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भगोड़े आईएएस को दंडित करने की संजय शर्मा की मुहिम को पत्रकारों का समर्थन

सूर्य प्रताप सिंह के मामले में वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा की इस पहल को लेकर मीडिया में कुछ धड़े बंदी रही। देश के जाने माने पत्रकारों ने इस मामले को उठाने पर श्री शर्मा को जहां बधाई दी वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो सूर्य प्रताप सिंह के पास जाकर उन्हें अपना समर्थन देकर श्री शर्मा के बारे में तरह-तरह की कहानियां बता रहे थे। 

सूर्य प्रताप सिंह के मामले में वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा की इस पहल को लेकर मीडिया में कुछ धड़े बंदी रही। देश के जाने माने पत्रकारों ने इस मामले को उठाने पर श्री शर्मा को जहां बधाई दी वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो सूर्य प्रताप सिंह के पास जाकर उन्हें अपना समर्थन देकर श्री शर्मा के बारे में तरह-तरह की कहानियां बता रहे थे। 

देश की सबसे बड़ी मीडिया की वेबसाइट भड़ास4मीडिया ने अपनी वेबसाइट पर न सिर्फ इस मामले की खबरें प्रकाशित की बल्कि इस साइट के संस्थापक यशवंत सिंह ने वीकएंड टाइम्स की इस मुहिम को अपना जबरदस्त समर्थन दिया। श्री यशवंत सिंह ने कहा कि इस तरह गायब अफसरों का मुद्दा जिस तरह वीकएंड टाइम्स ने उठाया है वह सराहनीय है और एलआईयू के अफसर जिस तरह श्री शर्मा को धमकाने के लिए पड़ताल कर रहे हैं वह निन्दनीय है। अगर भविष्य में सरकार ने सोचा कि वह किसी प्रकार का उत्पीडऩ कर सकती है तो दिल्ली में पत्रकारों का एक बड़ा आन्दोलन खड़ा किया जायेगा।

राज्य सभा टीवी चैनल में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने श्री शर्मा को लिखा कि वह जरा भी चिंता न करें सब लोग उनके साथ हैं। सत्ता में लोगों का आना जाना पानी के बुलबुलों की तरह लगा रहता है। जो धारा के खिलाफ होते हैं उनका ही इतिहास लिखा जाता है।

आईबीएन 7 के ब्यूरोचीफ शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि हम सब श्री शर्मा के साथ हमेशा खड़े हैं। उन्होंने जो मुद्दा उठाया है वह सराहनीय है। हस्तक्षेप डाट काम के संपादक अमलेन्दु उपाध्याय ने कहा कि इन सूर्य का प्रताप बदायूं में भी बुझा-बुझा था और अब फिर बुझेगा। देश भर में अपनी बेबाक छवि के कारण चर्चित हुए पत्रकार मयंक सक्सेना ने कहा कि न्यायपालिका के इस तरह के फैसलों पर भी सवाल उठाना शुरू करें क्योंकि यह हम सब का संवैधानिक अधिकार है।

मुंबई के जाने माने विचारकर संदीप वर्मा ने श्री सिंह आर्ट ऑफ लिविंग के नेटवर्क पर कमेंट करते हुए कहा कि जिस तरह पहले यह काम चंद्रा स्वामी करते थे वही काम अब आर्ट ऑफ लिविंग में हो रहा है। ईटीवी ने भी इस मामले में खबरें दिखाई तो पी7 के ब्यूरो चीफ ज्ञानेन्द्र शुक्ला खबरों के साथ-साथ संजय शर्मा के साथ भी खुलकर सामने आये। लखनऊ के अधिवक्ता और मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे पवन उपाध्याय ने इस पहल की जबरदस्त सराहना की।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार मनोज तिवारी ने कहा कि इस मामले में उद्योग बन्धु से जारी हुई प्रेस विज्ञप्ति अदालत की अवमानना है। अदालती आदेश पर टिप्पणी हो सकती है उसकी शब्दावली में हेराफेरी अपराध है। पत्रकार अनिल सिंह ने उन पत्रकारों पर कमेंट किया जो सूर्य प्रताप सिंह के दरबार में हाजिरी लगा रहे थे और कहा कि अब चालबाज ही सफल पत्रकार होने लगे हैं।

पत्रकार प्रमोद श्रीवास्तव, वेद भानु आर्य, अम्रतांशु मिश्र, अरविंद विद्रोही, मो. ताहिर खान जैसे दर्जनों पत्रकारों ने श्री शर्मा को इस पहल के लिए बधाई दी। वरिष्ठ पत्रकार अम्बरीश कुमार ने भी श्री शर्मा को बधाई दी। दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह ने भी इस मामले में श्री शर्मा की सराहना की। समाचार प्लस चैनल ने तो इस मामले में और बड़ा काम किया। चौनल ने पूरे एक घंटे सूर्य प्रताप सिंह के गायब रहने पर एक परिचर्चा आयोजित की जिसमें प्रदेश सरकार के मंत्री समेत विभिन्न राजनैतिक पार्टी के लोग शामिल थे। चौनल के संपादक अतुल अग्रवाल और अमिताभ अग्निहोत्री ने भी श्री शर्मा को समर्थन दिया। नवभारत टाइम्स ने भी गायब अफसरों पर पांच कॉलम की खबर छापी।

मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के सचिव सिद्घार्थ कलहंस ने भी कहा कि श्री शर्मा द्वारा निकाला जा रहा वीकएंड टाइम्स अखबार प्रदेश का सबसे ज्यादा प्रसारित होने वाला ऐसा अखबार है जिसकी हर खबर पर प्रमाणिकता की मोहर लगी होती है। पीटीआई के अभिनव ने कहा कि संजय शर्मा जिस ईमानदारी के साथ अखबार निकालते हैं उसकी मिसाल लखनऊ में नही मिल सकती। मेन लाइन स्ट्रीम की मीडिया से जुड़े ईमानदार छवि के पत्रकार जहां इस मुहिम को समर्थन दे रहे थे वहीं कुछ पत्रकार सूर्य प्रताप सिंह के दरबार में इसलिए भी हाजिरी दे रहे थे कि उन्हें कुछ विज्ञापन या ‘कुछ और’ मिल जाये।

यही नहीं एक अखबार तो चमचागिरी में इतना आगे बढ़ गया कि उसने लिख मारा कि नौ साल से स्टडी लीव पर गये ईमानदार छवि के इस अफसर के खिलाफ कुछ याचक वीर पैदा हो गये हैं। सामान्य जनमानस ने इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई और कहा गया कि इन मूर्ख पत्रकार को यह भी नहीं पता कि स्टडी लीव एक साल की होती है नौ साल की नहीं। अगर यह नियम अंग्रेजी में है तो अच्छा होता कि यह पत्रकार उसे किसी से पढ़वा लेते वैसे भी यह अखबार पेड न्यूज छापने और सरकार से दलाली के कामों में मशहूर है।

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