Sanjay Tiwari : विस्फोट.कॉम आनलाइन दुनिया में लौट आया है, बहुत सारा सबक सीखते हुए। इस बीच मेरी आंख में दो बार आंसू आये। एक बार तब जब मैंने अपने आपको छोटी सी रकम के लिए असहाय महसूस किया था और दूसरी बार तब जब एक ऐसे मित्र ने मदद की पेशकश की जिन्हें खुद बहुत मदद की दरकार है। चिंता मत करो दोस्त। अब संजय तिवारी तीसरी बार शायद कभी नहीं रोयेगा। (विस्फोट के संस्थापक और संपादक संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.)
S.a. Asthana : विस्फोट के बहाने एक सच्चाई —– शर्म नहीं आ रही है इन अखबारी चोरो को … पत्रकारिता का वह चाहे प्रिंट मीडिया हो , एलेत्रोनिक मीडिया हो या फिर न्यू मीडिया का क्षेत्र कोई भी हो ! हमें शर्म आनी चाहिए की संजय तिवारी नाम का एक इमानदार पत्रकार सार्वजनिक स्थान पर बता रहा है की केवल दस हज़ार रूपये के लिए विस्फोट जैसा चर्चित पोर्टल बंद हो गया है लेकिन हमें शर्म की अनुभूती नहीं हो रही है ! जबकि यह कड़वा सच है की देश के सबसे चर्चित पोर्टल विस्फोट डॉट कॉम एवं भड़ासफॉर मीडिया की खबरों से ही देश में ना जाने कितने अखबारों – पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है ! बावजूद , इसके इन अखबारी लुच्चो को शर्म नहीं आ रही है की – जिस विस्फोट , भड़ास से इनका धंधा चल रहा है उसके किसी मुसीबत में खडा होना इनकी नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है ! फिलहाल तो मै लखनऊ की ही बात करू तो देखता हु की यहाँ के तीन – तीन अखबारों का प्रकाशन भड़ास , विस्फोट और हस्तक्षेप के कारण ही सभव हो पा रहा है ! बहरहाल विस्फोट बंद होने से रहा आज नहीं तो कल फिर से विस्फोट आप के समक्ष होगा लेकिन सवाल तो यहाँ यह है की — आखिर क्या है हमारी नैतिकता , प्रतिबद्धता ? (लेखक और पत्रकार एसए अस्थाना के फेसबुक वॉल से.)
