नई दिल्ली : जिंदल समूह से विज्ञापन के रूप में 100 करोड़ रुपये की उगाही के लिए जी समूह के संपादक समीर आहलूवालिया और सुधीर चौधरी डील कर रहे थे, जबकि इसकी जानकारी जी न्यूज की सेल्स टीम को नहीं थी। इतना ही नहीं, कैग रिपोर्ट में कहीं भी ऐसा नहीं है कि जिंदल स्टील को कितना फायदा पहुंचाया गया, लेकिन जी समूह के संपादकों ने स्वयं आकलन कर लिया कि उन्हें 47 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया गया। इस मामले में दायर आरोप पत्र में इन तथ्यों का खुलासा किया गया है।
पटियाला हाउस अदालत में दायर आरोप पत्र के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने अमित त्रिपाठी (जी न्यूज सेल्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष) से पूछताछ की। उन्होंने कहा कि एक करोड़ या उससे अधिक राशि की डील काफी बड़ी मानी जाती है और ऐसे सौदों की जानकारी उन्हें होनी चाहिए थी। संपादक किसी भी प्रकार से सेल्स के लिए अधिकृत नहीं हैं। उन्हें नहीं पता था कि सुधीर व समीर जिंदल कंपनी से 100 करोड़ का विज्ञापन संबंधी सौदा कर रहे थे।
आरोप पत्र के मुताबिक, इस तथ्य से स्पष्ट है कि सुधीर व समीर ने चेयरमैन सुभाष चंद्रा के साथ मिलकर जिंदल कंपनी से उगाही करने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा। इसी कड़ी में दोनों संपादक जिंदल कंपनी के अधिकारियों से 17 सितंबर को हयात होटल में मिले और प्रति वर्ष 25 करोड़ का विज्ञापन चार वर्ष के लिए मांगा। होटल के कैमरों से मीटिंग की पुष्टि हो गई है।
मीटिंग में कंपनी के अधिकारियों ने समीर से वे दस्तावेज दिखाने के लिए कहा था, जिनके आधार पर उनके खिलाफ स्टोरी दिखाई जा रही थी। लेकिन समीर ने दस्तावेज नहीं दिखाए और जल्द से जल्द विज्ञापन भुगतान का चेक देने के लिए दबाव बनाया। समीर और सुधीर लगातार कहते रहे कि विज्ञापन मिलने के बाद जिंदल के खिलाफ न्यूज नहीं चलेगी।
आरोप पत्र में कहा गया है कि जिन दिनों यह मोलभाव चल रहा था, जी न्यूज ने जिंदल के खिलाफ खबरें नहीं चलाईं। लेकिन 24 सितंबर, 2012 को जब संपादकों को अपनी मांगें न माने जाने के संकेत मिले तो नेगेटिव खबरों का प्रसारण फिर शुरू हो गया। 13 सितंबर से 24 सितंबर के बीच दोनों पक्ष तीन बार मिले।
जांच में पाया गया कि कैग ने हजारों करोड़ के कोल घोटाले का खुलासा किया, लेकिन कहीं नहीं कहा कि किस कंपनी को कितना फायदा मिला। वहीं, जी न्यूज में जो समाचार 7 से 13 सितंबर 2012 व 24 सितंबर से 26 सितंबर तक दिखाए गए, उनमें जिंदल कंपनी को 47 हजार करोड़ रुपये का गैरकानूनी फायदा और कुल कोयला भंडार के 25 फीसदी दोहन का लाभ पहुंचाने की बात कही गई।
इसी प्रकार कंपनी के चेयरमैन नवीन जिंदल को टारगेट करने के लिए कोल ब्लॉक आवंटन में फायदा पाने वाली कंपनियों जायसवाल नेको लिमिटेड, हिमाचल जेएसडब्ल्यू व मोनेट इस्पात को जिंदल समूह की कंपनियां बताया गया, जबकि यह सच नहीं था। आरोपपत्र के अनुसार, इन तथ्यों से स्पष्ट है कि फर्जी स्टोरी चलाई गई थी। (साभार- अमर उजाला)
जिंदल से डील करते सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया की सीडी देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें..





