भड़ास को एक मीडियाकर्मी ने मेल करके सूचित किया है कि शैलेंद्र भदौरिया अपने नेशनल दुनिया अखबार की जैसी तस्वीर पेंट कर रहे हैं, असली तस्वीर इससे बिलकुल उलट है. इनका मेरठ एडिशन बंद होने की कगार पर है. आंतरिक राजनीति और खराब कंटेंट की वजह से अखबार बुरी तरह पिट चुका है. जयपुर में प्रिंट आर्डर पच्चीस हजार का था लेकिन बिकी सिर्फ बाइस सौ कापियां. दिल्ली में अखबार सिर्फ प्रतीकात्मक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए निकल रहा है.
अखबार का न तो सर्कुलेशन है और न ही कंटेंट में कोई दम. यही नहीं, दिल्ली में कार्यरत मीडियाकर्मियों का टीडीएस और पीएफ मैनेजमेंट ने काटा लेकिन इसे आजतक जमा नहीं किया गया है. इस ग्रुप के मीडियाकर्मियों की शिकायत है कि इन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जाता. ऐसे में शैलेंद्र भदौरिया से अपील है कि वे जहां चाहें वहां से अपना अखबार निकालें लेकिन कम से कम जो मीडियाकर्मी उनके साथ जुड़े हुए हैं, उनसे तो अन्याय ना करें.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
अगर आपको भी किसी मीडिया संस्थान से कोई शिकायत हो तो अपनी बात [email protected] पर मेल कर सकते हैं.
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