ये एक युवा का पत्र है जो इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है. उसने बीबीसी के डीजी यानि डायरेक्टर जनरल को एक पत्र लिखा है. इसमें उसने बताया है कि बीबीसी हिंदी को सुनना उसके परिवार का एक रुटीन है और वह इस रेडियो सर्विस का तीसरी पीढ़ी का श्रोता है.
बिहार के बक्सर जिले के आशुतोष ने अपने पत्र में लिखा है कि अगर वाकई रामदत्त त्रिपाठी, मणिकांत ठाकुर व उमर फारुख बीबीसी हिंदी से हट गए हैं तो समझिए बीबीसी हिंदी एक तरह से बंद हो गया क्योंकि इनके बगैर बीबीसी हिंदी की कल्पना नहीं की जा सकती. पूरा पत्र यूं है…

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