Sanjay Sharma : सरकार अपने फॉर्म में आ गई. मेरे कई मित्र मुझे समझा रहे थे कि प्रमुख सचिव ओद्योगिक विकास सूर्य प्रताप सिंह बहुत प्रभावशाली और सरकार के बेहद करीबी है. उनके खिलाफ में याचिका वापस ले लूँ वरना मुझे नुकसान उठाना पड़ सकता है. समझाने वालों में कुछ सरकारी अफसर भी शामिल थे. मैंने कह दिया कि जो भी होगा, अदालत ही फैसला करेगी. मैंने दस सालों से बिना सरकारी मदद के ईमानदारी से अपना अखबार निकाला है, अब अफसरों से डर कर याचिका वापस लेने से बेहतर अखबार ही बंद करना होगा.
जब लगा कि याचिका वापस नहीं होगी तो सरकार ने वही करना शुरू किया जो सरकार करती है. एलआईयू का एक इंस्पेक्टर मेरे गृह जनपद बदायूं गया और वहां मेरे एक पारिवारिक मित्र को फ़ोन करके मेरी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया. एक मित्र ने बताया कि मुझ पर कुछ फर्जी आरोप लगाने की तैयारी की जा रही है. मैंने प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी को पत्र लिख कर पूछा है कि क्या जो जनहित याचिका दायर करता है उन सबकी एलआईयू जानकारी हासिल की जाती है या मुझे किसी षड़यंत्र में फ़साने की रूपरेखा तैयार की जा रही है. सरकार के इस कदम से मुझे और ताकत मिली है. जिसे जितना जोर लगाना है लगा ले ..अगर कुछ गलत होगा तो कहूँगा भी और लिखूंगा भी ..मैंने माननीय उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश महोदय को भी ख़त लिख कर पूरे मामले की जानकारी दे दी है…
संजय शर्मा के फेसबुक वॉल से. संजय लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं और वीकएंड टाइम्स के संपादक हैं.





