Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

आपके पास काम न हो तो एक काम करें, किसी स्थापित व्यक्ति को रोज सवेरे जी भर गाली बकें

Ram Janm Pathak : नाम कमाने का तरीका… अगर आपके पास अपना कोई आधार न हो, अपनी कोई जमीन न हो, अपना कोई ईमान न हो, अपनी कोई पढ़ाई-लिखाई और पहचान न हो, तो एक काम कीजिए, किसी स्थापित व्यक्ति को रोज सवेरे उठकर मुंह भर कर गाली बकिए। बताइए कि उसके कार के पहिए में गोबर लगा हुआ था। जोर- जो से चिल्लाइए कि उस आदमी ने कमीज के नीच बनियान उल्टी पहनी हुई है।

Ram Janm Pathak : नाम कमाने का तरीका… अगर आपके पास अपना कोई आधार न हो, अपनी कोई जमीन न हो, अपना कोई ईमान न हो, अपनी कोई पढ़ाई-लिखाई और पहचान न हो, तो एक काम कीजिए, किसी स्थापित व्यक्ति को रोज सवेरे उठकर मुंह भर कर गाली बकिए। बताइए कि उसके कार के पहिए में गोबर लगा हुआ था। जोर- जो से चिल्लाइए कि उस आदमी ने कमीज के नीच बनियान उल्टी पहनी हुई है।

आपको यह भी तो साबित करना है कि आप आलोचक है और नजर गहरी और सूक्ष्म है तो बीच-बीच में यह तरकीब भी अपना सकते हैं-जैसे कहिए कि उस स्थापित आदमी के गुप्तांग पर एक तिल है। इस बात का बड़ा मजा बनेगा। लोग कहेंगे कि बंदा अंदर तक की जानकारी रखता है, पहुंचा हुआ है। भई गजब का आलोचक है। कहां से खोजी रिपोर्ट निकाल कर लाया। कोई शक जताए कि कैसे तुम्हें पता चला तो मंद-मंद मुस्कराइए। इससे आपके हरामीपन की धाक जमेगी।

इन दिनों फेसबुक पर कुछ ऐसे नाम कमाने वाले कथित वामांगी सक्रिय हैं। जो तमाम जगह से धकिया कर निकाले गए हैं। कोई योग्यता नहीं है। कहीं नौकरी नहीं पाते। जहां-तहां कार्यक्रमों में लड़कियों पर लार टपकाते, समोसे पर झपटते और रतजगे के लिए चुल्लूभर दारू के लिए रिरियाते हुए फिरते हैं। फेसबुक खोलते ही परमवीर हो जाते हैं। आता-जाता सालों को कुछ है नहीं, तब बताते हैं कि चांद मुंह का मुंह टेढ़ा है। खुद पड़ोस की दुकान का पांच सौ कर्जा पांच महीने से चुका नहीं पाए हैं, लेकिन संसद की गरिमा को लेकर उनकी चिंताए अगाध हैं।

लेकिन, ऐसे भी नाम होता है प्यारे।
काम का हो या न हो।

Rising Rahul : साथि‍यों, देखि‍ए ब्राह्म्‍णवाद कैसे फूट फूटकर बह नि‍कला है। ये आप ही हैं, जि‍न्‍होंने इसको ऐसे बह नि‍कलने के लि‍ए प्रेरि‍त कि‍या है। जमकर लि‍खें साथि‍यों। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कम पढ़े लि‍खे हैं और आपके पास ब्राह्म्‍णों की तरह शब्‍दों की पैनी धार नहीं है। आपके पास जि‍तना भी है, उसी से ब्राह्म्‍णवाद की चड्ढी गीली और बनि‍यान उलटी होने लगी है। बकौल Dilip C Mandal अब इनके दि‍न ज्‍यादा दि‍न नहीं। और ये इनके रूदन से स्‍पष्‍ट है। और हां, इनकी पार्टियों में बड़ी संख्‍या में पहुंचे और सारे समोसे खत्‍म कर दें। एक भी समोसा इन ब्राहम्‍णवादि‍यों के लि‍ए बचना नहीं चाहि‍ए। जय भीम।

Ram Janm Pathak : कोई राइजिंग राहुल हैं और भारत सिंह। बीस किलो घी खाकर निकले हैं। बहसातुर. मुनादी कर दो। सरनेम देख कर सबका 'वाद' पकड़ रहे हैं। इनसे बचके रहना। इनके लिए निराला ब्राह्मणवादी थे, और प्रेमचंद कायस्थवादी और गांधीजी बनियावादी। मैं तो चला, आप संभालिए इन वीरों को। नकली बाना, नकली ताना।

Rising Rahul : राम जनम पाठक। जनसत्‍ता में काम करते हैं और खुद को प्रगति‍शील कहलवाने का खासा शौक है इन्‍हें। ये कि‍तने प्रगति‍शील और लोकतांत्रि‍क हैं, ये इस स्‍टेटस पर होने वाली बहस से पता चल जाएगा, बशर्ते इन्‍होंने बहस में हि‍स्‍सा लि‍या। देर से आने वाले मेरी प्रोफाइल पर जाकर इनका पहले लि‍खा हुआ पढ़ सकते हैं जि‍समें इस प्रगति‍शील ब्राह्म्‍ण ने भारत के मास को कि‍स ब्राह्म्‍णवादी तरीके से कोसा है।

Ram Janm Pathak : टुकड़खोर नरक मचाए हैं।

Rising Rahul : हा हा हा.. अयोग्‍यता से बचने के लि‍ए ब्राह्म्‍ण इसी तरह से जनेऊ उमेठ के धोती समेट के भागा है। इसमें क्‍या नई बात है। जाते जाते ये भी बोल जाता है कि बचे खुचे ब्राह्म्‍णों, दम है तो नि‍पटो इन असुरों से। वैसे पाठक जी, आपने टुकड़ाखोरों का इति‍हास नहीं बताया। और आपकी फ्रेंड लि‍स्‍ट में ये अनि‍ल सिंह जैसे अब्राह्म्‍ण कैसे शामि‍ल हैं। या फि‍र पंकज श्रीवास्‍तव जैसे अब्राह्म्‍ण। आपका स्‍टेटस शेयर कर रहे हैं क्‍योंकि आपका दायरा उतना बड़ा नहीं, जि‍तना हमारा है। हि‍म्‍मत है तो आइये वहीं। आइये भई पाठक जी। कब तक फाटक बंद कर रजाई में घुसे रहेंगे। हमारी प्रोफाइल पर आइये ताकि दुनि‍या देखे और जाने। आपके 290 दोस्‍तों से अच्‍छा आप हमारी योग्‍यता की परीक्षा हजारों दोस्‍तों के बीच लीजि‍ए।

Bharat Singh अब गलती से निकल गया होगा मुंह से टुकडाखोर, शायद अवचेतन मन से, उसपे तो किसी का बस है नहीं ना, वो तो रंगे हाथों धरा देता है. सैकड़ों सालों से सत्ता पर कब्ज की तरह जमे कॉमरेडों को भी जब लगता है कि संपत्ति का बंटवारा हो रहा है तो वो ब्राह्मणवाद की शरण में पहुँचते हैं. जय श्री राम…
 
Rising Rahul इन्‍हीं जैसों के लि‍ए तो लि‍खी थी..
    कामरेड कारमेड,
    दि‍ल्‍ली आके बढ़ गया पेट,
    पलंग के नीचे रखा रुपया,
    छत पे जाके लड़ता पेट।
    वैसे ये फतवा भी दे रहे हैं प्रेमचंद और नि‍राला के बारे में। पक्‍के पंडि‍त हैं ये तो।
 
Hemlata Shrivastav जब आँख के अंधे नयनसुख कहलाने का आनन्द लेना चाहते हैं तो लेने दीजिये न रामजनम जी. यही आज के विभाजित भारत की अफसोसजनक कहानी है.

जनसत्ता में कार्यरत राम जनम पाठक और दैनिक भास्कर में कार्यरत राहुल पांडेय व भारत सिंह के फेसबुक वॉल से.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...