जैसलमेर पोकरण विधायक साले मोहम्मद के पिता मुस्लिम धर्म गुरु और जैसलमेर के पुराने हिस्ट्रीशीटर की हिस्ट्रीशीट वापस खोलने पर राजनीतिक दबाव का शिकार हुए जैसलमेर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार चौधरी का तबादला होने के बाद जैसलमेर की जनता पुलिस अधीक्षक के तबादले के विरोध में सड़कों पर उतर आई.
जनता के आह्वान पर जैसलमेर आज पूरी तरह बंद रखा गया. लोगों ने खुले मन से पुलिस अधीक्षक के तबादले का विरोध करते हुए राज्य सरकार को साफ़ चेतावनी दी है कि राजनीतिक दबाव में किया पुलिस अधीक्षक का तबादला तत्काल निरस्त किया जाये नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने को सरकार तैयार रहे. पुलिस अधीक्षक के तबादले के विरोध में जैसलमेर अभूतपूर्व बंद रहा. यहां तक की चाय की थडिया तक नहीं खुली. आम लोग सरकार के निर्णय के विरोध में सड़कों पर उतर आए. उल्लेखनीय है कि पोकरण विधायक साले मोहम्मद को इमानदार और दबंग पुलिस अधीक्षक पंकज चौधरी फूटी आँख नहीं सुहा रहे थे. लम्बे समय से उन्होंने मुख्यमंत्री पर पुलिस अधीक्षक के तबादले को लेकर दबाव बना रखा था.
जैसलमेर के एसपी को भारी पड़ा कांग्रेसी विधायक से पंगा लेना
ईमानदार अफसर नेताओं को फूटी आंख नहीं सुहाते। जब अफसर नेताओं या उनके गुर्गो के खिलाफ कार्रवाई करते हैं तो उन्हें ट्रांसफर या निलंबन के जरिए प्रताड़ित करने की कोशिश की जाती है। आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को जहां रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई की सजा मिली वहीं राजस्थान के जैसलमेर जिले के एसपी को कांग्रेस के एक दबंग विधायक से पंगा लेना भारी पड़ गया।
हिस्ट्रीशीट खोलने पर किया तबादला
पोखरण से कांग्रेसी विधायक साले मोहम्मद के पिता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोलने पर जैसलमेर के एसपी पंकज चौधरी का तबादला कर दिया गया। चौधरी ने टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े दलालों और स्थानीय शराब माफिया के खिलाफ अभियान चलाया था। संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चौधरी की साले मोहम्मद से कहासुनी भी हुई थी। स्थानीय लोग चौधरी के निलंबन का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने ट्रांसफर के विरोध में जैसलमेर बंद बुलाया है। लोगों का कहना है कि चौधरी ने जिले में बढ़ते अपराध पर लगाम लगाई थी।
अवैध रूप से बंद कर दिया था मामला
आरोप है कि साले मोहम्मद के पिता गाजी फकीर भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली तस्करी और असामाजिक गतिविधियों में कथित रूप से लिप्त है। 31 जुलाई 1965 को पहली बार गाजी फकीर की हिस्ट्री शीट खोली गई थी। 1984 में पुलिस की फाइल गायब हो गई थी। इसके बाद 1990 में फिर हिस्ट्रीशीट खोली गई लेकिन मई 2011 में एएसपी रैंक के एक अधिकारी ने अवैध रूप से केस बंद कर दिया। चौधरी ने गाजी फकीर की हिस्ट्री शीट खोलने की बात की पुष्टि की है। बकौल चौधरी जिले में समाज कंटकों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर विधायक को कुछ दिक्कत थी। पुलिस मुख्यालय से पिछले माह राजस्थान के सभी पुलिस अधीक्षकों को आदेश मिले थे कि जिनकी हिस्ट्रीशीट फाइल बंद हो गई है उनकी जांच की जाए। इसके तहत गाजी फकीर की बंद हिस्ट्रीशीट फाइल का अध्ययन किया। संदेह होने पर फाइल को वापस खोला गया। रहा सवाल तबादले का तो जो राज्य सरकार से निर्देश मिले हैं, उनकी पालना की जाएगी। बंद समर्थकों की अपनी सोच है, इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
हाल ही में हुआ था बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान सरकार ने हाल ही में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए आईएएस और आईपीएस के तबादले किए थे। चौधरी का तबादला कर उन्हें अजमेर के किशनगढ़ में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में पदस्थापित किया गया। चौधरी जैसलमेर में सिर्फ पांच महीने ही एसपी रह पाए। कहा जा रहा है कि पोखरण के विधायक साले मोहम्मद के दबाव के कारण चौधरी को फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया। विधायक के भाई अब्दुल्ला फकीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अब्दुल्ला फकीर जैसलमेर के जिला प्रमुख निर्वाचित हुए थे।
गाजी फकीर के बेटे ने आरोप खारिज किए
अब्दुल्ला ने कहा कि मेरे पिता 80 साल के हैं। वह ठीक से सुन और देख भी नहीं सकते। उनके खिलाफ कोर्ई चार्जशीट नहीं है। पिछले तीन दशकों में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगा है। हाल ही में हिस्ट्रीशीट को दोबारा खोल दिया गया। इससे पता चलता है कि चुनावी साल में उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है। हम अधिकारी का तबादला करवाने के लिए दबाव बनाने की बजाय पुलिस की कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।
एसपी के तबादले के विरोध मे जैसलमेर बंद
विभिन्न संगठनो की ओर से रविवार को किए गए जैसलमेर बंद के आह्वान को अपार जन समर्थन मिला। इस दौरान सुबह से ही दुकाने बंद रही और मुख्य बाजार खुले ही नहीं। शहर के गड़ीसर मार्ग, गुलासता रोड, आसनी रोड, गोपा चौक, सदर बाजार, जिंदानी चौक, कचहरी रोड़, गांधी चौक, अमरसागर प्रोल, हनुमान चौराहा, गीता आश्रम मार्ग सहित अधिकांश मुख्य मार्गो पर सन्नाटा पसरा हुआ दिखाई दिया और बाजार खुले ही नहीं। गोल्डन सिटी टूरिज्म डेवलपमेंट कन्फेडरेशन सोसायटी के अध्यक्ष पृथ्वीराज ने बताया कि जिले में पदस्थापित कत्तüव्यनिष्ठ अधिकारियों के विरूद्ध राजनैतिक दबाव बनाकर करवाए जा रहे तबादलों से आम जनता में रोष है। जैसलमेर पुलिस अधीक्षक का अल्प समय मे स्थानांतरण भी इसका उदाहरण है। गौरतलब है कि एसपी पंकज चौधरी के तबादले को गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट दुबारा खोले जाने से जोड़कर देखा जा रहा है।
गाजी फकीर का एक पुत्र शाले मोहम्मद पोकरण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक है, वहीं दूसरा पुत्र अब्दुला फकीर जिला प्रमुख है। इससे पूर्व रविवार सुबह सत्यदेव पार्क में बड़ी संख्या मे शहरवासी एकत्रित हुए और एसपी के तबादले के विरोध मे जुलूस निकाला और जमकर नारेबाजी की। शहर के मुख्य मार्गो से होकर यह जुलूस जैसलमेर के कलक्ट्रेट पहुंचा। गौरतलब है कि विभिन्न व्यापारिक संगठनों तथा वस्त्र व्यवसायी संघ, फल व सब्जी विक्रेता संघ, किराणा-अनाज व्यापार संघ, मजदूर संघ, टैक्सी कार एसोसिएशन, थ्री व्हीलर यूनियन, होटल एसोसिएशन, हेण्डीक्राफ्ट्स एसोसिएशन, गाइड एसोसिएशन, रेस्टोरेंन्टस एसोसिएशन व अन्य व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बंद को समर्थन दिया। इस दौरान किसी तरह की अप्रिय वारदात नहीं होने के लिए जगह-जगह पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया था।
जैसलमेर से चंदन भाटी की रिपोर्ट.





