संदीप कुमार नागर मेरठ के मवाना कस्बे में रहते हैं. अखबारों से जुड़कर पत्रकारिता का कार्य भी करते हैं. संदीप की खुद की माली हालत अच्छी है क्योंकि इनके पास खेती-बारी-बाग-बगीचे काफी हैं. कभी इनके सूर्यकांत से अच्छे संबंध हुआ करते थे. पर जबसे सूर्यकांत ने इनसे पैसे लिए और लौटाए नहीं तबसे संदीप नागर दुखी हो गए और अपने पैसे की वापसी की लड़ाई लड़ रहे. बेशर्म हिंदुस्तान प्रबंधन न तो सूर्यकांत के खिलाफ कोई एक्शन ले रहा और न ही नागर को उनके पैसे दिला रहा. क्या राजनीति की तरह अब मीडिया भी दागियों की आखिरी शरणस्थली बन चुकी है? नागर ने दुखी होकर हिंदुस्तान की मालकिन शोभना भरतिया को पत्र लिखा है जिसे नीचे प्रकाशित किया जा रहा है.


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