बेचारे निशिकांत ठाकुर. मानकर बैठे थे कि ताउम्र वे ही राज करेंगे और जिसे चाहे अखबार के भीतर या अखबार के बाहर हीरो बना देंगे या जीरो कर डालेंगे. पर जब जब ऐसी गलतफहमी जिन जिन ने पाली, उनके घमंड अहंकार का नाश हुआ. निशिकांत के साथ भी ऐसा ही हो रहा है. बुढ़ापा, खराब सेहत और ढेर सारे आरोपों से घिरे निशिकांत ठाकुर के करीबियों का एक एक कर विकेट गिर रहा है. अब तो लोग भी निशिकांत से मिलने-जुलने में घबराने लगे हैं क्योंकि दैनिक जागरण, नोएडा और इससे जुड़े लोगों में यह चर्चा आम हो गई है कि जो भी निशिकांत ठाकुर से सटा, समझो वो नपा.
उगते सूरज को प्रणाम करने वाली इस दुनिया में लोग माहौल बदलते देख खुद की निष्ठा बदलने में पल भर देर नहीं लगाते. जो लोग कल तक खुद को सीजीएम निशिकांत का करीबी बताते हुए संपादक विष्णु त्रिपाठी के खिलाफ यहां वहां ढेर सारा जहर उगलते मिल जाते थे, वे लोग अब निशिकांत से दूरी बना चुके हैं और विष्णु त्रिपाठी की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं.
ताजी सूचना के मुताबिक कविलाश को डेस्क पर भेजे जाने का बाद दिल्ली लोकल का प्रभारी सौरभ श्रीवास्तव को बना दिया गया है. ग्रेटर नोएडा की जिम्मेदारी मनोज त्यागी को दिए जाने की सूचना है. पूर्वी दिल्ली की जिम्मेदारी सुधीर कुमार को दी गई है. अगर इन बदलावों के बारे में आपको पक्की सूचना हो तो भड़ास को सूचित करें, [email protected] पर मेल करके. मेल भेजने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा.





