Sanjay Sharma : कोई साधारण कर्मचारी अगर एक साल से ज्यादा समय तक बिना बताये नौकरी से गायब होता है तो उसे तत्काल सेवा से बर्खास्त कर दिया जाता है.. उत्तर प्रदेश के एक आईएएस अफसर है नाम है सूर्य प्रताप सिंह. वर्ष 2004 में स्टडी लीव के लिए गए थे और गायब हो गए. बताया जाता रहा कि अमेरिका में हैं और अपना धंधा कर रहे हैं. अचानक पिछले महीने प्रकट हुए और सरकार ने बिना कुछ पूछे उन्हें ''प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं ओद्योगिक विकास'' बना कर तीन और विभाग की जिम्मेदारी दे दी.
यह वो विभाग है जहाँ हजारों करोड़ की आमदनी की चर्चा हर कोई करता रहता है. होना तो यह चहिये था कि खुद को मेनस्ट्रीम मीडिया का पत्रकार कहने वाले सभी लोगों को यह खबर छापनी चहिये थी. पत्रकारों ने लिखी भी होगी मगर मालिकों ने मना कर दिया होगा क्योंकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा से विज्ञापन के अलावा और भी बहुत धंधा मिलता है. वीकएंड टाइम्स की खबर पढिये और सोचिये जब हम छाप सकते हैं तो बाकी क्यों नहीं?
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा के फेसबुक वॉल से.
तो फिर नियम तोड़ने वाले सूर्य प्रताप सिंह जैसे अफसरों की ताजपोशी क्यों करते हैं सीएम?
-संजय शर्मा-
एक आईएएस अफसर उत्तर प्रदेश में नौकरी करते-करते अचानक गायब हो जाता है। नौ साल बाद वह लौटता है। लौटते 5478ही उसे प्रदेश की सबसे क्रीम माने जाने वाली पोस्ट पर तैनाती दे दी जाती है। आपको लगता होगा कि ऐसा संभव नहीं है। मगर यूपी में ऐसा ही हो रहा है। और ऐसा वह सीएम कर रहे हैं जो कह रहे हैं कि आईएएस अफसर गरीबों की नहीं सुनते और कभी-कभी उनकी भी नहीं सुनते। अब आप सिर्फ उस डील का अंदाजा लगाइये जिस डील के चलते सभी नियम और कायदे ताक पर रखकर 1980 बैच के आईएएस सूर्य प्रताप सिंह को उत्तर प्रदेश का प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास बना दिया गया।
प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास प्रदेश की सबसे कमाऊ मानी जाने वाली तैनाती होती है। नोएड, ग्रेटर नोएडा से लेकर तमाम औद्योगिक विकास वाली चीजों को तय करने का अधिकार इसी अफसर को होता है। आम तौर पर आईडीसी और प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास एक ही अफसर के पास रहते हैं। मगर सूर्य प्रताप सिंह के लिए सारे नियम कायदे ताक पर रख दिये गये। सूर्य प्रताप सिंह 2004 में स्टडी लीव के लिए गये थे और तभी से गायब हो गए।
आईएएस अफसरों का सभी लेखाजोखा रखने वाली डीओपीटी ने अफसरों की लीव के संबंध में जो निर्देश जारी किए हैं उसके मुताबिक नौ साल बाद लौटने पर पहले सूर्य प्रताप सिंह को निलंबित किया जाता फिर उनसे इतने सालों का स्पष्टीकरण मांगा जाता। कुछ जानकारों का कहना है कि निर्धारित समय पूरा होने के बाद सूर्य प्रताप सिह के न लौटने पर सरकार को एक पक्षीय कार्रवाई करके उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाना चाहिए ऐसा स्पष्ट नियम हैं। मगर जब सरकार खुद किसी अफसर को बुलाने को और उसकी ताजपोशी करने को बेताब हो तो सारे नियम और कायदे ताक पर रख दिये जाते हैं। सूर्य प्रताप सिंह के मामले में भी यही हुआ। उन्हें विदेश से निमंत्रण पर बुलाया गया और शर्तों के मुताबिक उनकी ताजपोशी की गई।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सूर्य प्रताप सिंह ने स्टडी लीव के दौरान ही अमेरिका में अपना नेटवर्क बढ़ा लिया था। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सूर्य प्रताप सिंह श्रीश्री रविशंकर के सानिध्य में आ गए और उसके बाद ही दुनिया भर के बड़े पूंजीपतियों के बीच सूर्य प्रताप सिंह ने अपना नाटक करना शुरू कर दिया। बड़े अफसरों के बीच यह चर्चा भी आम है कि सूर्य प्रताप सिंह की सबसे बड़ी खासियत में से एक यह है कि उन्हें राजनेताओं से संबंध बनाना बखूबी आता है। वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बेहद करीबी बताये जाते हैं। बदायूं में जिलाधिकारी के रूप में अपनी तैनाती के दौरान इन्होंने अपने सजातीय भाजपा के एक नेता के लिए दिन रात एक कर दिया। इससे क्षुब्ध होकर वहां के काबीना मंत्री ने इनकी तमाम शिकायतें सरकार में की। हालांकि वह भी भाजपा के ही मंत्री थे। यही हाल इनका बरेली में भी रहा।
सूत्रों का कहना है कि उनकी प्रदेश में लौटने से पहले यही शर्त थी कि उन्हें राकेश गर्ग की जगह मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाया जाये। मगर यह बात प्रमुख सचिव नियुक्ति राजीव कुमार के स्तर पर लीक हो गई और ईटीवी ने इसको प्रमुखता से दिखाना शुरू कर दिया जिसके बाद यह योजना फेल हो गयी। मगर इसके बावजूद उन्हें प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास जैसे महत्वपूर्ण पद पर यह कहकर तैनात कर दिया गया कि कुछ दिनों में ही उनकी ताजपोशी राकेश गर्ग की जगह मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के रूप में कर दी जायेगी। बताया जाता है कि इसके लिए सूर्य प्रताप सिंह ने अमेरिका के कुछ उन लोगों को पकड़ा जो मुख्यमंत्री के भी करीबी थे। और तभी यह डील तय हुई।
सूर्य प्रताप सिंह के अलावा शिशिर प्रियदर्शी, संजय भाटिया, अतुल बगाई जैसे कई अफसर हैं जो अपनी लीव खत्म होने पर भी सालों से विदेशों में तैनात हैं। गंभीर बात यह है कि सरकार को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि नौ साल तक आखिर सूर्य प्रताप सिंह ने विदेश में क्या किया। कहीं किसी विदेशी नेटवर्क से तो उनका संबंध नहीं है। नौ वर्षों तक उन्होंने अपना और अपने परिवार का खर्चा कैसे चलाया। यह पूछने की हिम्मत तभी आ सकती थी जब सूर्य प्रताप सिंह यह न कहते कि उनके मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत संबंध है।
अब देखना यह है कि दुर्गा नागपाल को मामूली बात पर निलंबित कर देने वाले मुख्यमंत्री सूर्य प्रताप सिंह को भी नियमानुसार निलंबित करते हैं या फिर उनका मामला ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। जिस तरह उन्हें प्रमुख सचिव अवस्थापना
एवं औद्योगिक विकास के पद पर तैनात करके प्रबन्ध निदेशक पिकप, मुख्य कार्यपालक अधिकारी लीडा एवं अधिशाषी निदेशक उद्योग बंधु का चार्ज दिया गया वह तो यही सिद्ध करता है कि फिलहाल इस प्रदेश में सूर्य प्रताप सिंह उसी तरह अपना जलवा बिखेरने को तैयार हैं जिस तरह वह राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री रहते किया करते थे।
लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और वीकएंड टाइम्स हिंदी वीकली के संपादक हैं.





