समाचार पत्र में पत्रकारों को बंधुआ मजदूर की तरह काम करना पड़ता है। संपादक और ब्यूरो चीफ जब चाहते हैं अपने संवाददाता को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। शाहजहांपुर के सहारा समय के कार्यालय में भी कुछ ऐसा ही हुआ। सहारा न्यूज ब्यूरो इंचार्ज ने अपने कार्यालय में काम करने वाले अमर दीप रस्तोगी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सहारा के क्राइम रिपोर्टर अमरदीप रस्तोगी को सच बोलना महंगा पड़ गया।
कार्यालय से संबंधित शिकायतों की जांच करने राष्ट्रीय सहारा (दैनिक समाचार पत्र) की टीम पिछले दिनों
यहां आई थी। टीम ने एक होटल के बंद कमरे में एक-एक करके कार्यालय के सभी कर्मचारियों व संवाददाताओं को बुलाया और सवाल पूछे। बताया जा अपराध संवाददाता ने सच-सच बता दिया कि कार्यालय के दो रिपोर्टर कलीम खां व राजेश राठौर (जो दैनिक जागरण में फोटोग्राफर है) यहां से बिना काम के ही संस्थान से मानदेय प्राप्त कर रहे हैं। इनमें कलीम खां करीब चार माह से कार्यालय तक नहीं आया है। यह दोनों संस्थान को ब्यूरो चीफ आरिफ सिद्दीकी की मिलीभगत से नुकसान पहुंचा रहे हैं। जांच टीम चली गई, लेकिन जाने से पहले टीम के ही किसी सदस्य ने ब्यूरो चीफ को यह बात बता दी। इससे नाराज ब्यूरोचीफ ने अमरदीप को कह दिया कि अब आपको आफिस आने की जरूरत नहीं है।
इस संदर्भ में जब अमरदीप से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं ने किसी की शिकायत नहीं की बल्कि जो सच था, संस्थान हित में वो बता दिया। इसी से नाराज ब्यूरोचीफ ने मुझ ऑफिस आने से मना कर दिया। अमरदीप ने बताया कि उन्होंने इस बात की शिकायत राष्ट्रीय सहारा के यूनिट हेड राजेंद्र द्विवेदी, संपादक मनोज तोमर व ब्यूरो कोआर्डिनेटर संदीप श्रीवास्तव को फैक्स भेज कर की है, अब जो निर्णय आएगा उसका पालन किया जाएगा। इस संदर्भ में पूछे जाने पर ब्यूरोचीफ आरिफ सिद्दीकी ने बताया कि अमरदीप कार्यालय की गोपनीयता को भंग कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें बाहर किया गया है।





