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एनबीए, बीईए, एडिटर्स गिल्ड, डीयूजे… सब के सब फिलहाल बेहोशी में हैं

Dilip Khan : माया न फैलाइए। आभामंडल ओढ़े मायावी पत्रकार/संपादक न बनिए। हम जानते हैं आपकी सच्चाई। हम जानते हैं कि ज़रा सी सुविधा और पैसे के लिए आप कुछ भी कर सकते हैं। हमने नीरा राडिया प्रकरण देखा है, हमने जिंदल प्रकरण देखा है। हमने बड़े स्तंभकारों को बीजेपी का विज़न डॉक्यूमेंट बनाते देखा है। हमने इस बार बीजेपी कवर करने वाले बड़े पत्रकारों को कांग्रेस वॉर रूम ज़्वायन करते देखा है, ताकि चुनावी स्ट्रैटेजी में पार्टी को मदद मिल सके। आप अंबानी की दलाली कीजिए और सेमिनार में ज्ञान दीजिए। हे संपादकगण, धवल छवि निर्माण की मीडिया नैतिकता का एक अध्याय हम सबको मेल कर दीजिए!

Dilip Khan : माया न फैलाइए। आभामंडल ओढ़े मायावी पत्रकार/संपादक न बनिए। हम जानते हैं आपकी सच्चाई। हम जानते हैं कि ज़रा सी सुविधा और पैसे के लिए आप कुछ भी कर सकते हैं। हमने नीरा राडिया प्रकरण देखा है, हमने जिंदल प्रकरण देखा है। हमने बड़े स्तंभकारों को बीजेपी का विज़न डॉक्यूमेंट बनाते देखा है। हमने इस बार बीजेपी कवर करने वाले बड़े पत्रकारों को कांग्रेस वॉर रूम ज़्वायन करते देखा है, ताकि चुनावी स्ट्रैटेजी में पार्टी को मदद मिल सके। आप अंबानी की दलाली कीजिए और सेमिनार में ज्ञान दीजिए। हे संपादकगण, धवल छवि निर्माण की मीडिया नैतिकता का एक अध्याय हम सबको मेल कर दीजिए!

Dilip Khan :  एनबीए, बीईए, एडिटर्स गिल्ड, डीयूजे सब को लकड़सुंघा बेहोशी की दवा सुंघा गया है। कई दिनों तक बेहोशी के बाद ये सब झटके में उठेंगे और ‘आज़ाद मीडिया’, ‘आज़ाद मीडिया’ के नारों से गर्दन के नसों को ख़ामख्वाह फुलाने लगेंगे।

Dilip Khan : मुकेश अंबानी के पैसे से आपका समूह तो बड़ा हो जाएगा लेकिन उतना ही आपकी पहुंच से बाहर भी। आपको मैनेज करने के लिए रिलायंस स्कूल के पास हज़ारों मैनेजर हैं। दो-तीन महीने का वेतन दे मारेगा वो मैनेजर आपके मुंह पर..और अगर आप न लें तो आपकी बात अंबानी तक पहुंच भी नहीं पाएगी। बहुत दूरी है आपके और आपके मालिक के बीच। बड़े मीडिया ग्रुप में नौकरी करने से आप सुरक्षित क्यों महसूस करते हैं, पता नहीं?

Dilip Khan : अब दबी ख़बर टीवी टुडे ग्रुप को लेकर भी आ रही है। कल कोई बता रहा था कि वहां भी ऐसा ही कांड होने वाला है। पिछले छह महीने में NDTV में हुआ, दैनिक भास्कर में हुआ, आउटलुक ग्रुप में हुआ, टीवी-18 ग्रुप में हुआ। अब टीवी टुडे भी कोशिश में है। उधर KPMG-FICCI सर्वे हर साल बताता रहता है कि भारत में मीडिया बिजनेस आने वाले वर्षों में कुलांचे भरेगा। क्या है ये सब? कौन सा बिजनेस?? किसका बिजनेस?

दिलीप खान के फेसबुक वॉल से.

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Ajit Harshe : वैसे तो 300 पत्रकारों की नौकरी जाना दुखदाई है मगर मैं कहना चाहता हूँ कि भाइयों, पहले ही 84 करोड़ भारतीय बेरोजगार या अर्ध बेरोजगार हैं और गरीबी, भूख और गोलियों से मारे जा रहे हैं। क्या ख्याल है? क्या आप अपनी लड़ाई को उन 84 करोड़ लोगों की लड़ाई बनाना चाहते हैं या यूनियनवादी अस्त्रों से सिर्फ अपनी नौकरी सुरक्षित करना चाहते हैं।

अजीत हर्षे के फेसबुक वॉल से.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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