विभांशु दिव्याल : बनारस के ओजस्वी और तेजस्वी किंग साइज़ पत्रकारों का यही हाल रहा तो पत्रकारों की अगली पीढ़ी नपुंसक ही पैदा होगी, वो सिर्फ तेल लगाने का काम करेगी। शहर में आप कहीं भी बीएचयू के कुलपति का पुतला फूंक दीजिये, कोई खबर नहीं बनेगी। आसाराम बापू के साथ उमा भारती का पुतला फूंक दीजिये, कैमरों के शटर अपने आप बंद हो जायेंगे। लेकिन तीज के नाम पर आधुनिक नारियों का समूह कहीं कमर मटका दे तो क़यामत हो जाती है। जगह की समस्या का रोना रोकर ख़बरों पर कैंची चलाने वाले पूरे पेज को फोटो एल्बम बना देंगे।
राष्ट्रीय ध्वज को उल्टा फहराए जाने के बाद बीएचयू के कुलपति छात्रों के निशाने पर हैं लेकिन छात्रों का आक्रोश खबर की श्रेणी में नहीं आ रहा है। कुछ दिन पहले बीएचयू में वित्तीय अनियमितता की खबर एक समाचार पत्र में छपी थी। खबर छपने के अगले दिन बीएचयू प्रशासन ने सम्बंधित समाचार पत्र को भेजे पत्र में लिखा कि "इस तरह की ख़बरों को छापने से पूर्व बीएचयू प्रशासन से भी बात की जानी चाहिए ताकि आपके संस्थान और बीएचयू के बीच 'व्यवसायिक और व्यक्तिगत' संबंध भविष्य में भी बने रहें।" अब राष्ट्रीय ध्वज का अपमान हो या "पापू" व्यभिचार करें, हम तो गांधी जी के बंदर हैं: बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो..
युवा पत्रकार विभांशु दिव्याल के फेसबुक वॉल से.






