लखनऊ। आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा शुरु से था। बिहार सरकार तो इस सम्मान को पहले ही गैर-सरकारी, अनाधिकृत और झुठा बता चूकी थी, और भोजपुरिया समाज की जनता का आक्रोश जिस कदर कल पटना, जमशेदपुर, सिवान और अन्य शहरों की सडकों पर दिखा, उसका परिणाम आज सबके सामने आ गया। अब इसे अपना सम्मान बचाने की कोशिश कहें, या कुछ और, लेकिन आज अवधी गायिका मालिनी अवस्थी ने भोजपुरी अकादमी के निवर्तमान अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर ब्रांड एम्बैस्डर बनने से इंकार कर दिया। मालिनी का वह पत्र जो मीडिया के पास उपलब्ध है, इस मुद्दे पर एक नया विवाद खडा करता है।
इस पत्र में भी मालिनी अवस्थी ने अपने आप को बिहार सरकार के भोजपुरी अकादमी का अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड एम्बैसडर घोषित करने के संबंध में बात की है, जबकि बिहार सरकार पिछले दो दिनों में दो बार यह साफ कर चूकी है कि बिहार सरकार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, और यह सम्मान सरकारी नहीं था। भोजपुरिया डॉट कॉम पर हमने पहले भी लिखा था, कि जिस सम्मान को वह लौटाने की बात कर रही हैं, वह फर्जी, और अवैध था। बिहार सरकार और भोजपुरी अकादमी के निदेशक यह पहले ही साफ कर चूके हैं कि सरकार ने इस तरह का कोई सम्मान नहीं दिया था, और रवि कांत दुबे को इस तरह का सम्मान देने का अधिकार तक नहीं था, लेकिन उन्होंने अपना नाम चमकाने और मालिनी जी को खुश करने हेतु यह तथाकथित "अनाधिकृत" सम्मान दिया था।
अपने पत्र में दर्जनों सम्मानों के नाम गिना रहीं मालिनी ने जिस कदर की गरिमा की बात की है, वह स्वयं उससे काफी दुर रही हैं। एक बॉलीवुड फिल्म में आइटम सांग गा चुकी मालिनी जिस मनोज तिवारी को पानी पी-पी कर पिछले कुछ दिनों से गरिया रही हैं, उनके साथ मंच साझा करने, और उनके गानों को गाने में इन्हें कभी कोई एतराज नहीं रहा है। बात अश्लीलता की हो रही हो, तो लगे हाथों यह बताना भी जरुरी होगा कि पिछले दिनों इंटरनेट पर इनकी एक तस्वीर आई थी, जिसमें मालिनी जी भोजपुरी गीतों में अश्लीलता के पर्याय कलुआ के साथ मंच साझा कर रही थीं।
रही बात मालिनी अवस्थी के भोजपुरी गीतों की, तो यहाँ यह साफ करना उचित होगा कि इनके जिन गीतों की वजह से इन्हें भोजपुरी में पहचान मिली है, उनमें से ज्यादातर गीत मनोज तिवारी (रेलिया बैरन पिया को लिये जाये रे…), बालेश्वर (नीक लागे टिकुलिया…) व शारदा सिन्हा के हैं, और इस सच्चाई को नहीं जान रहे कुछ लोग इसे मालिनी अवस्थी के गीत मान लेते हैं। मालिनी जी का भोजपुरी कला-जगत में काफी सम्मान है, लेकिन एक फर्जी सम्मान को लेकर जिस तरह की व्याकुलता इन्होंने दिखाई है, और जिस तरह ये भोजपुरी के दिग्गज कलाकारों (श्रीमती शारदा सिन्हा, श्री भरत शर्मा, श्री मनोज तिवारी आदि) के विरोध पर उतर आईं हैं, यह इनके जैसे कलाकार को शोभा नहीं देता।
मालिनी जी को चाहिये कि अनाधिकृत तौर पर उनको यह झुठा सम्मान देने की घोषणा कर के जिस तरह का भद्दा मजाक भोजपुरी अकदमी के निवर्तमान अध्यक्ष रविकांत दुबे ने उनके साथ किया है, उसके खिलाफ कारवाई करें, लेकिन इस तरह एक फर्जी/नकली सम्मान को ठुकरा कर खुद को त्याग की देवी के तौर पर प्रोजेक्ट करना उनको शोभा नहीं देता। यहाँ एक बात बताना जरुरी होगा कि भोजपुरिया समाज का विरोध रवि कांत दुबे के मनमाने फैसलों के खिलाफ था, ना कि एक लोक गायिका के खिलाफ। भोजपुरिया समाज में मालिनी जी का सम्मान एक गायिका के तौर पर था, है, और हमेशा रहेगा।
प्रवीण सिंह की रिपोर्ट.





