Yogesh Kumar Sheetal :
पहले वे महुआ चैनल वालों के लिए आए
मैं कुछ नहीं बोला
क्योंकि मैं महुआ का रिपोर्टर नहीं था.
फिर वे दैनिक भास्कर वालों के लिए आए
मैं कुछ नहीं बोला
क्योंकि मैं भास्कर का डेस्क नहीं देखता था.
फिर वे दैनिक जागरण वालों के लिए आए
मैं कुछ नहीं बोला
क्योंकि मैं जागरण में नहीं काम करता था.
फिर वे आउटलुक ग्रुप के लिए आए
मैं कुछ नहीं बोला
क्योंकि मैं आउटलुक का कर्मचारी नहीं था.
फिर वे मेरे लिए आए
और मेरे लिए बोलनेवाला कोई नहीं था.
– मार्टिन नीमोलर (हिटलर के दौर का जर्मन कवि) की कविता को तोड़ा-मरोड़ा रूप
युवा व तेजतर्रार पत्रकार योगेश कुमार शीतल के एफबी वॉल से.





