Wasim Akram Tyagi : इंसाफ की आवाज को कहां तक दबाओगे ? तुम समाजवादी नहीं फांसीवादी हो तुम्हारे ही इशारों पर वह पेज हुआ है जिसमें खालिद मुजाहिद के लिये इंसाफ मांगा जा रहा था, जिसके सद्स्य रोजाना बढ़ रहे थे, ये कैसा दुस्साहस है उत्तर प्रदेश की समाज वादी सरकार ? अखिलेश ने चुनाव के दौरान कहा था सपा सरकार पहले वाली गलतियां नहीं दोहरायेगी मगर गलतियां दोहराईं जाती यहां तक तो जुल्मों को सहने वाली जनता बर्दाश्त कर लेती मगर गलतियां पिछले कार्यकाल से 20 गुना ज्यादा हैं।
अपने नेताओं को बचाने के लिये दुर्गा का सहारा लिया फिर आरोप मढ़ दिया मुसलमानों पर कि दुर्गा ने मस्जिद की दीवार गिरवाई थी। कैसा भौंडा मजाक है एक आईएसएस के साथ उस डिग्री के साथ जो इस देश की सबसे बड़ी डिग्री के साथ, अगर सरकारी जमीन पर मस्जिद बनायी जाये तो एक ईमानदार अफसर क्या करेगा ? और मुसलमानों को बदनाम करने के लिये जिस राग तुम अलाप रहे हो सपाईयों ऐसा नोएडा में कोई मामला नहीं था जिसमें तनाव उत्पन्न होता। अपने चमचों को बचाने के लिये फिर मुसलमानों की बली दे रहे ? और अगर कोई विरोध करता है चाहे वह कंवल भारती ही क्यों न हो उन्हें बंद कर रहे हो। भूल गये ऐसी ही गलती एक बार इंद्रा गांधी ने की थी उसका अंजाम क्या हुआ शायद अखिलेश को तो याद न हो मगर नेता जी को जरूर याद होगा। अभिव्यक्ती पर हमला करके खुद को समाजवादी कहते हो. फांसीवादियों, आजम खानियों..
युवा पत्रकार वसीम अकरम त्यागी के फेसबुक वॉल से.





