नैनीताल : केंद्र सरकार उत्तराखंड में गत दिवस आई भीषण दैवीय आपदा से देश भर के लिए ‘सबक के पाठ’ तैयार करा रहा है, ताकि देश-प्रदेश में कभी ऐसी आपदा दुबारा आए तो इसके नुकसानों का न्यूनीकरण और बेहतर प्रबंधन किया जा सके। साथ ही इस आपदा से सबक सीखते हुए विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए बेहतर गाइड लाइन तैयार करने की भी योजना है।
खास बात यह है कि इसमें प्रदेश और पर्वतीय राज्यों के विशेषज्ञों व खास तौर पर पर्वतीय राज्यों के विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका होने जा रही है। इस हेतु कैबिनेट सचिव गत दिवस सभी विभागों के केंद्रीय सचिवों की राष्ट्रपति भवन में बैठक ले चुके हैं, जिसमें कुमाऊं, गढ़वाल एवं जम्मू विवि के कुलपतियों को भी आमंत्रित किया गया था। आगे सभी केंद्रीय सचिवों को उनके विभागों की आपदा के दृश्टिकोण से बेहतर भूमिका तय करने को कहा गया है, जिसके तहत केंद्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने आगामी आठ अगस्त को बैठक आहूत कर दी है। इस बैठक में भी पुनः कुमाऊं विवि सहित पर्वतीय राज्यों के विवि के कुलपतियांे एवं विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।
कहते हैं आपदा सहित कोई भी दुर्घटना मनुष्य की पीढ़ियों को उनसे लड़ने की शक्ति देकर और मजबूत करने का कार्य करती हैं। यह तभी संभव है, जब आपदा या दुर्घटना का समग्र तौर पर अध्ययन, उनसे लड़ने की अपनी वर्तमान शक्ति व कमियों का आंकलन तथा क्या बेहतर हो सकता है, का प्रबंध किया जाए। केंद्र सरकार की ओर से यही पहल की जा रही है। इसके तहत गत 16 जुलाई को कैबिनेट सचिव अजीत कुमार सेठ राष्ट्रपति भवन में बैठक लेकर समस्त विभागों के केंद्रीय सचिवों को निर्देशित कर चुके हैं।
कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी भी इस बैठक में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि बैठक में जम्मू विवि के कुलपति प्रो. तलत अहमद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है, इस समिति में कुमाऊं विवि के भी दो सदस्य शामिल होने हैं। यह समिति आपदा से पूर्व, आपदा के दौरान एवं आपदा के बाद आपदा न्यूनीकरण पर अपनी रिपोर्ट कैबिनेट सचिव को देगी।
आगे इसी कड़ी में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी सचिव टी रामास्वामी ने एक उच्च स्तरीय बैठक आठ अगस्त को बुलाई है। इसमें शामिल होने पुनः दिल्ली रवाना हो रहे प्रो.धामी ने बताया कि इस बैठक में भी जम्मू विवि के कुलपति प्रो. तलत अहमद के साथ वाडिया इंस्टिट्यूट देहरादून के निदेशक डा. एके गुप्ता, सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया स्वर्ण सुब्बाराव, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सलाहकार एके पचौरी, दिल्ली विवि के भूविज्ञान विभागाध्यक्ष डा. सीएस दुबे, रिमोट सेंसिंग के निदेशक वीके डडवाल, जीएसआई के डिप्टी डीजी डा. संजीव शर्मा व आईआईटी रुड़की के डा. एसके टंडन सहित अनेक विशेषज्ञों को बुलाया गया है। बैठक में सबसे पहली कोशिश आपदा का सही आंकलन करने तथा आगे विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी की मदद से आपदा के न्यूनीकरण के प्रयासों की है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी सचिव की बैठक में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. धामी सुरक्षित स्थानों पर ही निर्माण व खास तौर पर सड़कें बनाने, खतरनाक स्थानों पर सड़कों को टनल से गुजारने तथा प्रदेश में अधिक डॉप्लर रडार स्थापित करने व रिमोट सेंसिंग के उपकरण बढ़ाने आदि के विचार रखेंगे। प्रो. धामी ने का कि वह केवल प्रभावितों की जगह पूरे गांव का पुनर्वास नियमों में शिथिलीकरण कर पास की ही वन भूमि पर करने, अपनी जमीनें खो चुके पर्वतीय लोगों को जमीनें व रोजगार के साधन भी देने, पहाड़ पर ‘ऑल वेदर रोड’ बनाने आदि सुझाव भी देने जा रहे हैं। कहा कि आपदा की वजह से लोग मैदानों के सुरक्षित स्थानों को आने से सीमांत क्षेत्र खाली न हो जाएं, इसका भी ध्यान रखने की जरूरत है।
नवीन जोशी की रिपोर्ट.





