गलत सर्कुलेशन दिखाकर महंगे रेट पर विज्ञापन वसूलने वाले अखबारों की मुश्किल बढ़ सकती है. इस मामले समेत कई मुद्दों को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में पीआईएल दाखिल की गई है. इसमें ऐसे पत्रकारों को भी निशाने पर लिया गया है, जो सस्ते दर पर सरकारी प्लाट लेने के बावजूद सरकारी आवासों का आनंद उठा रहे हैं. पीआईएल दृष्टांत पत्रिका के संपादक अनूप गुप्ता ने दाखिल की है. इस मामले पर सुनवाई मंगलवार को होगी.
अनूप गुप्ता लंबे समय से लखनऊ में भ्रष्ट पत्रकारों के खिलाफ अभियान चलाते आ रहे हैं. इस बार पीआईएल के माध्यम से उन्होंने लखनऊ के तमाम अखबारों को निशाना बनाया है, जो गलत सर्कुलेशन का आंकड़ा दिखाकर महंगे दर पर सरकारी विज्ञापन वसूलकर अपनी झोली भर रहे हैं.
इसके अलावा सरकार से सस्ते दर पर प्लाट लेने के वावजूद सरकारी आवासों में रहने वाले पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया है. लखनऊ में कई दर्जन ऐसे पत्रकार हैं, जो प्लाट पर अपना मकान बनवाने के बावजूद सरकारी आवास में नाम मात्र के किराए पर रह रहे हैं, जबकि अपने अवासों का कामर्शियल उपयोग कर रहे हैं. ऐसे ही पत्रकारों को निशाने पर लेकर अनूप गुप्ता ने पीआईएल दाखिल किया है. अनूप का कहना है कि ऐसे पत्रकार सरकार की दलाली में लिप्त हैं और पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं. अपनी सुविधाओं के लिए सरकार की चमचागिरी कर रहे हैं.
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