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भ्रष्ट आईएएस राजीव कुमार के खिलाफ चैनलों ने दिखाई स्टोरी

वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा की भ्रष्ट आईएएस अफसर राजीव कुमार के खिलाफ चलाई गई मुहिम रंग लाने लगी है। हेड लाइन्स टुडे, आजतक, आईबीएन7 ने अपनी जबरदस्त रिपोर्ट में दिखाया कि जिस ईमानदार आईएएस अफसर दुर्गा नागपाल के समर्थन में पूरा देश खड़ा हो रहा है, उस अफसर की निलंबन की फाइल उस भ्रष्ट अफसर ने तैयार की जिसको खुद भ्रष्टाचार के आरोप में तीन साल की सजा हो चुकी है।

वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा की भ्रष्ट आईएएस अफसर राजीव कुमार के खिलाफ चलाई गई मुहिम रंग लाने लगी है। हेड लाइन्स टुडे, आजतक, आईबीएन7 ने अपनी जबरदस्त रिपोर्ट में दिखाया कि जिस ईमानदार आईएएस अफसर दुर्गा नागपाल के समर्थन में पूरा देश खड़ा हो रहा है, उस अफसर की निलंबन की फाइल उस भ्रष्ट अफसर ने तैयार की जिसको खुद भ्रष्टाचार के आरोप में तीन साल की सजा हो चुकी है।

इन चैनलों पर जबरदस्त रिपोर्टिंग के बाद अब इस बात की बहस तेज हो गयी है कि क्या अखिलेश यादव अपने इस भ्रष्ट प्रमुख सचिव को हटायेंगे या फिर बेईमान और सजायाफ्ता अफसर को प्रदेश के सभी पीसीएस और आईएएस अफसरों को चुनने का अधिकार दिया जाता रहेगा।

प्रदेश में सभी पीसीएस और आईएएस अफसरों की तैनाती का जिम्मा प्रदेश के प्रमुख सचिव नियुक्ति के हवाले होता है वही इन अफसरों की तैनाती की फाइल बनवाता है और मुख्यमंत्री से हस्ताक्षर के लिए भेजता है। जब अखिलेश यादव ने सत्ता संभाली थी तो यह माना जा रहा था कि वह ईमानदार अफसरों की तैनाती करेंगे मगर अप्रत्याशित रूप से उन्होंने प्रमुख सचिव नियुक्ति के रूप में राजीव कुमार को तैनात कर दिया। उस समय सीबीआई राजीव कुमार और नीरा यादव के नोएडा जमीन घोटाले की जांच कर रही थी। तब वीकएंड टाइम्स में रिपोर्ट प्रकाशित हुई कि ऐसे व्यक्ति को प्रमुख सचिव नियुक्ति नहीं बनाना चाहिए जिसके खिलाफ खुद जांच चल रही हो।

अंततः वही हुआ जिसकी आशंका जतायी जा रही थी और कुछ समय बाद ही राजीव कुमार को जमीन घोटाले के आरोप में नीरा यादव के साथ तीन साल की सजा हो गयी। सजा होते ही सरकार ने मजबूरीवश उनको हटाया और जब वह हाईकोर्ट से गिरफ्तारी से बचने का स्टे ले आए तो फिर सरकार ने उनको उसी पद पर फिर तैनात कर दिया। वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा ने इसके विरूद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए कहा कि जब दो साल की सजा के बाद किसी भी व्यक्ति को सांसद या विधायक का चुनाव लडऩे से रोक दिया जाता है तो फिर किसी तीन साल की सजा पाए अफसर को नौकरी कैसे करने दी जा सकती है। इस याचिका को वापस लेने के लिए संजय शर्मा पर लगातार दबाव पड़े मगर उन्होंने ये याचिका वापस नहीं ली। इसके बाद न्यायालय ने संजय शर्मा की याचिका पर राज्य और केन्द्र सरकार दोनों को नोटिस जारी कर दिए।

इस बीच दुर्गा नागपाल के मामले से पूरे देश में हड़कंप मच गया। दुर्गा नागपाल के निलंबन की फाइल राजीव कुमार ने ही तैयार की थी क्योंकि वही प्रमुख सचिव नियुक्ति थे। यह बात पता चलते ही लोगों में एक बार फिर नाराजगी बढ़ी। इसके बाद हेडलाइन्स टुडे और आजतक ने राजीव कुमार का एक स्टिंग आपरेशन तक कर डाला। इस रिपोर्ट में संजय शर्मा का इंटरव्यू करते हुए बताया गया कि किस तरह से यह भ्रष्ट अफसर सरकार को बदनाम कर रहा है।

कल दोपहर से आईबीएन 7 ने भी संजय शर्मा के इंटरव्यू के साथ राजीव कुमार और बाकी भ्रष्ट अफसरों की धमाकेदार खबर चलानी शुरू की जो अभी भी चल रही है। इस खबर के बाद यूपी की नौकरशाही और सरकार में हड़कंप मच गया है। अब सभी लोग यह मान रहे कि दुर्गा नागपाल को गलत तरीके से निलंबित करने वाली सरकार अगर इन भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी तो यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ेगा।

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