लखनऊ। खनन माफियाओं के लिए सिरदर्द बनीं आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को यूपी की अखिलेश सरकार ने भले ही निलंबन जैसी बड़ी सजा सुना दी हो, पर इसी सरकार ने तमाम ऐसे अफसरों को अहम पदों पर बैठा रखा है जिनके खिलाफ कई संगीन आरोप हैं। इनमें से कुछ के खिलाफ तो सीबीआई जांच तक हुई है।
खास बात ये है कि जिस प्रमुख सचिव नियुक्ति राजीव कुमार के दस्तखत से दुर्गा जैसी ईमानदार अफसर को निलंबित किया गया, वो खुद भी भ्रष्टाचार के मामले में निचली अदालत से सजायाफ्ता हैं और फिलहाल हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा कर रखी है।
यूपी के प्रमुख सचिव नियुक्ति और सीनियर आईएएस अफसर राजीव कुमार के पास सारे आईएएस अधिकारियों की तैनाती का जिम्मा है। इन्हीं के दस्तखत से आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को भी निलंबित किया गया। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि राजीव कुमार खुद संगीन आरोपों के घेरे में हैं। उन्हें हटाए जाने को लेकर अदालत में याचिका तक दायर है। दरअसल राजीव कुमार को नोएडा के प्लॉट आवंटन में भ्रष्ट्राचार के आरोप में सजा सुनाई जा चुकी है और फिलहाल हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगी हुई है।
प्लॉट आवंटन वही मामला है जिसमें यूपी की पूर्व प्रमुख सचिव नीरा यादव को भी जेल जाना पड़ा था। निचली अदालत से सजा पाने वाले इस अफसर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी कोर टीम में रखा है। भ्रष्ट्राचार के आरोपों से घिरे इस अफसर पर सरकार की मेहरबानी सवालों के घेरे में है।
हैरानी की बात ये है कि जब सीबीआई ने राजीव कुमार को दंडित कर दिया तो उनको हटा देना चाहिए था, लेकिन वो दुलारे अफसरों में शामिल होते हैं। सरकार का मनचाहा काम करते हैं इसलिए उनको प्रमुख सचिव नियुक्ति के पद पर तैनात कर दिया गया।
मसला अकेले राजीव कुमार का ही नहीं है। दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को लेकर पूरी तरह अड़ी अखिलेश सरकार में नौकरशाहों के कई ऐसे चेहरे शामिल हैं जिन पर दाग है। मसलन आईएएस के धनलक्ष्मी। यूपी में हुए हजारों करोड़ के यूपीएसआईडीसी घोटाले में धनलक्ष्मी सीबीआई और ईडी के जांच के दायरे में है।
अखिलेश सरकार ने उन्हें भी अहम जिले अमेठी में जिलाधिकारी तैनात कर रखा है। वाराणसी में कमिश्नर के तौर पर तैनात आईएएस चंचल तिवारी के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई और ईडी की जांच चल रही है।
तो वहीं लखनऊ में कमिश्नर बना कर रखे गए संजीव शरण भी सीबीआई जांच के दायरे में है। शरण के पास पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव और डीजी का भी कार्यभार है। तो वहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के चेयरमैन के अहम पद पर तैनात रमारमण लोकायुक्त जांच में घिरे हुए हैं।
रमारमण पर मायावती सरकार के दौरान हुए फॉर्महाउस घोटाले में संगीन आरोप हैं। मुख्यमंत्री के सचिव आईएएस आलोक कुमार पर सिडकुल घोटाले में गंभीर आरोप लगे थे और उनकी जांच भी हुई। फिलहाल अवैध खनन के मामले में उन पर एक बार फिर आरोप लगे हैं और अदालत ने इस मामले में नोटिस भी जारी किया है।
सिर्फ आईएएस ही नहीं, आईपीएस अधिकारियों में भी यूपी सरकार ने तमाम ऐसे अफसरों को महत्वपूर्ण तैनातियां दे रखी हैं जो आरोपों के घेरे में हैं। मसलन लखनऊ के एसएसपी जे रवींद्रगौड़ एक बेगुनाह को फर्जी एनकाउंटर में मारने के आरोपों से घिरे हैं और सीबीआई ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांगी है। इसी तरह मायावती में पुलिस भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किए गए आईपीएस अधिकारियों को भी सरकार ने अहम पदों पर बैठा रखा है। (साभार- आईबीएन7)





