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‘खबरें अभी तक’ से विनोद मेहता की विदाई

गुड़गांव। विनोद मेहता की ''खबरें अभी तक'' चैनल से भी विदाई हो गई है। ये आउटलुक वाले मेहता नहीं हैं, बल्कि वो मेहता हैं जो कभी हरियाणा में मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के अतिरिक्त प्रेस सलाहकार के तौर पर कार्य कर रहे थे। पिछले कई माह से वे गुड़गांव से प्रसारित हो रहे क्षेत्रीय चैनल खबरें अभी तक की कमान संभाल रहे थे। पर अब सुना है कि टाटा-बाय बाय हो चुका है। इस चैनल के कर्ता-धर्ता इन दिनों दुबई के उद्योगपति और समस्त भारतीय पार्टी के अध्यक्ष सुदेश अग्रवाल हैं। अग्रवाल अपनी पत्नी नीलम समेत हरियाणा की राजनीति में घुसने का प्रयास कर रहे हैं। इसी प्रयास के प्रयास में चैनल चलाने का चस्का भी लग गया।

गुड़गांव। विनोद मेहता की ''खबरें अभी तक'' चैनल से भी विदाई हो गई है। ये आउटलुक वाले मेहता नहीं हैं, बल्कि वो मेहता हैं जो कभी हरियाणा में मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के अतिरिक्त प्रेस सलाहकार के तौर पर कार्य कर रहे थे। पिछले कई माह से वे गुड़गांव से प्रसारित हो रहे क्षेत्रीय चैनल खबरें अभी तक की कमान संभाल रहे थे। पर अब सुना है कि टाटा-बाय बाय हो चुका है। इस चैनल के कर्ता-धर्ता इन दिनों दुबई के उद्योगपति और समस्त भारतीय पार्टी के अध्यक्ष सुदेश अग्रवाल हैं। अग्रवाल अपनी पत्नी नीलम समेत हरियाणा की राजनीति में घुसने का प्रयास कर रहे हैं। इसी प्रयास के प्रयास में चैनल चलाने का चस्का भी लग गया।

खैर अब मुद्दे की बात पर आ जाते हैं यानि मेहता की विदाई की। इससे पहले मेहता के बारे में थोड़ा बहुत बता दिया जाए, जितनी जानकारी है। दरअसल मेहता पहले हरियाणा में हिंदुस्तान अखबार में पत्रकार थे। इसी दौरान चौटाला से नजदीकी बन गई। हरियाणा में बंसीलाल की सरकार जाने के बाद 1999 में जब ओमप्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री की गद्दी संभाली। पहले यह बंसीलाल से विद्रोह करने वाले या यूं कहें कि गद्दारी करने वाले की बदौलत मिली। पर जल्द ही चौटाला ने चुनाव करवाए और वर्ष 2000 में खुद के बूते हरियाणा की कमान संभाल ली। तभी मेहता पर चौटाला की कृपा दृष्टि हुई और उन्हें अतिरिक्त प्रेस सलाहकार की जिम्मेदारी दे दी। बस यहीं से मेहता की चल निकली। अब पता नहीं कब मेहता ने पानीपत के गाबा नामक व्यवसायी से ऐसे संपर्क स्थापित किए कि वे न्यूज चैनल निकालने पर राजी हो गए। तब हरियाणा में चौटाला की सरकार अपनी अंतिम सांसे गिन रही थी।

फरवरी 2005 में गाबा का चैनल टोटल टीवी के नाम से बाजार में आ गया। इस चैनल में एनसीआर की खबरें खूब प्रसारित होती थी। इस चैनल के माध्यम से विनोद मेहता ने खुद को हरियाणा की राजनीति के सबसे बड़े जानकार पत्रकार के तौर पर प्रचारित-प्रसारित किया। चुनावी सर्वेक्षण वे कराने लग गए। कुछ सही भी गए और कुछ गलत भी लेकिन इन सही की बदौलत मेहता की दुकानदारी चल निकली। कई साल तो सब कुछ ठीक ठाक चला। इस बीच खबर आई कि टोटल टीवी से मेहता की विदाई हो गई है। एक बार तो सुनकर बड़ा आश्चर्य भी हुआ। फिर उड़ते-उड़ते यह खबर आई कि चुनावों में विज्ञापन के पैसे का लेन-देन इस विदाई का कारण बना है। साथ ही प्रबंधन को पता चला कि टोटल में रहते हुए मेहता ने गोवा में होटल भी बना लिया है या फिर खरीद लिया है। अब बनाया या फिर खरीदा, यह बड़ा प्रश्न नहीं है, प्रश्न यह है कि गोवा में होटल है।

मेहता जब टोटल का चेहरा थे, तब यह बात हर किसी की जुबान पर थी कि टोटल टीवी में चौटाला का पैसा लगा है। हालांकि अधिकारिक तौर पर आज तक यह पुष्टि नहीं हो पाई है। मेहता टोटल से गए तो फिर ऐसे ही एक दिन हवा चली कि वे हरियाणा के कांग्रेस विधायक एवं विधानसभा के पूर्व स्पीकर डा. रघुबीर कादियान का चैनल संभालने जा रहे हैं। यह चैनल तो अभी तक आया नहीं है। लेकिन मेहता ने इसी दौरान पता नहीं किस तरह समस्त भारतीय पार्टी के कर्ता-धर्ता और दुबई के उद्योगपति सुदेश अग्रवाल को गुड़गांव से प्रसारित हो रहे चैनल खबरें अभी तक को चलाने के लिए राजी कर लिया। यह चैनल असल मे किसी एचपी यादव का है, जिनकी पालटैक नाम से कंपनी है। यादव से चैनल संभला नहीं, इसलिए वे किसी ऐसे शख्स की तलाश में थे जो चैनल को चला सके और इसके बदले उन्हें मोटी रकम मिल सके। अब पूरी डील क्या थी और कैसी हुई, यह तो यादव बता सकते हैं या फिर अग्रवाल। शायद मेहता की भूमिका इसमें रही।

बताते हैं कि अग्रवाल ने आगामी विधानसभा चुनाव तक इस चैनल को लीज पर लिया है। डील में कहीं न कहीं मेहता थे, इसलिए उन्हें चैनल की कमान मिलना लाजिमी था। कमान संभालते ही उन्होंने कमाल भी दिखाना शुरू कर दिया। टोटल की तरह ही यहां भी चुनाव सर्वेक्षण और कलाबाजी शुरू हो गई। कुछ माह तक तो सब यहां भी ठीक ठाक ही चला लेकिन हाल के दिनों में हालात कुछ ज्यादा ही खराब हो गए। एक बात तो यह निकलकर सामने आई है कि अग्रवाल इस बात से खफा थे कि चैनल में उनका और उनकी समस्त भारतीय पार्टी का जितना प्रचार होना चाहिए, उतना नहीं हो रहा। पर इसमें सच्चाई कम लगती है क्योंकि प्रचार तो बहुत हो रहा था, जितना होना नहीं चाहिए। यहां एक बात निकलकर सामने आई है कि मेहता ने टिकट मिलेगी ना दोबारा नाम से जो चुनावी कार्यक्रम शुरू किया था, वही उनकी विदाई का कारण बना। अब पूरी बात तो मेहता और अग्रवाल को ही पता होगी, लेकिन इतना तय है कि मेहता यहां से भी अपना बोरिया बिस्तर समेट कर नए आशियाने की तलाश में चले गए हैं। हो सकता है एक बार फिर उनका ठिकाना रघुबीर कादियान का ही चैनल हो, क्योंकि अब इसके आने की चर्चा जोरों पर हैं। यह आई विटनैस न्यूज के नाम से आएगा।

दीपक खोखर की रिपोर्ट.

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