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उत्तराखंड

उत्तराखंड के लिए ‘फूड कटिंग कानून’ साबित हो सकता है ‘फूड सिक्योरिटी कानून’

नैनीताल । जी हां, केंद्र सरकार द्वारा बहुप्रचारित और आगामी लोक सभा चुनावों के मद्देनजर अति महत्वाकांक्षी बताए जा रहे ‘फूड सिक्योरिटी कानून’ को खासकर पहले ही ‘अटल खाद्यान्न योजना’ लागू उत्तराखंड प्रदेश के लिए ‘फूड कटिंग कानून’ या कुछ और कहना ही अधिक मुफीद होगा।

नैनीताल । जी हां, केंद्र सरकार द्वारा बहुप्रचारित और आगामी लोक सभा चुनावों के मद्देनजर अति महत्वाकांक्षी बताए जा रहे ‘फूड सिक्योरिटी कानून’ को खासकर पहले ही ‘अटल खाद्यान्न योजना’ लागू उत्तराखंड प्रदेश के लिए ‘फूड कटिंग कानून’ या कुछ और कहना ही अधिक मुफीद होगा।

बिल के प्राविधान कुछ ऐसे ही इशारे कर रहे हैं। बिल का लाभ लेने के लिए जो प्राविधान तय किए गए हैं, उससे प्रदेश की अधिकतम 50 फीसद शहरी और 70 फीसद ग्रामीण आबादी को ही लाभ मिल पाएगा, यानी शेष 50 फीसद शहरी और 25 फीसद ग्रामीण लोग मौजूदा योजना के लाभ से वंचित हो जाएंगे। वहीं प्रति कार्ड की बजाय यूनिट का पैमाना लागू होने से छह सदस्यों से छोटे परिवारों को अब के मुकाबले कम अनाज मिल पाएगा। इससे पूरे प्रदेश का खाद्यान्न कोटा आवंटन भी अब के मुकाबले घट जाएगा।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड प्रदेश में पहले ही फरवरी 21 से अटल खाद्यान्न योजना लागू है, जिसके तहत सभी बीपीएल व अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को 35 किग्रा खाद्यान्न (24.750 किग्रा चावल व 1.250 किग्रा गेहूं) तथा एपीएल को 10 किग्रा चावल व पांच किग्रा गेहूं दिया जा रहा है। वहीं अब केंद्र सरकार की ओर से लागू अध्यादेश के जरिए लागू किए जा रहे ‘फूड सिक्योरिटी बिल’ के तहत एपीएल और बीपीएल कार्ड धारकों को समान रूप से प्रति यूनिट तीन किग्रा चावल, दो किग्रा गेहूं और एक किग्रा मोटा अनाज दिए जाने का प्राविधान किया गया है। इस प्रकार छह सदस्यों वाले बीपीएल परिवारों को मोटे अनाज सहित कुल 36 किग्रा खाद्यान्न ही मिल सकेगा, यानी इससे छोटे परिवार को प्रति माह वर्तमान से कम अनाज ही मिल सकेगा।

ऐसे में नया कानून साफ तौर पर ‘छोटा परिवार’ की संकल्पना को हतोत्साहित करने वाला साबित होगा। वहीं नए कानून के एक अन्य प्राविधान के तहत आयकर देने वाले व प्रति माह 15 हजार रुपए से अधिक मासिक आय सहित दर्जन भर मानकों से बाहर के परिवारों को ‘फूड सिक्योरिटी कानून’ का लाभ नहीं मिलेगा। केंद्र सरकार द्वारा कहा भी गया है कि उसका इरादा 50 फीसद शहरी और 70 फीसद ग्रामीणों को ही योजना का लाभ देने का है, यानी शेष लोग अब तक मिल पा रहे खाद्यान्न की सुविधा से वंचित हो जाएंगे। उदाहरण के लिए आंकड़ों के अनुसार भी बात करें तो नैनीताल जनपद में अंत्योदय के 18,060 कार्ड धारक परिवारों में कुल 72,928 सदस्य हैं और बीपीएल के 20,785 कार्ड धारक परिवारों में 68,974 सदस्य हैं, यानी अंत्योदय परिवारों में प्रति परिवार करीब 3.5 और बीपीएल परिवारों में औसतन 3.8 सदस्य ही हैं, यानी अधिकांश बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को योजना शुरू होने के बाद अब तक मिल रहे खाद्यान्न में कटौती झेलनी पड़ेगी।

उल्लेखनीय है कि खाद्य सुरक्षा कानून में चीनी व मिट्टी तेल देने की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं नए प्राविधानों के तहत जो अधिकतम 50 फीसद शहरी और 70 फीसद ग्रामीण आबादी यानी प्रदेश की 60.37 लाख लोगों को ही खाद्य सुरक्षा कानून का लाभ मिल पाएगा। ऐसे में शेष करीब 50 लाख की 15 हजार रुपए से अधिक मासिक आय व अन्य प्राविधानों से बाहर रहने वाली आबादी को आगे सस्ते गल्ले की दुकानों से चीनी व मिट्टी तेल मिलेगा या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी राहुल शर्मा ने बताया कि नए कानून के लाभ प्राप्त करने के लिए घर की 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिला के नाम से कार्ड बनवाना होगा। घर में कोई महिला न होने की स्थिति में ही पुरुष मुखिया के नाम से कार्ड बन पाएगा। इस हेतु भी देश-प्रदेश में नए व्यापक स्तर पर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

नवीन जोशी की रिपोर्ट.

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