रायपुर : अनुसूचित जाति-जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय अध्यक्ष सह इंडियन जस्टिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदित राज ने देश के चारों शंकराचार्यों को उनसे संवाद में जीतने की चुनौती दी है. रायपुर में उन्होंने कहा कि, “जाति प्रथा आज भी समाज में जीवित है. देश में चारों शंकराचार्य ब्राह्मण ही हैं, भले उनसे ज्यादा ज्ञानी लोग अन्य जातियों में भी क्यों न हो लेकिन वे शंकराचार्य की उपाधि नहीं ग्रहण कर सकते. मैं चारों शंकराचार्यों को चुनौती देते हुए कहता हूं कि मुझसे संवाद कर जीत जाएं तो मैं राजनीति एवं दलित आंदोलन छोड़ दूंगा”.
डॉ. राज ने कहा कि देश में केवल 15 प्रतिशत सवर्ण हैं किन्तु उनको 50 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है जबकि दलित एवं आदिवासी आज भी देश में पिछड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश की तरक्की तभी संभव है जब यहां निजी क्षेत्रों के रोजगार में भी आरक्षण लागू हो, क्योंकि ऐसा करने से देश में लगातार सरकारी नौकरी की घटती संख्या के बीच उफनी बेरोजगारी की समस्या से निजात मिल पाएगा. उनके अनुसार देश के विकास के लिए आरक्षण एक बेहतर विकल्प रहा है.
डॉ राज ने राजधानी में अनुसूचित जाति-जनजाति संगठन, छत्तीसगढ़ राज्य इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के पूर्व पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, “समूचे देश में शासकीय नौकरियां कम होती जा रही हैं. साथ ही जो बची भी हैं तो उनमें ठेकेदारी प्रथा का बोलबाला है. इस तरह पहले से ही दमित एससी, एसटी एवं अन्य आदिवासी युवकों के सामने रोजगार का संकट गहरा होता जा रहा है. निजी क्षेत्रों में आरक्षण लागू हो जाने से कुछ हद तक समस्या से छूटकारा मिल जाएगा”.
उन्होंने बताया कि पदोन्नती में भी आरक्षण लागू करने का विधेयक राज्यसभा में पारित पिछले वर्ष हो चुका लेकिन लोकसभा में होना बाकि है, यह ११७ वां संविधान संशोधन इसी सत्र में हो जाना चाहिए था. देश की आंतरीक सुरक्षा को खतरा मानने वाले नक्सलवाद पर डॉ राज ने कहा कि वे लोग ही नक्सली बने जिनको जनतंत्र का कोई लाभ नहीं मिला, इसका समाधान भी आदिवासियों के विकास से ही संभव हो पाएगा. उन्होंने बताया, “जहां तक मेरी जानकारी जाती है माओवादियों में भी दलित एवं आदिवासी ही नीचे कैडर बेस है एवं उनका नेतृत्वकर्ता वर्ग सवर्ण है. वहां भी दलित एवं आदिवासी शोषित ही हैं.”





