राज्यसभा टीवी में बहाली की प्रक्रिया को लेकर ब्राडकास्टिंग इंजीनियरिंग कंसल्टेंट इंडिया लिमिटेड, बेसिल पर उंगलियां उठने लगी है। बेसिल ने राज्यसभा टीवी के लिए कांट्रैक्ट के आधार पर बहाली के लिए अपने बेवसाइट पर सितंबर 2012 के अंतिम सप्ताह में विज्ञापन जारी किया था। बेवसाइट से अनभिज्ञ लोगों को तो इसकी भनक तक नहीं लगी। कुछ ही लोग जान पाये और जिन लोगों ने आवेदन किया उनमें अधिसंख्य को निराशा ही हाथ लगी।
दो सौ रूपये के बैंक ड्राफ्ट के साथ आवेदन भेजने की अंतिम तारीख 12 अक्तूबर, 2012 रखी गयी थी। 22 पदों के लिए कुल 61 लोंगों की नियुक्ति का प्रस्ताव था। इनमें सीनियर असिस्टेंट एडीटर, सीनियर प्रोडयूसर, सीनियर पैनल प्रोडयूसर, करसपोंडेट, पैनल प्रोडयूसर, सीनियर रिपोर्टर, रिपोट्रर, जूनियर रिपोर्टर, सीनियर रिसर्चर, रिसर्चर, सीनियर ग्राफिक्स आर्टिस्ट, सीनियर ऐंकर, कंसल्टेंट एंकर,, ऐंकर, जूनियर ऐंकर, कंसल्टेंट इनपूट, सीनियर कैमरामैन, कैमरा पर्सन, वीडियो एडीटर, गेस्ट कोर्डिनेटर और फ्रंट आफिस एक्जक्यूटिव के पद थे।
पत्रकारिता से जुड़े और लंबे अनुभव वाले लोगों को तब हैरानी हुई जब बेसिल ने इंटरव्यू के लिए जून, 2013 में बुलाया। वह भी बिना टीए के। इन पदों के वेतन कोई कमजोर नहीं बल्कि 20 हजार से लेकर एक लाख रुपये मासिक था। किसी पद के लिए कोई उम्र सीमा नहीं थी। बस अनुभव और योग्यता ही मानदंड था। चुने गये लोगों को कई राज्यों में पदस्थापित किया जाना था। कंसल्टेंट इनपुट और विभिन्न रैंक के रिपोर्टरों की संख्या अधिक भी नहीं थी।
चयन समिति में ऐसे कनीय पत्रकारबंधु भी थे जो राज्यसभा टीवी से उपकृत रहे और पेशे में अपने से सीनियर का इंटरव्यू ले रहे थे। कंसल्टेंट इनपुट पद के लिए कई वरीयतम पत्रकार भी आये थे। बहरहाल नतीजा क्या आया किसी को अब तक पता नहीं है लेकिन दिल्ली के राजनीतिक गलियारे और मीडिया में सर्किल में चली चर्चाओं के अनुसार सब पहले से ही सेट था इंटरव्यू तो बस खानापूर्ति थी। इस बाबत पत्रकारों ने राज्यसभा के सभापति, सूचना एवं प्रसारण मंत्री के साथ-साथ दर्जनों सांसदों को ज्ञापन भेज कर कथित इंटरव्यू की उच्चस्तरीय जांच और चयनित लोगों का नाम सार्वजनिक करने की मांग की है। देखा जाये असलियत क्या है।





