Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

पंद्रह अगस्त का विज्ञापन पहली बार लघु एवं मध्यम अखबारों को नहीं मिले

: लघु एवं मध्यम मीडिया केन्द्र सरकार से नाराज : मीडिया की नाराजी भारी पड़ेगी कांग्रेस को :  नई दिल्ली। देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि स्वतंत्रता दिवस पर डीएवीपी के विज्ञापन लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को नहीं मिले। डीएवीपी अभी तक समाचार पत्र और पत्रिकाओं को जो पंजीयत होते थे। स्वतंत्रता एवं गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शन विज्ञापन जरूर करते थे। इस बार १५ अगस्त का विज्ञापन जारी नहीं करने से ही बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया मीडिया जगत में हुई।

: लघु एवं मध्यम मीडिया केन्द्र सरकार से नाराज : मीडिया की नाराजी भारी पड़ेगी कांग्रेस को :  नई दिल्ली। देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि स्वतंत्रता दिवस पर डीएवीपी के विज्ञापन लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को नहीं मिले। डीएवीपी अभी तक समाचार पत्र और पत्रिकाओं को जो पंजीयत होते थे। स्वतंत्रता एवं गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शन विज्ञापन जरूर करते थे। इस बार १५ अगस्त का विज्ञापन जारी नहीं करने से ही बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया मीडिया जगत में हुई।

लघु एवं मध्यम श्रेणी के समाचार पत्रों के साथ एन.डी.ए सरकार की तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री सुषमा स्वराज ने डीएवीपी से बाहर करने तथा नवीनीकरण में परेशान करने के कारण मीडिया में इस तरह का प्रभाव पड़ा कि फील गुड होते हुए भी अटल जी की सरकार को पराजय झेलना पड़ी।

उस समय भी सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों ने सुषमा स्वराज को गुमराह किया था। लोकसभा चुनाव के जब ६ माह शेष रह गए उसके पूर्व १५ अगस्त पर लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी न करके सूचना प्रसारण मंत्रालय ने सारे मीडिया को सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया है। लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के संचालकों के अनुसार डीएवीपी के कुछ अधिकारियों की मीडिया हाऊस की मिलीभगत से लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों का बजट सुनयोजित रूप से कारपोरेट मीडिया को ट्रांसफर कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। डीएवीपी में कारपोरेट मीडिया हाउस के दबाब में विगत १ वर्ष से निर्णय लेने के कारण केन्द्र सरकार का प्रचार प्रसार का खर्च केवल नगरीय क्षेत्रों तक सीमित होकर रह गया।

सरकार की उपलब्धियों और सूचनाओं को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार डीएवीपी भ्रष्टाचार में इस कदर डूबा है कि सरकार की छवि सुधारने की बात तो दूर, खुद सरकार की साख पर धब्बा बन गया है। ये भ्रष्ट अधिकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्री तक को गुमराह कर मीडिया को सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया है। यहां तक कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस का विज्ञापन भी कुछ समाचार पत्रों को देकर इति-श्री कर ली जबकि आजतक आजादी का यह विज्ञापन सभी समाचार पत्र-पत्रिकाओं को मिलता रहा है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों व उनके विभागों के विज्ञापन डीएवीपी द्वारा ही जारी किये जाते हैं तथा इन विज्ञापनों को जारी करने हेतु समाचार पत्रों को सूचीबद्ध किया जाता है।

डीएवीपी से सूचीबद्ध समाचार पत्रों को विभिन्न मंत्रालयों-विभागों के विज्ञापन आवश्यकता अनुसार दिए जाते हैं तथा राष्ट्रीय अवसरों- स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, महात्मा गांधी जयंती व अन्य राष्ट्रीय महापुरूषों/नेताओं के विशिष्ट विज्ञापन सभी समाचार पत्रों को दिए जाते हैं। मगर इस वर्ष डीएवीपी के भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने उच्चाधिकारियों को उल्टी-सीधी जानकारी देकर स्वतंत्रता दिवस के विज्ञापन को चंद कारपोरेट समाचारपत्रों में देकर इति-श्री कर ली यह अधिकारी इसे आर्थिक सुधार का कदम बता रहे हैं मगर सच्चाई तो यह है कि डीएवीपी के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की कारगुजारियों के कारण यह निदेशालय भ्रष्टाचार का बहुत बडा अड्डा बन गया है। यहां विज्ञापन देने वाले अधिकारी प्रतिमाह लाखों रूपये कमा रहे हैं और अपने चंद समय के कार्यकाल में करोडों की सम्पत्ति के मालिक बन गये हैं।

डीएवीपी की सूची में दर्ज सैकड़ों समाचार पत्रों को इस साल एक भी विज्ञापन जारी नहीं किया गया। जबकि सरकार की पॉलिसी में ५० फीसदी बजट का हिस्सा मध्यम एवं लघु समाचार पत्रों के लिए अनिवार्य है। आसन्न लोकसभा चुनाव में डीएवीपी तथा संचार मंत्री की यह बेरूखी के कारण कांग्रेस अभी तक का सबसे बड़ा नुकसान स्वंय उठाने जा रही है। (साभार- लोकतेज)

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...