लखनऊ स्थित सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ नूतन ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूर्व आईएएस हरमिंदर राज सिंह की कथित आत्महत्या की जांच सीबी-सीआईडी से कराये जाने की मांग की है. ठाकुर ने 29 नवंबर 2009 को हरमिंदर राज की मौत के समय विभिन्न समाचारपत्रों में छपी टिप्पणियों और उस समय चर्चा में आई तमाम शंकाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि उस समय राजनैतिक दवाब में यह घटना होने और इसके बड़े भ्रष्टाचार से जुड़े होने की बात कही गयी थी.
उन्होंने घटना के तीन दिन के अंदर पुलिस ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा देने पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि चूँकि स्वयं मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी ने उस समय जांच की मांग की थी, अतः अब नितांत आवश्यक है कि वे इस मामले की राज्य सरकार की एजेंसी सीबी-सीआईडी से जांच करा कर सच्चाई सामने लाने में मदद करें.
Copy of the letter—
सेवा में,
श्री अखिलेश यादव,
मुख्य मंत्री,
उत्तर प्रदेश सरकार,
लखनऊ
विषय- दिवंगत आईएएस श्री हरमिंदर राज सिंह की कथित आत्महत्या की जांच सीबी-सीआईडी से कराये जाने विषयक
महोदया,
कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर, एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ जो प्रशासन में उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता तथा मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत हूँ. मैं आपके सम्मुख उत्तर प्रदेश के दिवंगत आईएएस अधिकारी श्री हरमिंदर राज सिंह की आत्महत्या के मामले में सीबी-सीआईडी अथवा राज्य की किसी अन्य उच्च-स्तरीय संस्था से जांच करा कर उन्हें और उनके परिवार को न्याय दिलाए जाने हेतु यह पात्र प्रेषित कर रही हूँ. आपको स्मरण होगा की दिनांक 29/11/2009 की रात श्री हरमिंदर राज सिंह, जो उस समय प्रमुख सचिव (आवास) के पद पर तैनात थे, ने कथित रूप से स्वयं को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी. उस समय सुश्री मायावती मुख्यमंत्री थीं. श्री सिंह की आकस्मिक मौत से कई सवाल एक साथ खड़े हो गए थे. मैं उस समय कही गयी कुछ बातें आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रही हूँ-
1. ''उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि जांच सीबीआई के हवाले करके इस मुद्दे पर राजनीति होने का मौक़ा न दे. इतने बड़े अधिकारी की अकाल मृत्यु कोई मामूली हादसा नहीं है, बिना शुरुआती जांच किये लखनऊ पुलिस की तरफ से इसे बीपी की वजह से की गयी आत्महत्या कहना बहुत ही गैर ज़िम्मेदार आचरण है क्योंकि इस घोषणा के कारण आगे होने वाली जांच प्रभावित हो सकती है'' – दिल्ली स्थित वरिष्ठ पत्रकार श्री शेष नाराया सिंह के ब्लॉग से
2. ''लखनऊ में तरह-तरह की बातें हवा में तैर रही हैं। जितने मुंह-उतनी बातें। कोई कहता है क़ि मायावती राज में ईमानदार अधिकारियों की कोई जगह नहीं। हरमिंदर कोर्ट में उन विवादस्पद निर्माण कार्यों की पैरवी करते थे जिनके लिए लगातार मायावती सरकार की किरकिरी हो रही है। लोग कहते हैं कि हो सकता है कि ऐसे ही किसी दबाव को नहीं झेल पाने के चलते हरमिंदर ने अपनी जान ले ली हो।'' -छपास नामक ब्लॉग से
3. 29 नवम्बर, 2009, मध्यरात्रि के बाद एक बजकर बीस मिनट पर उन्होंने आत्महत्या कर ली. जिस तत्परता से प्रदेश सरकार ने इस मामले को निपटाया तथा हाल ही में लखनऊ में हुई बैठक, जिसमें उनकी मौत पर सवाल उठने की आशंका थी; पर शासन-प्रशासन की प्रतिक्रिया ने इस मौत को और रहस्यमयी बना दिया है. घटनास्थल पर कोई पत्र नहीं था, जिसमें आत्महत्या की वजह बताई गई हो. पिस्तौल की गोली कुछ दिनों बाद मिली किन्तु पिस्तौल का बैलिस्टिक परीक्षण नहीं हुआ. उनका लैपटॉप, कम्प्यूटर भी नहीं मिला. मोबाइल फोन पर शाम छह बजे के बाद कोई कॉल नहीं दर्ज है, जबकि साढ़े आठ-नौ बजे कोई फोन आने के बाद ही हरमिंदर राज पार्टी छोड़ कर गए. ऐसा बताया जा रहा है कि आत्महत्या के बाद प्रदेश सरकार के तीन आला अफसर जिनमें एक आईएएस व एक आईपीएस शामिल हैं, सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे हैं. ऐसा भी कहा जा रहा है कि हरमिंदर राज के ऊपर कोई बड़ा भारी दबाव था. अब यह दबाव जेल तोड़ कर परिस्थितिकी पार्क बनाने, लखनऊ में वर्तमान समय में डॉ अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल अधिनियम के तहत बन रहे स्मारकों के बजट, दादरी में सिंचाई विभाग की जमीन एक बिल्डर को देने, नोएडा में 10-12 किलोमीटर लम्बे एक वन विभाग की जमीन के टुकड़े को स्मारक को देने, कानपुर शहर के बीचों-बीच एक बड़ा भू-भाग सिंहानिया को देने का मामला था या कुछ और यह जांच का विषय होना चाहिए..-रविवार ब्लाग से
4. उपर्युक्त कार्यक्रम पर शासन-प्रशासन की प्रतिक्रिया देखते हुए अब यह शक यकीन में तब्दील हो गया है कि हरमिंदर राज की मृत्यु कोई साधारण आत्महत्या नहीं थी. जिस तरह से ऊपर से नीचे तक सारा शासन-प्रशासन एक छोटे से कार्यक्रम की आवाज दबाने में जुट गया, यह साफ है कि इस आत्महत्या में कोई बहुत बड़ा राज छुपा हुआ है. या तो कोई बहुत बड़ा व्यक्ति इस आत्महत्या के लिए जिम्मेदार हो सकता है अथवा किसी बड़े भ्रष्टाचार का राज खुल सकता है. उ.प्र. में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को बुरी तरह अपमानित किया जाता है, यह किसी से छुपी बात नहीं है.. -रविवार ब्लाग से
5. Mystery shrouds the death of senior IAS officer of the Uttar Pradesh cadre, Harminder Raj Singh, who shot himself at his residence here in the early hours of Sunday. What led Mr. Singh to the extreme step is unknown as no suicide note was found. Even as the police said the bureaucrat had blood pressure and might have been suffering from depression, several theories are floating here about the probable cause of the suicide. One is that pressure was being applied on him from an unknown quarter for executing a particular scheme.- The Hindu
6. Are unreasonable demands from above driving Uttar Pradesh top officials to the end of their tether? The question is abuzz in the power corridors of the state after a senior IAS officer allegedly committed suicide on Sunday. While the post-mortem report puts the time of his death at 1.30 am on Sunday, the hush-hush manner in which the autopsy was conducted has fuelled speculation about what drove the bureaucrat to take the extreme step. Lucknow DIG Prem Prakash's official statement on the death has also raised doubts. "Singh had been ill for the past few days, he was suffering from high blood pressure and some other ailments for which he was taking medicines, the cause of death seems to be suicide," the DIG told reporters. Questions are also being asked why doctors were called in the dead of night to conduct the post-mortem. Also, no one except close relatives and family friends were allowed near the body at Singh's house. The media was also kept at bay. Besides, no minister or top official from the chief minister's secretariat came to Singh's house to pay respects.- DNA
7. While none was ready to go on record, it is being said that the officer was under tremendous political pressure to carry out jobs that his conscious would not allow him to do. Lucknow district police chief Prem Prakash sought to attribute the suicide to "hyper- tension" that Singh was suffering from. One of the victim's colleagues said: "I do not understand how anyone would kill himself because of high blood pressure. And where other types of pressures were concerned, Harry (as he was popularly referred to by friends) was not the type who I would imagine taking a gun to shoot himself."- IANS
8. The buzz is that two phone calls has become mystery for the bureaucratic circles of UP which devastated the life of a senior IAS officer HARMINDER RAJ SINGH who committed suicide after these calls. It is being speculated in the corridor of powers in UP that these phone calls were from chief minister’s subordinate and closet to Mayawati. Now these two calls has become the burning issue in the political circles. The opposition accused the Mayawati government that the whole bureaucracy in UP is working under tremendous pressure and the death of 1978 batch IAS officer is it’s latest example. – indianbuzz.com
उस समय स्वयं आपकी पार्टी ने भी सीबीआई जांच की मांग की थी. लेकिन घटना के दो दिन के अंदर क्लोजर रिपोर्ट भी लग गयी. द टाइम्स ऑफ इंडिया की 1 दिसंबर की रिपोर्ट के अनुसार- “Treating the death of senior IAS officer Harminder Raj Singh as an open-and-shut case of suicide, the police late on Sunday night rounded up the investigations into his untimely death within 24 hours of the incident having come to light. Police said that any further investigations would be conducted only if any of the victim's family members wanted so and approached the police in writing.”
श्री ए के जैन, तत्कालीन एडीजी (लॉ आर्डर) का यह बयान विशेष रूप से द्रष्टव्य है- “Our concern was limited to the extent of establishing if his death was a suicide or something else. Now that it is more or less established that the incident was that of suicide, there is no reason to probe into the probable reasons which could have forced him to take such a drastic step," ADG Jain said, talking to TOI.”
अभी तीन दिन पहले आपने स्वयं भी इस हत्याकांड का जिक्र अपने एक संबोधन में किया था जहां आपने यूपी आईएएस एसोसियेशन को श्री सिंह की हत्या के समय चुप्पी साध लेने के लिए दोषी ठहराया था. चूँकि वर्तमान में मुख्यमंत्री पद पर बदलाव आ गया है और आपने घटना के समय स्वयं भी इस प्रकरण में जांच की मांग की थी, अतः मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि कृपया इस रहस्यमय कथित आत्महत्या की बंद हो चुकी जांच को दुबारा खुलवा कर इसी सीबी-सीआईडी अथवा किसी अन्य राज्य-स्तरीय उच्च अन्वेषण ईकाई से जांच कराये जाने की कृपा करें ताकि श्री हरमिंदर राज की अचानक हुई मृत्यु और उससे जुड़े तमाम अनसुलझे प्रश्नों से पूरी तरह पर्दा उठ सके और सच्चाई सामने आ सके.
संभव है इस जांच से कुछ बहुत ही महत्वपर्ण तथ्य सामने आ जाएँ, जिन से इस मामले में वास्तव में न्याय हो सके और भ्रष्टाचार और शासन-प्रशासन के बीच भ्रष्टाचार को ले कर बने खतरनाक संबंधों के विषय में भी रहस्योद्घाटन हो सके. यह मात्र श्री सिंह और उनके परिवार से जुड़ा मामला नहीं है बल्कि एक पूरी शासन और प्रशासन की व्यवस्था और वृहद लोक-सन्दर्भों और पब्लिक इंटरेस्ट से भी जुड़ा मामला है. अतः इस सम्बन्ध में आपकी स्तर पर किये गए सकारात्मक पहल की हर स्तर पर भूरी भूरी प्रशंसा होगी.
पत्र संख्या- NT/HRS/Mur/01
दिनांक- 03/08/2013
भवदीय, (डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ





