जन्माष्टमी के मौके पर पंडित छन्नूलाल मिश्रा की आवाज में एक शानदार भजन.. नंद घर बाजे … बाजे बधइया..
नंद घर बाजे .. बाजे बधइया… (पंडित छन्नूलाल मिश्रा)
खेलें मसाने में होरी… पीटें प्रेत थपोरी…
मैंने पत्थर से जिनको बनाया सनम, वो खुदा हो गए देखते देखते…
रेलिया बैरन पिया को लिये जाये रे…
लता और जगजीत की आवाज में दो ग़ज़लें
तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है..
बीत गये दिन भजन बिना रे…
रहिए अब ऐसी जगह चलकर जहां कोई न हो…
वो इश्क जो हमसे रुठ गया…
हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है….
हमारी मय्यत पर तुम जो आना तो चार आंसू बहा के जाना…
थोड़ी सी पी शराब, थोड़ी उछाल दी…





