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फेसबुक ‘शार्ट मेमरी’ का मंच है

Girijesh Tiwari : प्रिय मित्र, आज जनविरोधी तन्त्र के दबाव और धन-पद-प्रतिष्ठा के लोभ के चकाचौंध में प्रिन्ट-मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के पूरी तरह बिक जाने और शासक वर्गों के प्रचार का मंच भर बन कर रह जाने की हालत में केवल पैरेलल मीडिया ही भारतीय जन के असली प्रतिनिधि के तौर पर हमारे पास अपनी अभिव्यक्ति का और सही तथ्यों एवं सच्ची सूचनाओं को लोगों तक पहुँचा पाने का एकमात्र मंच बचा है।

Girijesh Tiwari : प्रिय मित्र, आज जनविरोधी तन्त्र के दबाव और धन-पद-प्रतिष्ठा के लोभ के चकाचौंध में प्रिन्ट-मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के पूरी तरह बिक जाने और शासक वर्गों के प्रचार का मंच भर बन कर रह जाने की हालत में केवल पैरेलल मीडिया ही भारतीय जन के असली प्रतिनिधि के तौर पर हमारे पास अपनी अभिव्यक्ति का और सही तथ्यों एवं सच्ची सूचनाओं को लोगों तक पहुँचा पाने का एकमात्र मंच बचा है।

जन-समस्याओं के मुद्दों को उठाने, जन-जागरण करने और अपने प्रतिवाद को परस्पर एकजुट हो कर सशक्त स्वर देने में पिछले दिनों फेसबुक पर सक्रिय मित्रों की पहल को अभूतपूर्व सफलता मिली है। निर्मल बाबा जैसे ढोंगियों के पर्दाफाश से लेकर दिल्ली रेप काण्ड और कलमकार कँवल भारती की गिरफ़्तारी के विरोध तक के अनेक अभियानों में आप सब ने जो एकजुटता दिखायी है और उसका सत्ता-प्रतिष्ठान पर जो प्रभावकारी दबाव पड़ा है, उसने मुझे और हम सब के अनेक मित्रों को इस सार-संकलन तक पहुँचाया कि फेसबुक का प्रतिवाद के शस्त्र के रूप में और भी सशक्त तरीके से प्रयोग किया जा सकता है।

फेसबुक 'शार्ट मेमरी' का मंच है। इस पर सुबह का लिखा शाम तक बहुत पीछे छूट जाता है। कई बार तो हमें यह पता ही नहीं चल पाता कि किस मित्र ने कब कौन-सा महत्वपूर्ण लेख या कविता लिख दिया। कभी-कभी तो किसी न किसी दूसरे मित्र द्वारा शेयर किये जाने पर इक्का-दुक्का कुछ रचनाएँ ही हमारी जानकारी में आ पाती हैं। और तब हम सब के लिये केवल उन्हीं को लाइक, शेयर या कमेन्ट करना सम्भव हो पाता है। मुझे लगता है कि इस समस्या का समाधान हो सकता है। अगर हम सब के द्वारा मिल-जुल कर "प्रो-पीपल सॉलिडेरिटी फोरम अगेन्स्ट एक्स्प्लॉयटेशन, ऑप्रेसन ऐन्ड कम्यूनल हेट्रेड" के नाम से एक ब्लॉग जैसी जगह नेट पर बनायी जाये। उसमें आपकी रचना, लेख, महत्वपूर्ण स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक समाचारों और उनके विश्लेषणों के बारे में केवल एक इंट्रोडक्टरी पैराग्राफ और उसके लिंक दे दिये जायें। वहाँ किसी तरह की बहस के लिये स्थान न दिया जाये। उसमें सब से ऊपर केवल इतना लिख दिया जाये कि अगर आपको इनमें से कोई भी पोस्ट पसन्द आयी है, तो कृपया उसे शेयर करें और उस लिंक पर जाकर अथवा अपनी वाल पर उस पर टिप्पणी करें।

तो इस रूप में हमारे पास सन्दर्भ-सूची के रूप में ऑन-लाइन एक ऐसी जगह बन जायेगी, जहाँ हम-आप सभी अपनी-अपनी वाल, पेज या ब्लॉग पर अपनी पोस्ट लिखने के साथ ही अपनी पोस्ट्स के लिंक्स दे सकते हैं और हममें से जब भी जिसे भी समय मिले, वहाँ जाकर सभी मित्रों की पोस्ट्स के बारे में आसानी से जानकारी ले पा सकता है। सूचना-विस्फोट के आज के दौर में हम सब की समय की सीमाओं के चलते इस तरीके के माध्यम से हम में से अधिक से अधिक लोगों तक अधिक से अधिक जानकारी पहुँचायी जा सकेगी। और भविष्य में भी वहाँ उपलब्ध लिंक्स का हममें से किसी के द्वारा सन्दर्भ के लिये प्रयोग करना सुलभ और सहज होगा।

इस ब्लॉग का किसी एक को एडमिन बनाने के बजाय हम इसके पासवर्ड को कई विश्वसनीय मित्रों के बीच बिखेर देंगे, ताकि अधिकतम सम्भव जनवादी तरीके से इसका सञ्चालन किया जा सके। ऐसा कर देने से जहाँ एक ओर हममें से किसी के विरुद्ध किसी के भी परस्पर पूर्वाग्रह के चलते किसी की किसी भी पोस्ट के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं हो सकेगा, वहीं कोई भी अवांछित तत्व इस सन्दर्भ-स्थल तक पहुँच कर किसी तरह की कटुता का माहौल बना कर किसी तरह का व्यवधान पैदा नहीं कर सकेगा।

आज जब फासिज़्म एक बार फिर हमारा दरवाज़ा खटखटा रहा है, तो ऐसी भीषण परिस्थिति में देश के धूर्त शासक वर्गों के पतित सत्ता-तन्त्र की हर तरह की दुरभिसन्धि के विरुद्ध और भी धारदार प्रतिवाद और प्रतिरोध के लिये सभी जनपक्षधर मित्रों एवं अधिकतम साथियों की एकजुटता ही आज के इस कठिन दौर में हम सब के सामने इतिहास द्वारा प्रदान किया गया सबसे महत्वपूर्ण कार्यभार है। मुझे पूरी आशा है कि अगणित मुद्दों पर आपस के अधिकतम मतभेदों के बावज़ूद कम से कम इन तीन बिन्दुओं पर हम सब परस्पर सशक्त एकजुटता बनाने में अवश्य सफल होंगे। और मुझे तो यह भी विश्वास है कि एकजुटता के इस चरण की सफलता के बाद एक दिन आने वाला कल इस एकजुटता को अवश्य ही हम सब की युगपरिवर्तनकारी एकता में रूपान्तरित कर ले जायेगा।

इस सिलसिले में मुझे गत जुलाई में दिल्ली के कई मित्रों से मिलने और उनके साथ विस्तृत वार्ता के दौरान इन बिन्दुओं पर उन सब की सहमति मिल पाने का अवसर मिला था। व्यक्तिगत तौर पर आपके साथ आमने-सामने बैठ कर इस विषय पर चर्चा न कर पाने की अपनी सीमा के लिये मैं आपसे क्षमा-याचना करना चाहता हूँ। साथ ही इस उम्मीद के साथ यह सन्देश आप तक भेज रहा हूँ कि कृपया इस पर विचार करने का कष्ट करें। अगर आप इस प्रस्ताव में किसी तरह की त्रुटि महसूस करें, तो कृपया निःसंकोच अपने सुझाव एवं संशोधन इसके साथ जोड़ने का कष्ट करें। और अगर आपकी इस मुद्दे पर सहमति बनती है, तो कृपया अपना नाम इस प्रयास के साथ जोड़ने की मुझे अनुमति दें। ताकि सभी मित्रों के नाम से एक पोस्ट फेसबुक पर शेयर की जा सके। और फिर इस प्रयोग को आरम्भ किया जा सके। मैं विनम्रतापूर्वक आपका अभिवादन करता हूँ।

आभार-प्रकाश के साथ

आपका

गिरिजेश

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