: छंटनीशुदा पत्रकारों ने सपा नेताओं मुलायम और अखिलेश से नभाटा से दूर रहने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की अपील की : समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव पूंजी और श्रम की लडाई में हमेशा कमज़ोरों के साथ खड़े हुए और सरमायेदारों से लड़े। नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठत हिंदी अख़बार को लखनऊ से बन्द किये जाने के विरोध में पत्रकारों और कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ कर उन्होंने हम लोगों में न्याय पाने के लिए संघर्ष का जज्बा पैदा कर के जोश भरा था।
अपने मुख्यमंत्रित्व के दौरान मुलायम सिंह यादव ने महाधिवक्ता वीरेन्द्र भाटिया से कह कर नामी गिरामी वकील पैरवी के लिए मुहैया कराये और पत्रकारों की मदद की। अब लखनऊ से २० साल बाद फिर नवभारत टाइम्स के मालिक नवभारत टाइम्स का पुनः प्रकाशन शुरू करने जा रहे हैं। छटनीशुदा पत्रकार और कर्मचारी श्रम कानूनों के तहत नवभारत टाइम्स में पुनः नियुक्ति पाने के अधिकारी हैं पर प्रबन्ध तंत्र कानून तोड़ने पर अमादा है।
अब देखना है की प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी पार्टी की नीतियों के अनुसार मजलूमों और पत्रकारों का साथ देकर उन्हें पुनः कानूनन रोजगार दिलायेगे या फिर मौन रह कर परोक्ष रूप से सरमायेदारों के साथ खड़े होकर अपने बनाये कानूनों की लाज लुटती देखेगे। तन्त्र तो हमेशा मालिक के कब्जे में रहता है देखना है की जनता के प्रति जवाबदेह यह युवा मुख्यमंत्री अपने पिता के पदचिन्हों पर कितना चलते है। अनाधिकृत तौर पर ज्ञात हुआ है कि नवभारत टाइम्स प्रबंधन ४ अगस्त को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अख़बार का श्रीगणेश कराने की सोच रहा है और इसके मालिकों (जैन बन्धुओं) ने इस मौके पर मुख्यमंत्री की अगुवानी में खड़े होने की बजाय अपने "नौकरों" से उनका स्वागत कराने और अस्वस्थता का बहाना लेकर समारोह से दूर रहने की सोची है.
अब राज्य के श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ा कर शुरू होने जा रहे इस अख़बार के समारोह में जाने से मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव की गरिमा बढेगी या नहीं ये तो उन्हें ही तय करना है कि प्रचण्ड जनादेश के साथ प्रदेश की सत्ता सम्भालने के समय "भय या पक्षपात अनुराग या द्वेष के बिना सब प्रकार के लोगों के साथ न्याय करने की जो संविधान की शपथ" उन्होंने लाखों लोगों के सामने ली थी, उसका वह कितनी ईमानदारी से निर्वहन कर पाते हैं?
मुदित माथुर
वरिष्ठ पत्रकार
लखनऊ






