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‘द संडे इंडियन’ की स्टोरी को ‘टाइम्स आफ इंडिया’ ने टीपा!

गौतमबुद्ध नगर में बालू के अवैध खनन पर पत्रकार अनिल पांडे ने अप्रैल, 2013 के प्रथम सप्ताह में संडे इंडियन-हिंदी में एक इनवेस्टीगेटिव स्टोरी की थी. तब इनके सहयोगी अभिषेक कुमार और उमेश पाटिल ने अपने खुफिया कैमरे में इस अवैध कारोबार को कैद भी किया था. अप्रैल, 2013 के प्रथम सप्ताह में यह स्टोरी द संडे इंडियन के हिंदी संस्करण में प्रकाशित हुई थी (देंखे, नीचे दिया गया पहला लिंक). इसके बाद 17-24 अप्रैल, 2013 के अंग्रेजी संस्करण में भी यह स्टोरी प्रकाशित हुई, (देखें दूसरा लिंक).

गौतमबुद्ध नगर में बालू के अवैध खनन पर पत्रकार अनिल पांडे ने अप्रैल, 2013 के प्रथम सप्ताह में संडे इंडियन-हिंदी में एक इनवेस्टीगेटिव स्टोरी की थी. तब इनके सहयोगी अभिषेक कुमार और उमेश पाटिल ने अपने खुफिया कैमरे में इस अवैध कारोबार को कैद भी किया था. अप्रैल, 2013 के प्रथम सप्ताह में यह स्टोरी द संडे इंडियन के हिंदी संस्करण में प्रकाशित हुई थी (देंखे, नीचे दिया गया पहला लिंक). इसके बाद 17-24 अप्रैल, 2013 के अंग्रेजी संस्करण में भी यह स्टोरी प्रकाशित हुई, (देखें दूसरा लिंक).

इस स्टोरी में गौतमबुद्ध नगर जिले में बालू के बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन पर प्रकाश डालते हुए यह बताया गया था कि किस तरह से बालू के अवैध खनन के चलते यमुना एक साल में रास्ता बदल कर नोएड़ा की तरफ आधा किलोमीटर यानी 500 मीटर खिसक गई है. स्टोरी में सिंचाई विभाग के एक्ज्यूक्यूटिव इंजीनियर का डीएम को लिखा वह पत्र भी प्रकाशित किया गया था जिसमें यमुना के खिसकने और और बाढ़ के समय इसकी वजह से होने वाली तबाही के लिए आगाह किया गया था. जिस पर उत्तर प्रदेश के सीएम आफिस में तैनात सचिव आलोक कुमार ने तब जांच का आदेश भी दिया था.

इसके बाद नागपाल के निलंबन का मामला जब चर्चित हुआ तो अनिल पांडेय ने एक पूरक स्टोरी की कि गौतमबुद्ध नगर जिले में बड़े पैमाने पर बालू के अवैध खनन की वजह से कैसे यमुना अपना रास्ता बदल कर शहर को तबाह कर सकती है और नोएडा केदारनाथ बन सकता है. यह स्टोरी द संडे इंडियन अंग्रेजी के 4 से 10 अगस्त, 2013 के अंक में प्रकाशित हुई (देखें तीसरा लिंक). इसके बाद द टाइम्स आफ इंडिया ने 10 अगस्त, 2013 को Sand mining moves Yamuna course 500m, Noida at risk शीर्षक से इसे पहले पेज की लीड स्टोरी के रूप में प्रकाशित किया और उसी पत्र का हवाला दिया जिसे द संडे इंडियन ने चार महीने पहले ही प्रकाशित कर दिया था (देखे चौथा लिंक). यह पत्र द संडे इंडियन की वेबसाइट पर मौजूद है. टाइम्स में खबर छपने बाद कई चैनलों ने भी इस पर स्टोरी की.

अक्सर बड़े अखबार व टीवी चैनल और उनके बड़े पत्रकार दूसरे अखबारों व वेबसाइटों से खबर चुरा लेते हैं और फिर उसे प्रकाशित-प्रसारित कर वाहवाही लूटते हैं. टीवी में तो यह बड़े पैमाने पर होता है. जिस पत्रकार की स्टोरी उठाई जाती है, वह बेचारा मुंह देखता रह जाता है और श्रेय कोई और ले जाता है. बाद में बड़े पत्रकार इसी चुराई स्टोरी पर पुरस्कार भी प्राप्त कर लेते हैं. "लीपली लाइव" के पत्रकार देशभर में मौजूद हैं, जो ग्रामीण और आंचलिक पत्रकारों की स्टोरी पर खबर पर डाका डाल कर वाहवाही लूट लेते हैं.

अंग्रेजी के दो वरिष्ठ पत्रकारों की टीपने की आदत की वजह से नौकरी जा चुकी है और यह वाकया खूब खबरों में भी रहा. इस बारे में द संडे इंडियन में एक्जीक्यूटिव एडिटर के बतौर कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय कहते हैं- ''यह कोई पहला वाकया नहीं है.  करीब पांच साल पहले दिल्ली में बड़े पैमाने पर गुम हो रहे बच्चों पर द संडे इंडियन में कवर स्टोरी की थी. तब करीब दो महीने तक दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में घूम कर गुमशुदा बच्चों का ब्यौरा तैयार किया और यह मामला उठाया. लेकिन द संडे इंडियन में स्टोरी प्रकाशित होने के बाद इसे लेकर दूसरे अखबारों और चैनलों ने स्टोरी की. ऐसे में बड़े अखबार इसका श्रेय हड़प जाते हैं. भला हो फेसबुक और मीडिया वेबसाइटों का, जिसकी वजह से अब ऐसे मामले उजागर होने लगे हैं. ऐसी मेरी कई स्टोरी है जिस पर लोगों ने फालोअप किया. एक पत्रकार के नाते यह जरूर खुशी होती है कि मैं जो स्टोरी करता हूं बड़े अखबारों के बड़े पत्रकार उनका फालोअप करते हैं.''

ये हैं चारों लिकं…

शुरुआती तीन लिंक The Sunday Indian के…

http://www.thesundayindian.com/hi/story/many-firs-but-mining-are-continue/13/19633/

http://www.thesundayindian.com/en/story/operation-floods/25/47306/

http://www.thesundayindian.com/en/story/will-noida-become-another-kedarnath/24/47966/

और ये चौथा लिंक Times Of India का…

http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-08-10/noida/41266073_1_illegal-sand-dredgers-sand-mining-sand-mafia

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