हितेन्द्र अनंत : शर्म मगर हमको नहीं आती…. शिकागो विश्वविद्यालय के "दक्षिण एशिया अध्ययन" विभाग की छात्रा रोज ने सीएनएन पर लिखी एक ब्लॉग में भारत यात्रा के अपने कड़वे अनुभव सार्वजनिक किये हैं। वे कहती हैं कि "भारत पर्यटकों के लिये स्वर्ग किंतु महिलाओं के लिये नर्क है"। पुरूषों का उन्हें लगातार घूरना, होटल के कर्मचारी द्वारा बलात्कार का प्रयास, बाजारों में, दुकानों में उनकी अनुमति के बिना तस्वीरें लेना, यहाँ तक कि एक बार उन्हें दिखाते हुए एक पुरूष द्वारा हस्तमैथुन करना यह सब उनके भारत यात्रा के कटु अनुभवों का हिस्सा है।
वैसे भारत में भारत की महिलाएँ ही कहाँ सुरक्षित हैं? पर हमें क्या, हमें अपनी पुण्य भूमि भारत के पुण्य स्मरण से फुरसत हो तो महिलाओं की सुरक्षा की सोचें! 'रोज' को इन अनुभवों के कारण कुछ कष्टदायी मानसिक रोगों का सामना करना पड़ रहा है। हमारे यहाँ तो महिलाओं का जीवन ही रोगों में कटता है…मानसिक और शारीरिक दोनों। ब्लॉग पढ़िये। ब्लॉग के नीचे दी गयी टिप्पणियों में कुछ सकारात्मक हैं…कुछ पश्चिमी देशों के नस्लवाद और वहाँ महिलाओं की असुरक्षा के संबंध में भी हैं। लेकिन उन सब से हमारे दाग धुल नहीं जाते… क्या कहूँ? गर्व है मुझे भारतीय होने पर? कैसे कहूँ? आप कैसे कह लेते हैं?
http://ireport.cnn.com/docs/DOC-1023053
हितेंद्र अनंत के फेसबुक वॉल से.





