Giriraj Kishore : पत्रकार महिला के साथ बलात्कार हुआ। मुंबई पुलिस ने पांचों बलात्कारियों को गिरफ़्तार भी कर लिया लेकिन मैंने अखबारों में पढ़ा उस बहादु महिला ने कहा है कि दुर्घटना का मतलब यह नहीं कि हम घर पर बैठ जाएं, मैं जल्दी से जल्दी काम पर लौटना चाहती हूं। इस जज़्बे को सलाम। अब समाज को सोच बदलना चाहिए।
कोई भी दुर्घटना ऐसी नहीं जो इंसान को उसके कर्तव्य से विमुख कर सके। महिलाओं के संदर्भ में सोच बदलना ज़रूरी है। समाज जिस तरह हिंसक बन रहा है उसकी इस प्रवृत्ति का इसी का सामना इस जज़्बे के साथ करना होगा। पुरुष समाज उसे तरह य और निषेधों के साथ कमज़ोर बनाता है। अगर वह ऐसा करता है तो उसे ही इस हिंसक मासिकता को दफ्न करना होगा।
वरिष्ठ साहित्यकार गिरिराज किशोर के फेसबुक वॉल से.





