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पत्रकार ने खुद की पैरवी और विजयश्री हासिल की, जज ने डीपीआरओ को दोषी माना, सौ रुपये जुर्माना

: पत्रकार प्रेस का मान्यता से सम्बंधित फार्म देरी से भेजना जिला लोक संपर्क अधिकारी पर पड़ा भारी : हरियाणा प्रदेश का इस तरह का पहला मामला, पत्रकार ने खुद की अपने केस की पैरवी : अदालत ने पत्रकार को 100 रुपये हर्जाना अदा करने के आदेश दिए  :

: पत्रकार प्रेस का मान्यता से सम्बंधित फार्म देरी से भेजना जिला लोक संपर्क अधिकारी पर पड़ा भारी : हरियाणा प्रदेश का इस तरह का पहला मामला, पत्रकार ने खुद की अपने केस की पैरवी : अदालत ने पत्रकार को 100 रुपये हर्जाना अदा करने के आदेश दिए  :

हिसार। एक पत्रकार का प्रेस मान्यता से सम्बंधित आवेदन फार्म मुख्यालय में न भेजना हिसार की तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मलिक के लिए भारी पड़ गया। पत्रकार द्वारा दायर एक मामले में अदालत ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उनका प्रेस मान्यता से सम्बंधित आवेदन फार्म मुख्यालय में देरी से भेजने के लिए सम्बंधित पत्रकार को हुई मनसिक परेशानी के लिए तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मालिक को दोषी करार दिया एवं हर्जाने के तौर पर को सौ रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं।

पत्रकार ने स्थानीय अदालत में दायर मामले में आरोपी अधिकारी पर सांकेतिक सौ रुपये जुर्माना लगाने के लिए ही गुजारिश की थी। उल्लेखनीय है की हिसार टुडे के संपादक एवं आरटीआइ कार्यकर्ता महेश मेहता ने करीब दो साल पहले इस संदर्भ में अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जिसमे कहा गया था की उपरोक्त अधिकारी ,कार्यालय हिसार के कर्मचारी राजकुमार एवं अतिरिक्त निदेशक (प्रेस) के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण उसको मान्यता कार्ड मिलने में करीब दो साल की देरी हो गयी। जिसके लिए उपरोक्त तीनों जिम्मेवार हैं। इस मामले में खास बात ये रही की पत्रकार महेश मेहता ने अपने केस की पैरवी खुद की तथा सभी गवाहों का क्रोस एग्जामिनेशन भी खुद किया। हालांकि ये काम काफी कठिन था पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पत्रकार ने कानून की कोई ओपचारिक शिक्षा लिए बिना मामले को अंजाम तक पहुँचाया।

करीब दो साल तक चले अभियोग के दौरान पत्रकार महेश मेहता ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए अदालत के समक्ष ऐसे पुख्ता दस्तावेजी सबूत पेश किये जिनके आधार पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि दोषी तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मलिक ने जानबुझ कर उनका प्रेस मान्यता से सम्बंधित आवेदन फार्म मुख्यालय में देरी से भेजा। इस सन्दर्भ में उन्होंने खुफिया कैमरे से की गयी विडियो रिकॉर्डिंग अदालत के समक्ष पेश की। विडियो रिकॉर्डिंग में परमजीत मालिक द्वारा महेश मेहता से किया गया दुर्व्यवहार साफ तौर पर प्रमाणित होता है। पत्रकार ने अदालत को मान्यता से सम्बंधित आवेदन फार्म के साथ सभी वांछित  दस्तावेज लगा कर तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मालिक के कार्यालय में जमा करवाए थे पर उन्होंने रंजिश वश उनके फार्म मुख्यालय में देरी से भेजे साथ ही मानसिक प्रताडऩा के मकसद से ऐसे आब्जेक्शन लगाती रही ताकि उसे प्रेस मान्यता कार्ड न मिले। अंत: 6 फरवरी 2012 को पत्रकार महेश मेहता ने पुन: अपने फार्म से सम्बंधित सभी दस्तावेज तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मलिक के कार्यालय में जमा कराये पर इसके बावजूद भी उनको करीब 9 माह बाद 22 नवम्बर 2012 को प्रेस मान्यता कार्ड प्राप्त हुआ।

सिविल जज श्री अरविन्द कुमार की अदालत द्वारा दिए गए फैसले में कहा गया है कि तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मलिक यदि चाहती तो ये देरी न होती और पत्रकार महेश मेहता को मान्यता कार्ड समय पर न मिलना तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मलिक द्वारा की गयी इसी देरी का नतीजा है। लिहाजा अदालत तत्कालीन जिला लोक संपर्क अधिकारी परमजीत मलिक को आदेश देती है कि वो पत्रकार महेश मेहता को 100 रुपये बतौर कंपनसेशन अदा करे।

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