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अभय कुमार दुबे जैसे वरिष्ठ पत्रकार द्वारा बसपा पर हमला और सपा का बचाव शोभा नहीं देता

Shambhunath Shukla : लाजवाब है रवीश कुमार की एंकरिंग। रवीश ने उघाड़ दिया सांसदों और पत्रकार को। कल के प्राइम टाइम में संजय निरूपम जैसे बड़बोले सांसद को तो उन्होंने डिफेंसिव बना ही दिया। उग्र पत्रकार अभय कुमार दुबे को भी बैकफुट पर डाल दिया। राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने के बाबत संजय सिर्फ अपनी पोच दलीलें देते रहे और उतने ही अधिक दर्शकों के समक्ष वे एक्सपोज होते रहे। जबकि बीजद के सांसद केएन सिंह देव आगे बढ़कर राजनीतिक दलों को इस दायरे में लाने को राजी दिखे।

Shambhunath Shukla : लाजवाब है रवीश कुमार की एंकरिंग। रवीश ने उघाड़ दिया सांसदों और पत्रकार को। कल के प्राइम टाइम में संजय निरूपम जैसे बड़बोले सांसद को तो उन्होंने डिफेंसिव बना ही दिया। उग्र पत्रकार अभय कुमार दुबे को भी बैकफुट पर डाल दिया। राजनीतिक दलों को आरटीआई के दायरे में लाने के बाबत संजय सिर्फ अपनी पोच दलीलें देते रहे और उतने ही अधिक दर्शकों के समक्ष वे एक्सपोज होते रहे। जबकि बीजद के सांसद केएन सिंह देव आगे बढ़कर राजनीतिक दलों को इस दायरे में लाने को राजी दिखे।

पत्रकार अभय कुमार दुबे ने बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा अकूत संपत्ति जोडऩे का बार-बार जिक्र किया लेकिन एक बार भी मुलायम सिंह द्वारा संपत्ति जोड़ने की बात नहीं कही। पर रवीश कुमार कहां मानने वाले थे। उन्होंने अभय कुमार दुबे को टोकते हुए कहा भी कि मुलायम सिंह ने भी यही किया है पर अभय जी एकदम से इस बात को पी गए और बोले कि हां अन्य पार्टियों द्वारा भी ऐसा किया गया है। अभय कुमार दुबे जैसे वरिष्ठ पत्रकार द्वारा बसपा पर हमला और सपा का बचाव शोभा नहीं देता।

यही हाल भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी का हुआ। वे भाजपाई नैतिकता का हवाला देते हुए राजनीतिक दलों के चंदे की बारे में लल्लो चप्पो करते रहे कि एक राजनीतिक दल के लिए यह कैसे संभव है कि वह अपनी पाई-पाई का हिसाब रखने के लिए लोगों को नौकरी पर रखे। कुल मिलाकर ऐसा लगा कि जैसे इस मामले में सारे राष्ट्रीय राजनीतिक दल एक हैं। संजय और नकवी दोनों मीडिया पर रवीश को दबाने के लिए यह कहते दिखे कि फिर मीडिया को इस दायरे में लाना चाहिए। पर रवीश जैसे चतुर सुजान एंकर उनकी हनक में नहीं आए और इन सारे सांसदों का असली चेहरा दर्शकों के समक्ष उघाड़ दिया। इसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

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