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पोर्न पत्रकार विजय कुमार झा और दैनिक पोर्न भास्कर डाट काम की पत्रकारिता

Yashwant Singh :  पोर्न पत्रकार विजय कुमार झा https://www.facebook.com/vijay.k.jha.56 को यह गलतफहमी हो गई है कि वह महान पत्रकार हो चुका है क्योंकि उस जैसों को मेरे जैसे गरियाते हैं … अबे उल्लू, तुम जिस गंध में लोटपोट हो रहे हो, और खुश हो रहे हो, उस गंध को खत्म करने के लिए तुम्हें बिलकुल गरियाना जरूरी नहीं है… इसके लिए गंध के बाप, जिसके तुम नौकर हो.. उन सुधीर अग्रवालों, रमेश अग्रवालों, गिरीश अग्रवालों को घेरना होगा, दबाव डालना होगा, इन्हें गरियाना होगा, जिसके एक इशारे पर तुम दिमाग और रीढ़, दोनों के स्तर पर तुरंत यूटर्न ले लोगे..

Yashwant Singh :  पोर्न पत्रकार विजय कुमार झा https://www.facebook.com/vijay.k.jha.56 को यह गलतफहमी हो गई है कि वह महान पत्रकार हो चुका है क्योंकि उस जैसों को मेरे जैसे गरियाते हैं … अबे उल्लू, तुम जिस गंध में लोटपोट हो रहे हो, और खुश हो रहे हो, उस गंध को खत्म करने के लिए तुम्हें बिलकुल गरियाना जरूरी नहीं है… इसके लिए गंध के बाप, जिसके तुम नौकर हो.. उन सुधीर अग्रवालों, रमेश अग्रवालों, गिरीश अग्रवालों को घेरना होगा, दबाव डालना होगा, इन्हें गरियाना होगा, जिसके एक इशारे पर तुम दिमाग और रीढ़, दोनों के स्तर पर तुरंत यूटर्न ले लोगे..

पालिसी मेकर्स से बदलाव होता है, नौकरों-चाकरो के चाहने से बिलकुल नहीं… तुम तो अभिशप्त हो पोर्न पत्रकारिता करने के लिए क्योंकि तुम्हारी नौकरी ही इसी बात पर चल रही है… अगर अश्लीलता या घटियापना के जरिए हिट्स नहीं दोगे तो मुझे पता है तेरी नौकरी चली जाएगी… तुम्हें अगर ये मुगालता है कि तेरे से डरकर तुझे दी गई गालियां मैंने हटाई हैं, तो फिर कहूंगा, जो फोन पर कहा कि पोर्न पत्रकारिता करने वालों को अगर सरेआम हरामखोर न कहा जाए तो क्या कहा जाए.. क्योंकि हरामखोरी उसी को कहते हैं जिसमें पैसा मूल काम न करके कमाया जाए बल्कि किसी के निहित स्वार्थ को पूरा करके माल बनाया जाए… हराम का खाना होता है हरामखोरी..

तुम पत्रकारिता करके पैसे नहीं कमा रहे, तुम पोर्नकारिता के जरिए हिट्सकारिता का धंधा चमका कर पैसे कमा रहे हो… सो, यह सौ फीसदी हरामखोरी है… अगर तू असल पत्रकार होता तो अब तक इस्तीफा देकर सच्चाई का बयान कर देता कि आखिर भास्कर डाट काम की पोर्न पत्रकारिता का सच क्या है… पर हरामखोर लोग हरामखोरी से बाज कहां आते हैं… और तुम भी बिलकुल वही कर रहे हो… पर मुझे पता है कि तुम अभिशप्त हो ऐसा करने के लिए और तेरे चाहने पर भी भास्कर की पोर्न पत्रकारिता बंद नहीं हो सकती.. इसलिए, तुझ जैसे नौकर चाकरों को नहीं बल्कि तेरे मालिकों से लड़ना है, गरियाना है, दबाव बनाना है ताकि पहले तो वे खुद पोर्नकारिता और हिट्सकारिता को गुडबाय कहकर साफ-सुथरी पत्रकारिता को गले लगाएं फिर तुम जैसे विकृत मानसिकता वालों को भगाएं और अपने अश्लील ब्रांड को साफ-सुथरा बनाएं…

पर उन्हें अभी नहीं समझ में आ रहा है क्योंकि आखिरकार इन धंधेबाजों को बाप बड़ा न मैय्या सबसे बड़ा रुपय्या जो समझ में आता है… पर याद रखना, वक्त तेजी से बदल रहा है.. बड़े बड़े मीडिया मुगल रसातल में जा रहे हैं… ये पोर्न पत्रकारिता और पेड न्यूज जैसी चीजें ही मीडिया के कई ब्रांडों को ले डूबेगी… आज नहीं तो कल… पर तेरे जैसे हरामखोरों पर क्या असर पड़ेगा.. आज इस दुकान पर गंध मचाएंगे .. कल उस दुकान पर… विजय झा.. तेरी हकीकत दुनिया जान चुकी है.. तू खुद को और मेरे को सर्टिफिकेट देना बंद कर …

https://www.bhadas4media.com/article-comment/13560-2013-08-06-07-01-05.html

https://www.bhadas4media.com/print/13551-2013-08-04-17-55-33.html

https://www.bhadas4media.com/print/13508-2013-08-03-07-18-03.html

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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