आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने सैन्य बलों तथा बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी जैसे अर्ध-सैनिक बलों में काफी सस्ती दरों पर दी जा रही शराब के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में पीआईएल दाखिल किया है. याचिकाकर्ता के अनुसार जहाँ वे इन लोगों की मुश्किल परिस्थितियों और देश के प्रति इनके योगदान के मद्देनज़र इनके लिए खाद्य सामग्री, घरेलू सामानों आदि में छूट का स्वागत करते हैं वहीँ सरकारी टैक्स माफ करके सस्ती शराब दिये जाने का प्रबल विरोध करते हैं क्योंकि एक तो यह सरकारी धन का दुरुपयोग है, ऊपर से इसके कोई निश्चित कारण नहीं दिखते और इसके कई दुष्परिणाम अलग से दिख जाते हैं.
अमिताभ और नूतन ने पद के आधार पर सस्ती शराब दिये जाने पर भी प्रश्न उठाये हैं जहाँ सेना में अधीनस्थ अधिकारियों को महीने में 4 बोतल और वरिष्ठ अधिकारियों को पद के हिसाब से 10 या 14 बोतल मिलते हैं. उनके अनुसार इस प्रकार का भेदभावपूर्ण वितरण यह साबित कर देता है कि सस्ती शराब किसी जरूरत के हिसाब से नहीं है बल्कि मात्र एक अतिरिक्त अवांछनीय लाभ है. अतः इन दोनों ने एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा इस पूरे मामले का नए सिरे से अध्ययन कर इस अध्ययन के आधार पर सभी अनावश्यक सस्ती शराब का वितरण रोके जाने की प्रार्थना की है.





