भारत सरकार के कड़े रुख के बावजूद पाकिस्तान की सेना अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रही है। जबकि, रक्षामंत्री ए के एंटनी ने दो दिन पहले ही इस्लामाबाद को कड़ा संदेश भेजा था। सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने भी कह दिया है कि यदि पाकिस्तान ने अपना रवैया नहीं बदला, तो फिर मुंह तोड़ जवाबी कार्रवाई के लिए भारत को भी मजबूर होना पड़ेगा। ऐसी स्थिति आई, तो पाक की दिक्कतें बढ़ जाएंगी।
इस तरह की चेतावनियों के बाद भी सीमा पार से लगातार शरारतें की जा रही हैं। सोमवार की रात में जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी सीमा से आए फौजियों ने खूनी उपद्रव किया था। इन लोगों ने भारतीय चौकी में तैनात पांच जवानों को मार दिया था। इससे दोनों देशों के बीच नए सिरे से तनाव बढ़ गया है। भारत में सड़क से संसद तक पाक के इस कारनामे पर लोगों में भारी गुस्सा है। इस संवेदनशील स्थिति में भी पाक का रवैया नहीं बदला है। शुक्रवार को आधी रात के बाद मेंढर सेक्टर में पाकिस्तान की सीमा से भारतीय चौकियों को निशाना बनाकर अधाधुंध गोलीबारी की गई।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पाक के फौजियों ने करीब साढ़े सात घंटे तक फायरिंग जारी रखी। अनुमान है कि लगभग सात हजार राउंड गोलियां चलाई गईं। माना जा रहा है कि ‘सीज फायर’ लागू होने के बाद पहली बार इतनी देर तक फायरिंग की घटना हुई। इसे काफी गंभीर मामला माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कारगिल युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच 2003 में ‘सीज फायर’ का समझौता हुआ था। शुरुआती दौर में तो पाकिस्तान ने काफी संयम दिखाया था। लेकिन, पिछले दो सालों से पाक की सेना जम्मू-कश्मीर से जुड़ी सीमा रेखा में लगातार शरारतें कर रही है। सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने पिछले दिनों दावा किया था कि पाकिस्तान की तरफ से 60 बार ‘सीज फायर’ का उल्लंघन किया गया है। पाक की तरफ से लगातार उकसावे वाली हरकतें की जा रही हैं। उन्होंने इस्लामाबाद को चेतावनी देते हुए कह दिया था कि भारत की सेना का धैर्य टूटा, तो यह स्थिति पाकिस्तान के लिए बहुत महंगी पड़ने वाली है। सेना प्रमुख की इस टिप्पणी को अल्टीमेटम के रूप में देखा गया।
रक्षा विशेषज्ञों को भी हैरानी हो रही है कि भारत के इन कड़े तेवरों की भी पाकिस्तान के हुक्मरान पता नहीं क्यों परवाह नहीं कर रहे हैं? रक्षा विशेषज्ञ डॉ. भरत वर्मा का मानना है कि अब वह समय आ गया है कि सिर्फ जुबानी चेतावनियों से काम नहीं चलने वाला। ऐसे मेंं, जरूरी हो गया है कि जल्द से जल्द सीमा पर पलटवार की रणनीति अपना ली जाए। यदि इस मौके पर भी नरमी की रणनीति रही, तो इससे सेना का मनोबल भी गिरने का खतरा है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पुंछ सेक्टर में भारतीय सीमा में आधा किमी अंदर आकर पाक के फौजियों ने पांच जवानों को मार दिया था। रक्षामंत्री ए के एंटनी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हमलावर आतंकवादी नहीं, बल्कि पाक के ही फौजी थे। सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह इस हादसे के बाद घटनास्थल का जायजा लेने के लिए पुंछ सेक्टर में पहुंचे थे। उन्होंने सेना के अधिकारियों से कह दिया है कि सीमा पार से जरा भी शरारत हो, तो उसका मुंह तोड़ जवाब देना बहुत जरूरी है। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि भारतीय सीमा में आधा किमी अंदर आकर पाक के फौजियों ने हमला किया और सुरक्षित अपनी सीमा में कैसे लौट गए? सेना प्रमुख के कड़े तेवरों से फौजियों में यह संदेश दे दिया गया है कि अब मुंह तोड़ जवाब देना जरूरी हो गया है।
पुंछ चौकी में हुए हमले को लेकर विपक्ष ने यूपीए सरकार पर काफी दबाव बढ़ा दिया है। पिछले सप्ताह इस मामले को लेकर विपक्ष ने संसद में सरकार की जमकर खिंचाई की थी। विपक्ष के दबाव के चलते ही रक्षामंत्री एंटनी को अपना बयान बदलना पड़ा। दरअसल, पुंछ में हुए हमले को लेकर पहले दिन संसद में रक्षा मंत्री ने यही कह दिया था कि सीमा पार से 20 आतंकवादियों के दल ने भारतीय चौकी में हमला किया था। इसी से हमारे पांच जवान शहीद हो गए। रक्षामंत्री ने यह बताया था कि हमलावरों में कुछ लोग पाक सेना की वर्दी में थे। एंटनी के इस बयान से संसद में खासा हंगामा हुआ। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज तो सरकार पर बिफर ही गई थीं। उन्होंने रक्षामंत्री से माफी मांगने के लिए कहा था। एंटनी के बयान पर कांग्रेस के नेता भी खुश नहीं थे। क्योंकि, इस बयान से यही संदेश गया कि सरकार पाकिस्तान के प्रति नरम नीति अपना रही है।
पाक की हरकत के खिलाफ जब देशभर में गुस्से की लहर बढ़ी, तो सरकार को भी अपने तेवर कड़े करने पड़े। इसके बाद रक्षामंत्री ने अगले दिन अपना नया बयान दिया। इसमें उन्होंने यह स्वीकार किया कि पुंछ चौकी में हमला पाक सेना की ही एक स्पेशल यूनिट ने किया था। उल्लेखनीय है कि इसी साल जनवरी में जम्मू के पास मेंढर सेक्टर में पाक के सैनिकों ने दो भारतीय जवानों का सिर काट लिया था। इस बर्बर घटनाक्रम के दौरान एक जवान का कटा हुआ सिर तो पाक के सैनिक अपने साथ ही ले गए थे। इस हादसे को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था। यह अलग बात है कि पाक सेना के अधिकारियों ने यही सफाई दी थी कि सिर काटने का कारनामा उन लोगों ने नहीं किया था। पाक के हुक्मरानों ने इसे आतंकवादी घटना के रूप में प्रचारित किया था।
पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। नवाज शरीफ, प्रधानमंत्री बने हैं। शरीफ की छवि एक मृदुभाषी नेता की रही है। वे लगातार भारत से अच्छे रिश्ते रखने की दुहाई भी देते रहे हैं। यह भी कह चुके हैं कि फिर दोबारा कारगिल जैसी स्थितियां दोनों देशों के बीच हरगिज नहीं आने दी जाएंगी। शरीफ के इन संकल्पों के बाद भी वहां की सेना की कार्यशैली में बदलाव नहीं देखा जा रहा। रक्षा विशेषज्ञ भरत वर्मा सवाल करते हैं कि शरीफ साहब की तमाम ‘शराफत’ किस काम की? जब वे अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना पर कुछ भी नियंत्रण नही रख पा रहे हैं। कारगिल युद्ध के समय भी सत्ता में नवाज शरीफ ही थे। उस समय तो यही कहा गया था कि तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने ही साजिश रची थी। शरीफ को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
इस बीच खुफिया एजेंसी आईबी ने दिल्ली पुलिस को एक अलर्ट भेजा है। इसमें कहा गया है कि आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद लगातार भारत के खिलाफ जहरीला भाषण दे रहा है। कराची की एक सभा में इस आतंकी आका ने यहां तक कहा है कि भारत को सबक सिखाने के लिए दिल्ली में बड़ा निशाना साधने की जरूरत है। आईबी ने खबरदार किया है कि हाफिज के गुर्गे दिल्ली को आतंकी निशाना बना सकते हैं। इस अलर्ट के बाद राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी गई है। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने कहा है कि वैसे भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी जाती है। लेकिन, हाफिज की धमकी के बाद सुरक्षा निगरानी और दुरुस्त कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2008 में हुए मुंबई के आतंकी हमले का मास्टर माइंड यही हाफिज सईद था। भारत के लिए यह आतंकी आका मोस्ट वांटेड है। लेकिन, पाक सरकार इसे खुला संरक्षण देने में लगी है।
ईद के मौके पर शुक्रवार को हाफिज सईद ने लाहौर के प्रसिद्ध गद्दाफी स्टेडियम में नमाज के दौरान जहरीली तकरीर की। इस मौके पर भी हाफिज ने कई आपत्तिजनक टिप्पणियां कर दीं। यहां तक कह दिया कि कश्मीरियों को आजादी दिलाने के लिए जो भी करना पड़े, इसके लिए तैयार रहना होगा। ताकि, उन्हें अगली ईद तक आजादी की सांस मिल सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाफिज ने अपनी तकरीर से साफ कर दिया है कि उसके इरादे कश्मीर में उपद्रव बढ़वाने के हैं। उल्लेखनीय है कि सीमा पार के उकसावे के चलते कश्मीर में एक दशक तक हालात काफी खराब रहे हैं। 89 से अब तक जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के चलते करीब 70 हजार लोग मारे गए हैं। काफी मुश्किल से इस राज्य के हालात काबू में आए हैं। लेकिन, सीमा पार के आतंकी संगठन फिर से घाटी में ‘आजादी’ के नाम पर साजिश करने में लगे हैं। ईद के मौके पर जम्मू के किश्तवाड़ में छोटी सी बात पर सांप्रदायिक दंगा हो गया। इसमें दो लोगों की जान चली गई। सरकार के सामने चुनौती है कि किश्तवाड़ की सांप्रदायिक आग और न बढ़े। लेकिन, सीमा पार के हाफिज सईद जैसे आतंकी आका, इस्लाम के नाम पर तमाम भड़काऊ संदेश घाटी में भिजवा रहे हैं। इससे जम्मू-कश्मीर की सरकार भी चिंतित हो गई है।
इस बीच पाकिस्तान की तरफ से पहली बार यह खुलासा किया गया है कि भारत का मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम लंबे समय तक पाकिस्तान में रहा है। पूर्व राजनयिक एवं प्रधानमंत्री के नवाज शरीफ के सलाहकार शहरयार खान ने दाऊद के संदर्भ में यह खुलासा शुक्रवार को किया था। लेकिन, शनिवार को उन्होंने ‘यू-टर्न’ लेने की कोशिश की। यही कह दिया कि उन्हें नहीं पता कि दाऊद अब कहां है? यदि वह पाकिस्तान में होता, तो उसे हम गिरफ्तार कर लेते। दो दशकों में पहली बार पाक के किसी हुक्मरान ने दाऊद के बारे में मुंह खोला है। लेकिन, भारत सरकार पाक के ‘सच’ को विश्वसनीय नहीं मान रही है। इस मामले में सभी राजनीतिक दलों ने एक स्वर में पाकिस्तान की खबर ले ली है। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कह दिया है कि पाकिस्तान महा झूठा देश है। इसकी बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कह दिया है कि दाऊद इब्राहिम की तलाश जारी रहेगी। सरकार तब तक चैन नहीं लेगी, तब तक दाऊद उसकी पकड़ में नहीं आ जाता है। पाक के रवैए के खिलाफ सभी दलों की आम सहमति बन गई है कि इस्लामाबाद को कड़े से कड़ा संदेश दिया जाए। जरूरत पड़ने पर सीमा पर करारा जवाब देने से भी नहीं चूकना चाहिए।
लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।





