भारतीय मीडिया इंडस्ट्री में इस समय अनेक जगह से छंटनी की खबरें आ रही हैं। पत्रकार और गैर पत्रकार काफी निराश हैं, दिल दुखी हैं, लाचार हैं क्योंकि सारे संगठन केवल कागजी हैं। मेरी अपील है सभी से निराश न हों, 1985 में बनी हिंदी फिल्म 'आखिर क्यों' का यह गाना जिसे मोहम्मद अजीज ने आवाज दी है, आपको जरूर संबल देगा..
एक अन्धेरा लाख सितारे, एक निराशा लाख सहारे
सबसे बड़ी सौगात हैं जीवन, नादाँ हैं जो जीवन से हारे
दुनियाँ की ये बगिया ऐसी जितने काँटे, फूल भी उतने
दामन में खुद आ जायेंगे, जिनकी तरफ तू हाथ पसारे
बीते हुए कल की खातिर, तू आनेवाला कल मत खोना
जाने कौन कहा से आ कर, राहे तेरी फिर से सवारे
दुःख से अगर पहचान न हो तो कैसा सुख कैसी खुशियाँ
तुफानो से लड़कर ही तो लगते हैं साहिल इतने प्यारे





