्थिति है जरा गौर करें. लगता है कि ईमानदारी सबसे बड़ा अपराध है भारतीय लोकतंत्र में. यह शर्मनाक तो है ही वीभत्स भी है. कानून के संरक्षक हमें क्या सन्देश दे रहे हैं. यह न केवल भ्रष्टाचार बल्कि क्रूरता की पराकाष्ठा है. जिस देश में कानून संरक्षक ही हैवान हों उस देश विनाश निश्चित है. दुर्गा शक्ति पहली ऎसी अधिकारी नहीं है जिन्हें ईमानदारी की सजा मिली हो। कुछ ऐसे उदहारण जो हमारी जानकरी में हैं.

अशोक खेमका
हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को उनकी ईमानदारी की सजा उनके कार्यकाल से दोगुनी बार तबादले के रूप में मिली। 22 साल के कार्यकाल में इनका 44 बार तबादला किया गया। हाल ही में इन्होंने भ्रष्टाचार के एक मामले को उजागर किया था। जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का नाम सामने आया था। जिसके बाद इनका तबादला कर दिया गया था।

मनोजे नाथ
बिहार कैडर से आईपीएस अधिकारी मनोजे नाथ जिन्हें इनके साथी सबसे अच्छे डीजीपी के रूप में जानते थे, का तबादला 39 साल के करियर में 40 बार किया गया। तीन बार तो नाथ से जूनियर अधिकारियों को प्रमोशन दे दिया गया। हद तो तब हो गई जब बिहार में नीतीश कुमार के राज में एक साल के अंदर चार बार तबादला किया गया।

राहुल शर्मा
गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा को अपने इलाके में सांप्रदायिक घटना को होने से रोकने की सजा उन्हें अपनी प्रोफाइल से नीची प्रोफाइल पद पर तबादला करके दी गई। गुजरात दंगों के बाद भावनगर में इनकी पोस्टिंग बतौर जिला एसपी हुई थी। इन्होंने हिंदुओं के एक समूह पर फाायरिंग कर दी थी,क्योंकि यह भीड़ शहर में मौजूद मदरसे पर हमला करने जा रही थी। इसके बाद उन्हें अहमदाबाद पुलिस कंट्रोल रूम में डीसीपी बना दिया गया। बीस साल के करियर में इनका 12 बार तबादला हुआ।

आनंद वर्धन सिन्हा
आईएएस अधिकारी आनंद वर्धन सिन्हा 24 मार्च 2005 तक योजना आयोग में सलाहकार के पद पर रहते हुए एक पद ही सबसे ज्यादा समय तक रहने वाले अधिकारी रहे हैं। इन्होंने एक ही पद पर साढ़े सात साल तक काम किया।

अमिताभ ठाकुर
यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर जो कि हमेशा समाज में हो रहे गैर कानूनी कामों पर नजर रखते हैं, का 18 साल के कार्यकाल में 22 बार तबादला हुआ। इन्हें कई तरीकों से प्रताड़ित किया जा रहा है जिसमें से एक प्रमोशन न देना है और उपेक्षित रखना है। एक साक्षात्कार में इन्होंने कहा था कि मैं रोज समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहता हूं लेकिन छोटे से समय के बाद ही तबादला मेरी इन कोशिशों पर रोक लगा देता है।

ईमानदारी के लिए मौत
 
सत्येंद्र दुबे
बिहार में एक प्रोजेक्ट में हो रही गड़बड़ी के बारे में पीएमओ को अवगत कराने की सजा इन्हें मौत के रूप में दी गई। साल 2003 में नेशनल हाइवे अथोरिटी में प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते हुए इन्होंने ये पत्र पीएमओ को लिखा था।

नरेंद्र कुमार
मध्यप्रदेश से आईएएस कैडर रहे नरेंद्र कुमार को खनन माफियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सजा मौत के रूप में मिली।

शनमुघन मंजुनाथ
पैट्रोल में मिलावट पर रोक लगाने वाले इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के मार्केटिंग मैनेजर शनमुघन मंजुनाथ की हत्या एक पैट्रोल पम्प के मालिक के बेटे द्वारा उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कर दी गई थी।

एसपी महंतेश
कर्नाटक में कॉऑपरेटिव विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर रहे महंतेश ने राज्य में चल रहे गैरकानूनी ढंग से कॉ-ऑपरेटिव सोसाइटी को भूमी आवंटन का खुलासा किया था। इसके बाद इनको कार से खींच पर इन पर लोहे की रॉड से हमला किया गया था। हमले के पांच दिन बाद इनकी मौत हो गई थी।

शशांक यादव
तुर्की की कंपनी फर्नास फर्नास कंस्ट्रक्शन ने 2200 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए जो पेपर दिए थे इनमें से कुछ फर्जी थे. सीबीआई इसकी जांच कर रही है और नोएडा की इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) में कार्यरत सीनियर इंजीनियर शशांक यादव इस केस की जांच में मदद कर रहे थे। शशांक कंपनी में सीबीआई के प्वाइंट परसन थे. सारे दस्तावेज़ और सबूत शशांक ही सीबीआई को दिखा रहे थे. जांच की प्रक्रिया अंतिम दौर में थी. चूंकि कागज़ात शशांक ने दिए थे इसलिए उनका और उनके साथी का बयान दर्ज होना था.

ईमानदारी के कारण प्रताड़ित किए गए, किए जा रहे, मारे गए अफसरों की लंबी लिस्ट है, जिसमें से उपर उदाहरण के तौर पर कुछ नाम दिए गए हैं. ये उदाहरण समझाने के लिए काफी हैं कि अगर इस सिस्टम में कोई ईमानदारी और कानून के हिसाब से काम करना चाहे तो सत्ता-नेता उसे न सिर्फ परेशान करते हैं बल्कि मनोबल तोड़ने का कोई मौका नहीं चूकते. साथ ही कई बार ईमानदारी का नतीजा जान देकर भी चुकाना पड़ जाता है.

लेखक शैलेन सिंह राजस्थान में जयपुर के प्रतापनगर निवासी हैं.

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