Yashwant Singh : कुछ रोज पहले ''जानेमन जेल'' किताब को जब कापड़ी-साक्षी के नाम समर्पित कर रहा था तो मुझे तनिक अंदाजा न था कि इसके प्रतिदान स्वरूप मेरे नाम भी कोई अपनी किताब समर्पित कर रहा होगा.. मेरे नाम भी किसी ने एक किताब समर्पित कर दिया है भाइयों… और इस समर्पण के बारे में मुझे तब पता चला, जब वो किताब मेरे पास कूरियर से चलकर आई… एक दो पन्ने पलटते ही लिखा दिखा- ''यशवंत सिंह के लिए''…
मुझे भरोसा नहीं हुआ कि यह मेरे नाम है… तुरंत फोन लगाया और उन्होंने बताया- ''तेरे ही नाम है जानेमन जेल''. मैं जोर से हंसा.. उस तरफ फोन पर थे Dayanand Pandey जी. अब उनके इस समर्पण, इस प्यार को क्या नाम दूं! लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और गजब के लिक्खाड़ दयानंद पांडेय उर्फ दनपा ने जिस नई किताब को मुझे समर्पित किया है, उसका नाम है- ''एक जनांदोलन के गर्भपात की त्रासदी''. यह किताब दनपा के पोलिटिकल आर्टकिल्स का कलेक्शन है. शुक्रिया पंडीजी. लव यू. आवारा, लफंगा, लफंटूस द ग्रेट एंड लंपट श्रेणी के जानवर में आपने कुछ नया तलाश लिया, यह आपकी बलिहारी… जय हो.. — feeling blessed.
भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.
यशवंत ने विनोद कापड़ी – साक्षी जोशी को समर्पित की अपनी पहली किताब 'जानेमन जेल'





