लखनऊ : आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा ज्योतिषियों और बाबाओं के लिए सरकारी नियंत्रक संस्था बनाए जाने के लिए दायर पीआईएल की कई बातों से सहमत होते हुए भी इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि वे इस सम्बन्ध में निर्देश पारित नहीं कर सकते. जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस डी के उपाध्याय की बेंच ने कहा कि वर्तमान में भी गलत लोगों पर कार्यवाही किये जाने हेतु औषधि और जादुई उपचार अधिनियम जैसे कानूनी प्रावधान हैं लेकिन इसके आगे इन गतिविधियों को नियंत्रित करने हेतु आदेश करने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं है, भले ही इसकी कितनी भी आवश्यकता हो, क्योंकि यह विधायिका का कार्यक्षेत्र है.
याचिका के अनुसार भारत में काफी बड़ी संख्या में ज्योतिषि और बाबा हैं जिनका लोगों, खास कर गरीब और अशिक्षित आबादी, पर पर्याप्त प्रभाव है. इनमे से ज्यादातर लोग अपनी सेवाओं के बदले लोगों से विभिन्न रूपों में धन प्राप्त करते हैं. अतः अमिताभ और नूतन ने आम आदमी के हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर ज्योतिषियों, बाबाओं आदि के लिए पूरी तरह उन्ही लोगों के बीच से सदस्य रख व्यावसायिक संस्थाएँ बनाए जाने की मांग की थी.





