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दिल्ली

इस बार केजरीवाल और ‘आप’ को क्यों वोट दे देना चाहिए, यशवंत के कुछ फेसबुकिया तर्क-वितर्क

Yashwant Singh : दिल्ली पढ़े लिखों की महानगरी है. इस प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा का शासन रहा है. दोनों दलों के ज्यादातर लोकल और नेशनल नेता करप्ट हैं. ऐसे में तीसरी पार्टी को मौका मिलना चाहिए. आम आदमी पार्टी को एक चांस देना मांगता है. मैंने दिल्ली में वोटर आईडी कार्ड बनवा लिया है. मेरा वोट तो 'आप' को. लेकिन आपका वोट कहीं कांग्रेस या भाजपा के पाले में न चला जाए, इसका जरूर ध्यान रखिएगा.

Yashwant Singh : दिल्ली पढ़े लिखों की महानगरी है. इस प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा का शासन रहा है. दोनों दलों के ज्यादातर लोकल और नेशनल नेता करप्ट हैं. ऐसे में तीसरी पार्टी को मौका मिलना चाहिए. आम आदमी पार्टी को एक चांस देना मांगता है. मैंने दिल्ली में वोटर आईडी कार्ड बनवा लिया है. मेरा वोट तो 'आप' को. लेकिन आपका वोट कहीं कांग्रेस या भाजपा के पाले में न चला जाए, इसका जरूर ध्यान रखिएगा.

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जब नया पानी आना बंद हो जाता है तो पुराना पानी सड़ जाता है. वही हाल बीजेपी और कांग्रेस का है. इन पार्टियों में नेता वही बनता है जो धनपशु हो या बाहुबली हो या नौकरशाह हो या राजा-महाराजा रहा हो. हमारे आपके घरों के सीधे-शरीफ लड़कों को राजनीति करने की इजाजत ये पार्टियां नहीं देतीं. अगर इजाजत देती भी हैं तो सिर्फ कार्यकर्ता लेवल तक काम करने का या फिर नेता बना भी दिया तो टिकट कतई नहीं देतीं क्योंकि वहां कई और समीकरण देखे जाते हैं. आम आदमी पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो हवा का ताजा झोंका है. इसमें हमारे आपके घरों के लड़के नेता बनते, चुनाव लड़ते दिखेंगे. हम राजनीति और सिस्टम को तो कोसते हैं लेकिन वोट देने के नाम पर उन्हीं भ्रष्टों को चुनते हैं जो सदा से भ्रष्टाचार करते आए हैं.. इसलिए अबकी यंग एग्रीमैन अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, संजय सिंह जैसों को जिताइए जिनका चुनाव निशान झाड़ू है…

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भाजपा वालों का दुष्प्रचार जारी है.. वो ये कि अगर 'आप' को वोट दिया तो कांग्रेस जीत जाएगी क्योंकि इससे भाजपा का वोट कटेगा. यानि भाजपा वाले 'आप' को वोटकटवा पार्टी बता रहे हैं. दोस्तों याद रखना, हर पार्टी शुरू में वोटकटवा होती है. बसपा को याद करिए. जब बहुजन समाज पार्टी का उदय हुआ था तो उसने वोट काटने का ही काम किया था. बाद में बसपा अपने ताकत के दम पर सत्ता में आई. जाति, धर्म, क्षेत्र को वोटों में तब्दील करने की राजनीति का दौर धीरे-धीरे पुराना पड़ता जा रहा है. अब नई तरह की राजनीति को आगे बढ़ाने का मौका है. आम आदमी पार्टी इसी नई राजनीति का सिंबल है. इस बार वोट दीजिए. कांग्रेस और भाजपा को इकट्ठे नकार कर 'आप' को वोट दीजिए और फिर देखिएगा कि कैसे बोलती बंद होती है संसद और विधानसभाओं में चरने-खाने वाले और देश को अपना चारागाह समझने वालों की. यह सोचना छोड़ दीजिए कि आपके वोट से कौन जीतेगा, कौन हारेगा. आप बस यह सोचिए कि आपका वोट सही पार्टी, सही आदमी को पड़ रहा है या नहीं. हर शुरुआत, हर पहल हमेशा छोटी दिखती है लेकिन वह अनंत संभावनाएं लिए होती है… अगर आपके मन में करप्शन, जातिवाद, धर्मवाद, क्षेत्रवाद के खिलाफ नफरत है तो सीधे अपना वोट झाड़ू पर मारें ताकि आगे चलकर यह झाड़ू बड़े बड़ों के मुंह पर फिर सके…

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आम आदमी पार्टी चुनाव प्रचार के लिए इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया पर किसी तरह का व्यय नहीं करेगी. पार्टी सोशल मीडिया और डोर-टू-डोर कैंपेन पर ज्यादा फोकस कर रही हैं. चुनाव आयोग ने प्रत्येक प्रत्याशी पर 14 लाख खर्च करने की सीमा तय कर दी है. इस कारण अरविन्द केजरीवाल चुनाव में प्रचार-प्रसार पर कम से कम बजट खर्च करना चाहते हैं. इसलिए वे इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया पर चुनाव प्रचार से संबधित किसी तरह का व्यय नहीं कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम 70 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करने की योजना बना रहे है और इतने कम बजट पर हम प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और न्यू मीडिया पर चुनाव प्रचार के लिए अतिरिक्त पैसा नहीं लगा सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि डोर-टू-डोर कैम्पेन पर हम बहुत फोकस कर रहे हैं. हमारा प्रत्येक प्रत्याशी प्रत्येक चुनाव क्षेत्र में घर-घर जाकर मिले, उनसे दिल्ली में भ्रष्टाचार की स्थिति पर बात करे.

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चुनाव में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया पर पैसा खर्च करने से तौबा करके केजरीवाल ने एक और साहसिक निर्णय लिया है. केजरीवाल ने अपने बूते हो सकने वाले यानि सोशल व वेब मीडिया को माध्यम बनाकर सही तरीका अपनाया है. कारपोरेट मीडिया को औकात में लाने का रास्ता भी यही है. जनता के पैसे लूट कर दैत्याकार घराने बन चुके ये मीडिया हाउस चुनाव में पैसे लेकर खबरें दिखाएंगे, इसलिए ज्यादा अच्छा यही है कि इनके यहां कुछ भी खर्च करने से तौबा कर लिया जाए. मैं केजरीवाल की इस पहल का स्वागत करता हूं और बाकी पार्टियों से भी अपील करता हूं कि वे भी यही रास्ता अपनाएं.

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आम आदमी पार्टी और इसके नेताओं को बदनाम करने के लिए कांग्रेस और भाजपा ने काफी मेहनत की है. सही भी है. अगर ये लोग किसी जेनुइन के नाश की साजिश नहीं रचेंगे तो अपनी गंदी राजनीति और सत्ता में बैठने का खेल कैसे जारी रख सकते हैं.. इसलिए दोस्तों, भाजपा कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया के लिए बांटे गए अरबों खरबों रुपये से सक्रिय चिलगोजुओं की बातों पर ध्यान मत देना… राजनीति और वोट बड़ा संवेदनशील मसला है. इसे यूं ही जाया मत कर देना और फिर अगले पांच साल रोना. इस लोकतांत्रिक सिस्टम में बड़ी मुश्किल ये है कि सत्ता का हिस्सा बनने के लिए करप्ट और बाहुबली होना बड़ा जरूरी होता है. लेकिन अगर कोई इस सिस्टम को ही ठीक करने के लिए आगे बढ़ रहा हो तो उसे हमें सपोर्ट करना चाहिए. जब सबको देख चुके हों तो फ्रेश एयर यानि ताजी हवा को भी मौका दें… राजनीति बदबू मार रही है. इसलिए ताजे जल को आगे बढ़ाओ, फ्रेश एयर को सामने लाओ ताकि दिल-दिमाग सही-सलामत रहे… केजरीवाल और आम आदमी पार्टी जिंदाबाद..

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मुझे आम आदमी पार्टी इसलिए पसंद है क्योंकि… यह उन गुस्सैल और सरोकारी नौजवानों की पार्टी है जो हमारे आपके घरों से आते हैं और जिनके मन मिजाज में सब कुछ बदलने का जज्बा है… ये ऐसे नौजवान हैं जिन्होंने कम समय में सत्ता और सिस्टम के सारे तिकड़म झेल देख चुके हैं… इसी कारण अंततः इससे आजिज आकर इन्होंने सत्ता में घुसकर सत्ता की साफ सफाई करने की ठानी है… ऐसे नौजवानों को सपोर्ट नहीं किया गया तो समय हम सभी को माफ नहीं करेगा… ये कांग्रेस भाजपा तो पेशेवर पार्टियां हैं, ये पैदा ही हुई हैं सत्ता पाने और राजनीति करने के लिए… इनसे अलग कोई जेनुइन पार्टी खड़ी हो रही है तो उसे खड़ा करें… 'आप' के साथ एक झाड़ू लेकर आप भी चलें ताकि सफाई अभियान तेज हो सके….

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जब मैं मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, अरविंद केजरीवाल, डा. कुमार विश्वास, संजय सिंह, विभव आदि युवाओं को देखता हूं तो लगता है कि इनमें थोड़ा थोड़ा मैं भी हूं… सोचिए, क्या हमने आपने कभी ये हिम्मत दिखाई कि देश समाज के सवालों के लिए नौकरी और फेसबुक छोड़कर सड़क पर उतरेंगे और दो-दो हाथ करेंगे… और, सरकार नेता नहीं माने तो अपनी पार्टी बनाकर चुनाव में कूद जाएंगे… यह बड़ा काम है और बड़ा काम बड़े जुनूनी लोग ही कर पाते हैं.. अपने बने बनाए मानसिक फ्रेमवर्क से निकलिए, भाजपाई कांग्रेसी माइंडसेट को तोड़िए और हमारे आप जैसों की पार्टी यानि झाड़ू वाली पार्टी 'आप' को मजबूत बनाइए… और कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम चुनाव में अपना एक वोट जरूर डाल दें…

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हर चुनाव से पहले हमेशा ऐसे पुराने व सड़े मुद्दे अंतरिक्ष से लाकर हमारे आपके बीच टपका दिए जाते हैं जिन पर हम लोग कई बार बार बतिया बतिया के, बहसिया बहसिया के थक चुके होते हैं… असल में ऐसे मुद्दों में हमको आपको उलझाना ही इन कांग्रेसी भाजपाइयों की साजिश होती है… किसी को मुस्लिम वोट चाहिए तो मुस्लिम वोट पोलराइज करने की राजनीति कर रहा है तो किसी को हिंदू वोट चाहिए इसलिए वह हिंदू वोट पोलराइज करने के बारे में लगातार बोले लिखे कहे जा रहा है… यार, खुद को देखो, वही शरीर नाक कान आंख मुंह है जो सबमें है इसलिए मानव मात्र के बारे में सोचो और आम आदमी पार्टी के आदमी बनो… जिस समाज में कम पढ़े लिखे लोग ज्यादा होते हैं वे पुरातन, कट्टरपंथी और गैर-जरूरी इमोशनल मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय रहते हैं, अपने दैन्यदिन के सवालों पर कम… और, ये इमोशनल, कम दिमाग के लोग राजनीति को हमेशा बयानों, मुद्दों, नारों के जरिए पकड़ने की कोशिश करते हैं, इसके असल डायनमिक्स को कम समझ पाते हैं… राजनीति में नए नेताओं का आते रहना बहुत जरूरी है, राजनीति में नई पार्टियों का बनते रहना बहुत जरूरी है, राजनीति में दो स्थापित ध्रुवों कांग्रेस व भाजपा के इतर कई नए ध्रुवों का बनना बहुत जरूरी है… ये अलग अलग ध्रुव ही असल में तानाशाही फासीवाद भ्रष्टाचार महंगाई बेरोजगारी को लाने से रोकने का काम करेंगे… नए दौर में कोई ऐसी पार्टी नहीं जो आम आदमी पार्टी की तरह उर्जावान, जमीनी और लड़ाकू सोच वाली हो, साथी ही जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा जैसे आदिम रोगों से मुक्त हो… तो, दोस्तों, जैसे हर चीज आप ठोक बजाकर करते हो, वैसे ही राजनीति की समझ भी ठोक बजाकर लेना और इसी हिसाब से ठोक बजाकर अपनी खुद की सोच समझ व सरोकार डेवलप करना… आम आदमी पार्टी पर आप भी श्रम, पैसा और वोट खर्च करिए… एक नई शुरुआत को ताकत बख्शिए…

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जिन लोगों ने देश बेचा, जिन लोगों ने देश बांटा, जिन लोगों ने आदमी को आदमी से लड़ाया, जिन लोगों ने सीमाएं व सरहदें बनाई और इनके चक्कर में हजारों करोड़ों को कटवाया-लड़वाया… उन लोगों को नेता कहते हैं.. नेता नामक प्राणी हमेशा दूसरों को भिड़ा कर अपना उल्लू सीधा करने के लिए जाना जाता है और इसकी खासियत होती है कि जब यह एक बार ताकत यानि पावर यानि सत्ता से चिपक जाता है तो उसे छोड़कर हटना बिलकुल नहीं चाहता इसलिए वह अपने विरोधियों, अपने विकल्पों को मरवाने, बदनाम करने, साजिश रच कर नष्ट करने के प्रयास करता रहता है… और, दुर्भाग्य से हममें से कई लोग उसी की भाषा बोलने लगते हैं… नए विकल्प नहीं खड़ा कर पाए तो याद रखिए, हम लोगों के जीवन का संकट बढ़ता जाएगा.. बेरोजगारी, महंगाई, करप्शन के सूत्र इसी में छिपे हैं कि जो प्रोफेशनल सत्ताबाज हैं, उन्हें सत्ता से खदेड़ो और नए लोगों को, नौजवानों को सत्ता में भेजो… आम आदमी पार्टी एक बड़ी शुरुआत है, इसके साथ खुद को जोड़ो….

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हमें नए लोगों को प्रमोट करने और उन्हें सपोर्ट करने का भाव रखना चाहिए. आम आदमी पार्टी ने अगर सत्ता में आने के बाद गड़बड़ की तो हम लोग इसका भी विरोध करेंगे और उन दिनों अगर आप सबों में से कोई शख्स नई पार्टी बनाएगा तो उसे सपोर्ट करेंगे. मैं नहीं कहता कि कोई खास आदमी और कोई खास पार्टी कभी करप्ट नहीं होती. इसको लेकर मैं हमेशा खुला दिमाग रखता हूं. हर चीज के कई शेड्स होते हैं. सत्ता से बाहर होने का अलग शेड होता है. सत्ता में आने का अलग नजारा होता है. सत्ता खोने का भय अलग रंग पैदा करता है. सत्ता न मिलने का खौफ अलग तेवर पैदा करता है. सत्ता-सिस्टम की गंदगी बदलने का जज्बा लिए लड़ने का कलर अलग होता है. मतलब ये कि हर चीज के बारे में संपूर्णता में सोचना समझना चाहिए.. और, मैं आज के दौर के लिहाज से आम आदमी पार्टी के पाले में खड़ा होने को सबसे कम गलत आप्शन मानता हूं. ताकि, प्रोफेशनल पार्टीबाजों और प्रोफेशनल पालिटिशियन्स को झटका मिले, सबक मिले और इस बहाने इन्हें ज्यादा सजग ज्यादा जनपक्षधर होकर शासन-राजनीति करने की समझ मिल सके…

भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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