सैकड़ों लोगों की छंटनी हो गई पर इन कथित महान संपादकों के मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही. राजदीप सरदेसाई देश दुनिया के मसलों पर बड़े बेबाक तरीके से बोलते कहते लड़ते दिख जाते हैं पर जब उनके खुद के साथियों के साथ अन्याय हो रहा, खुद के घर में अत्याचार का मसला सामने आया है तो उनकी न्याय दिलाने, अन्याय के खिलाफ मुहिम चलाने वाला तेवर गायब हो चुका है. यही हाल आशुतोष का है.
वैसे तो ये चैनल पर, स्क्रीन पर चिल्लाते, दहाड़ते दिख जाते हैं पर अब ये कुछ नहीं बोल रहे. ये पत्रकार कल भी खुद को महान बताते रहेंगे. विभिन्न मंचों से भाषण देते मिलेंगे. नेताओं से सही-गलत के बारे में पूछते नजर आ जाएंगे. पर इनकी बोलती आज बंद है क्योंकि इनके ही अधीन काम करने वाले बड़ी बेदर्दी से निकाल दिए गए. वो भी एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों.
कायदे से अगर इन दोनों पत्रकारों में तनिक भी नैतिकता होती तो वे पहले खुद इस्तीफा देते, फिर छंटनी के शिकार लोगों का नेतृत्व करते हुए देशव्यापी आंदोलन खड़ा करते, उसके बाद अंबानी और रिलायंस के शोषण व लूट की दास्तान को मुद्दा बनाते और इस बहाने अंबानियों-रिलायंस के देश पर कसते दैत्याकार पंजे की पकड़ ढीली कराते और देश की जनता को राहत देते. पर ये लोग ऐसा कुछ नहीं करेंगे क्योंकि यह सब करने के लिए जिगर चाहिए, साहस चाहिए, नैतिक बल चाहिए.. जो लोग करोड़ों-अरबों के धंधे में लग गए, वो पत्रकार कहां के रह गए, वे तो सही मायने में न व्यापारी हुए और न पत्रकार. वे पत्रकारिता के एलियंस हैं जो किसी और ग्रह से आए लगते हैं.
ऐसे में छंटनी के शिकार सभी साथियों से अनुरोध है कि वे जंतर-मंतर पर धरने की तैयारी करें. मुद्दे को देशव्यापी बनाने की तैयारी करें. इस दौर के बड़े मुखौटों की असलियत को सामने लाएं. बिन लड़े कुछ नहीं मिलता. अगर कोई सहयोग चाहिए तो भड़ास तैयार है. जगह बुक कराने से लेकर, हाल बुक कराने से लेकर, झंडा-डंडा तैयार कराने से लेकर, भीड़ जुटाने से लेकर… कोई भी काम करने के लिए भड़ास तैयार है, बस आपमें से कुछ साथियों को पहल करनी चाहिए और आपस में एकजुटता की शुरुआत करनी चाहिए.
इसके लिए सबसे आसान तरीका है एक मेल आईडी का क्रिएट किया जाना और उस मेल आईडी से सभी छंटनी के शिकार कर्मियों को जोड़ना. हाल की ही बात है जब आउटुलक में तीन-तीन मैग्जीन बंद कर लोगों को सड़क पर ला दिया गया तो कई साथी कोर्ट गए और स्टे ले आए. आखिरकार मैनेजमेंट को घुटने के बल बैठना पड़ा और कर्मियों के साथ बराबरी पर बात कर सम्मानजनक हल निकालने को बाध्य होना पड़ा.
भड़ास से संपर्क [email protected] के जरिए कर सकते हैं. भड़ास के एडिटर यशवंत से संपर्क 09999330099 के जरिए कर सकते हैं.
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