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दैनिक जनवाणी ने मेरठ के बड़े-बड़े धुरंधर व खिलाड़ी पत्रकारों को ठिकाने लगा दिया

दैनिक जनवाणी अखबार की लांचिंग के समय मेरठ के बड़े अखबारों में घबराहट का माहौल था। इसकी वजह देश के नंबर एक अखबार दैनिक जागरण को करारा झटका देकर जनवाणी ने वहां से कई बड़े नामों को अपने साथ जो़डा था। खेल पत्रकारिता के क्षेत्र में ब़डा नाम यशपाल सिंह को समूह संपादक बनाकर जनवाणी के निदेशकगण भूपेंद्र सिंह बाजवा और जितेंद्र सिंह बाजवा ने बड़ा दांव खेला था। जागरण को इससे एक और झटका अपने सिटी इंचार्ज रवि शर्मा के इस्तीफे से लगा।

दैनिक जनवाणी अखबार की लांचिंग के समय मेरठ के बड़े अखबारों में घबराहट का माहौल था। इसकी वजह देश के नंबर एक अखबार दैनिक जागरण को करारा झटका देकर जनवाणी ने वहां से कई बड़े नामों को अपने साथ जो़डा था। खेल पत्रकारिता के क्षेत्र में ब़डा नाम यशपाल सिंह को समूह संपादक बनाकर जनवाणी के निदेशकगण भूपेंद्र सिंह बाजवा और जितेंद्र सिंह बाजवा ने बड़ा दांव खेला था। जागरण को इससे एक और झटका अपने सिटी इंचार्ज रवि शर्मा के इस्तीफे से लगा।

पत्रकारिता के हर स्याह-सफेद खेल में माहिर रवि ने जनवाणी में सह संपादक और जीएम मीडिया मार्किटिंग के रूप में ज्वाइन किया। दैनिक जागरण के मालिकों के हर काम को साम, दंड और भेद (दाम केवल अपने लिए बनाए) से रवि ने कर दिखाया। वरिष्ठों को नजरंदाज करके रवि शर्मा को जागरण ने खूब आगे ब़ढाया था। इसलिए उसके जाने से जागरण को झटका ही लगा। इसके साथ ही हिंदुस्तान मेरठ से वरिष्ठ पत्रकार लोकेश पंडित को भी सिटी इंचार्ज बनाकर जनवाणी ने धमाका कर दिया।

लोकेश की पहचान मेरठ में जोरदार रिपोर्टर होने के साथ ही रवि शर्मा के समान ही हर खेल में माहिर पत्रकार की रही। जनवाणी ने जागरण के कई वरिष्ठ पत्रकारों को अपने पाले में किया। जनवाणी की मंशा साफ थी कि रवि और लोकेश के सहयोग से वह अपने मंसूबों को पूरा कर सकेगा। लेकिन यहां दिग्गजों का अहम टकरा गया। अंदरखाने ही टकराव शुरू हो गया। मालिकों का करीबी बनने और दाम बनाने के इस खेल में एक-दूसरे को मात दी जाने लगी। इस जंग का पहला शिकार लोकेश पंडित को बनना प़डा।

लांचिंग के कुछ समय बाद ही लोकेश पंडित का संस्थान से पत्ता साफ हो गया और उन्हें महुआ चैनल ज्वाइन करना प़ड़ा। अब रवि शर्मा की बन पड़ी और उन्होंने अपनी मर्जी से पूरा खेल किया। जनवाणी प्रबंधन से रवि शर्मा की ठन गई। एक-दूसरे के हितों की खबरों को अखबार से हटवाया जाने लगा। दोनों एक-दूसरे की पार्टियों को नुकसान पुंचाने लगे। मामला बिग़ता देखकर एकाएक जनवाणी प्रबंधन ने प्रिंट लाइन में सह संपादक के रूप में जा रहा रवि शर्मा का नाम हटवा दिया और उनका देहरादून ट्रांसफर कर दिया।

अपना बुरा हश्र देखकर घमंडी व बड़बोले रवि शर्मा ने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। लोकेश व रवि के साथ ही कई दूसरे दिग्गज भी संस्थान से विदा हो गए। सहारनपुर के ब्यूरो चीफ रहे वीरेंद्र आजम को हटा दिया गया। हालांकि बिजनौर में चापलूसी व पैसे के खेल के माहिर दिवाकर झा को फिर से वापस लाया गया। बागपत में जैसे-तैसे जयवीर सिंह तोमर समय पूरा कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर में ज्ञानप्रकाश जैसे वरिष्ठ पत्रकार का समय कब तक कटेगा, यह देखने वाली बात होगी।

रवि-यशपाल की अदावत में गई दर्जनों लोगों की नौकरी

एक-दूसरे के विरोधी रहे रवि शर्मा और यशपाल सिंह को दैनिक जनवाणी में प्रबंधन ने जब एक जगह लाकर बैठाया, तभी से ही दोनों के बीच शीतयुद्ध शुरू हो गया था। रवि की निगाह सबसे ज्यादा सिटी एडिशन पर थी। यहां संपादक के लोगों को रवि ने परेशान करना शुरू कर दिया। जबकि संपादक ने कभी सिटी एडिशन में हस्तक्षेप नहीं किया। रवि शर्मा ने अपने विरोधी दर्जनों लोगों की नौकरी खाई। सिटी इंचार्ज रहे लोकेश पंडित को परेशान करने में कसर नहीं छो़डी। अंततः उन्हें यहां से विदा होना पड़ा। संपादक ने अपने कई करीबी लोगों को सह संपादक के कहर से बचाया।

जनवाणी गए लोगों को नहीं ले रहा दैनिक जागरण

जागरण प्रबंधन की काफी मिन्नत के बाद भी कई वरिष्ठ पत्रकार दैनिक जागरण छोड़कर जनवाणी चले गए थे। यहीं से उनके जागरण प्रबंधन से संबंध खराब हो गए। जनवाणी के बुरे दिन शुरू होने पर रवि शर्मा ने जागरण में जाने के लिए सारे घोड़े खोल दिए। लेकिन जागरण प्रबंधन ने साफ तौर पर मना कर दिया। दूसरे पत्रकारों ने भी दैनिक जागरण प्रबंधन से तार जोड़े। लेकिन साफ तौर पर जागरण ने जनवाणी गए लोगों को लेने से मना कर दिया। अब यह सभी लोग बहुत बुरी हालत में है।

मेरठ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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