नई दिल्ली । आठ दिन पहले की बात है। 24 अगस्त को दी इंडियन एक्सप्रेस में एक समाचार प्रकाशित हुआ। इसके मुताबिक एनडीएमसी ने 1500 डिफाल्टर्स उन सांसदों की सूची वेबसाइट पर जारी की है, जिन्होंने बिजली और पानी का बकाया बिल अदा नहीं किया है। इस सूची में मौजूदा सांसद, पूर्व सांसद और उन सांसदों के नाम भी शामिल थे, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। 126 पेज की इस सूची में कुल मिलाकर यह संख्या 1714 बनती है। इस सूची में राजनाथ सिंह, अंबिका सोनी, अजीत सिंह, लालू प्रसाद यादव, रेणुका चैधरी, मधु कोड़ा और दिवंगत सांसद माधव राव सिंधिया, राजेश पायलट और सुनील दत्त के नाम भी शामिल थे।
हरियाणा के संदर्भ में बात की जाए तो इसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके लाडले यानि सांसद दीपेंद्र हुड्डा, जिसे लोग प्यार से दीपू कहते हैं, का भी नाम है। सूची में 234 नंबर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तरफ 6 हजार 761 रूपए 69 पैसे बिजली बिल के बकाया दर्शाए गए हैं और जो पता दर्शाया गया है, वह 60 साउथ एवेन्यू का है। इसका मतलब जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा सांसद थे, जब वे इस फ्लैट में रहे होंगे। शायद बिजली बिल भरना भूल गए और फिर जान बूझकर नहीं भरा या उन्हें बिल मिला ही नहीं होगा।
अब बात की जाए छोटे हुड्डा साहिब उर्फ युवराज, उर्फ दीपेंद्र उर्फ दीपू की। एनडीएमसी की सूची में उनका जिक्र 354 नंबर पर भी है और 355 नंबर पर भी। एक में नाम के साथ हुड्डा और एक में नहीं। 354 नंबर पर उनका पता 9 पंडित पंत मार्ग दर्शाया गया है, जो पिछले कई साल से हरियाणा की सत्ता का केंद्र बना हुआ है। दीपू और उनके पिता भूपी उर्फ भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसी बंगले पर रहते हैं। दीपू भी पिता की तरह ही बिजली का बिल भरने में संकोच कर गए। एनडीएमसी उनके एक हजार 30 रूपए 51 पैसे मांग रहा है। इसके पहले दीपू ने 189, साउथ एवेन्यू के फ्लैट में रहते हुए बिजली बिल के 17 हजार 461 रूपए 47 पैसे और पानी के 727 रूपए 82 पैसे नहीं भरे। कुल मिलाकर यह राशि इस फ्लैट की 18 हजार 189 रूपए 29 पैसे है।
यह खबर 24 अगस्त को छपते ही एनडीएमसी ने कमाल कर दिया। एनडीएमसी ने उसी दिन डिफाल्टर्स सांसदों की नई सूची वेबसाइट डाल दी। अब नई सूची में संख्या करीब 450 के आसपास ही रह गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री के लिए राहत की बात है कि अब उनका या उनके सांसद पुत्र का नाम कहीं पर भी नई सूची में नहीं है। पुरानी सूची को पूरी तरह से हटा दिया गया है। अब एकाएक खबर प्रकाशित होने के बाद सूची का बदलना किसलिए जरूरी था। हो सकता है उसी दिन सभी डिफाल्टर्स सांसदों ने बकाया राशि का भुगतान कर दिया या फिर एनडीएमसी को अपनी गलती का अहसास हो गया। अब सही तरह से तो एनडीएमसी के अधिकारी ही बता सकते हैं।
पुरानी सूची है मेरे पास उपलब्ध
इंडियन एक्सप्रेस में 1500 डिफाल्टर्स सांसदों की खबर आने के बाद मैंने उसी दिन एनडीएमसी की साइट चेक की थी, जिसमें वह सूची थी। उसी दिन यह सूची डाउनलोड कर ली। आज एक सितंबर रविवार के दिन मित्रों की एक मंडली में बैठा हुआ था। इंडियन एक्सप्रेस की खबर का जिक्र चल पड़ा। वहीं बैठे-बैठे मित्र के कंप्यूटर पर एनडीएमसी की वेबसाइट चेक की पुरानी सूची मिली ही नहीं। उसी जगह नई सूची थी। पता चला कि एनडीएमसी ने जिस दिन 24 अगस्त को खबर छपी, शायद उसी दिन नई सूची डाल दी। शुक्र है मैने वह सूची उसी दिन डाउनलोड कर ली थी।
युवा पत्रकार दीपक खोखर की रिपोर्ट. संपर्क: 09991680040