युवा आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़ा मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अब साफ-साफ कह दिया है कि वे मीडिया और विरोधियों के दबाव में जरा भी झुकने वाले नहीं हैं। ग्रेटर नोएडा की एसडीएम रहीं दुर्गा शक्ति नागपाल को सरकार ने पिछले दिनों निलंबित कर दिया था। आरोप लग रहा है कि सरकार के आकाओं ने बालू माफियाओं के दबाव में एक खांटी ईमानदार अधिकारी को सजा दे दी है। जबकि, इस जांबाज अधिकारी को सरकार से शाबासी मिलनी चाहिए थी। इस मामले को लेकर आम जनभावनाएं भी सरकार की कार्यशैली के धुर खिलाफ हो गई हैं।
लगातार सरकारी फैसले की आलोचना होती जा रही है। यूपी की आईएएस एसोसिएशन ने भी दुर्गा शक्ति के निलंबन का जमकर विरोध किया है। इन लोगों ने राज्य के कार्यवाहक मुख्य सचिव से मिलकर अपनी नाराजगी जताई है। इस घटना को लेकर राष्ट्रीय राजधानी और एनसीआर में भी सरकार के कार्य-कलाप के खिलाफ लोगों की नाराजगी बढ़ी है। सवाल किए जा रहे हैं कि समाजवादी रीति-नीति की दुहाई देने वाली सरकार किस तरह से दुर्गा शक्ति जैसे खांटी अधिकारियों का मनोबल गिराने में लगी है?
उम्मीद की जा रही थी कि इस मामले में जनभावनाओं को देखते हुए शायद, सरकार जल्दी ही अपनी भूल सुधार कर लेगी। कम से कम युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से यह उम्मीद जरूर की जा रही थी कि वे इस मामले में लोकलाज को एकदम ठेंगा नहीं दिखाएंगे। वे दुर्गा शक्ति का निलंबन वापस लेने पर विचार जरूर करेंगे। लेकिन, वोट बैंक की राजनीति का इस मामले में अजब-गजब खेल शुरू हो गया है। इसी के दबाव के चलते सरकार ने दुर्गा के मामले में एकदम अड़ियल रुख अपना लिया है। दरअसल, यह मामला सीधे-सीधे वोट बैंक की राजनीति से जुड़ गया है। अब यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर आईएएस एसोसिएशन उठाने जा रही है। देश के कई हिस्सों में खांटी ईमानदार अधिकारियों पर सरकारी गाज गिरती ही रहती है। ये शुभ संकेत नहीं हैं। आखिर, लोकतांत्रिक सरकारें सामान्य लोकलाज की भी परवाह न करें, तो यह गंभीर चिंता की बात जरूर है।
लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।





