वर्धा : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के लगभग पचास बुद्धिजीवियों ने महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अग्रणी और मराठी साप्ताहिक ‘साधना’ के संपादक डॉ.नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या का निषेध किया है और विवेकवादी आंदोलन के प्रति सहभागिता प्रदर्शित की है। इन बुद्धिजीवियों जारी हस्ताक्षरित वक्तव्य में कहा गया है कि डॉ.दाभोलकर की साजिशाना हत्या से जाहि़र होता है कि देश में अंधश्रद्धा, धर्मांधता, अंधराष्ट्रवाद, सांप्रदायिक राष्ट्रवाद और अंधअर्थवाद का खतरनाक गठजोड़ कायम हो रहा है।
निहित स्वार्थी तत्व विवेकवादी आवाजों को दबाने में तत्पर हैं। इसके खिलाफ कानून को अपना कर्तव्य तत्तरता से अंजाम देना चाहिए तभी अंधश्रद्धामूलक और धर्मांध शक्तियों को रोका जा सकेगा। वक्तव्य में यह भी कहा गया है कि इन ताकतों के खिलाफ राजसत्ता लगभग निष्किय है जो भावी पीढि़यों को अघोषित मानसिक दासता की गिरफ़्त में लेना चाहती हैं। डॉ.दाभोलकर की शहादत विवेकवादी आंदोलन को तेज करने का संदेश दे रही है। हम इस संदेश के सहभागी हैं।
वक्तव्य पर विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय, चार प्रख्यात आवासीय लेखकों दूधनाथ सिंह, ऋतुराज, विनोद कुमार शुक्ल और संजीव के अलावा प्रो.मनोज कुमार, प्रो.रामशरण जोशी, प्रो.सूरज पालीवाल, प्रो.के.के.सिंह, प्रो.सुरेश शर्मा, प्रो.वासंती रमण, प्रकाश चन्द्रायन, डॉ.फरहद मलिक, डॉ.एम.एम.मंगोड़ी, डॉ.जयप्रकाश ‘धूमकेतु’, डॉ.ओ.पी.भारती, अशोक मिश्र, डॉ.रवीन्द्र बोरकर, अमित राय, संदीप सपकाळे, सुप्रिया पाठक, डॉ.सुरजीत कु.सिंह, डॉ.राजीव रंजन राय, डॉ.सतीश पावड़े, राकेश श्रीमाल, डॉ.अमित विश्वास, डॉ.सत्यम सिंह, डॉ.रयाज हसन, हरप्रीत कौर, अनामी शरण बबल सहित पचास बुद्धिजीवियों के हस्ताक्षर हैं।





